तमिलनाडु में बीजेपी की युवा रणनीति: 1 करोड़ से अधिक मतदाताओं को साधने का लक्ष्य

तमिलनाडु के युवा मतदाता और बीजेपी की चुनावी रणनीति

चेन्नई: आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तमिलनाडु में अपनी चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य राज्य के तमिलनाडु में एक करोड़ से ज़्यादा युवाओं को साधने का है, जिसके लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। बीजेपी नेतृत्व में एनडीए, राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने और सत्ताधारी डीएमके गठबंधन को कड़ी चुनौती देने के लिए युवाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति में युवा मतदाताओं की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है, और बीजेपी इस अवसर को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

बीजेपी की युवा केंद्रित रणनीति और वोट बैंक का गणित

तमिलनाडु में कुल 5.67 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 18 से 20 साल के युवा मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 5 लाख है। इसके अतिरिक्त, 18 साल पूरे कर पहली बार वोट डालने जा रहे युवाओं की संख्या 12.5 लाख है। इस प्रकार, बीजेपी कुल 1 करोड़ 18 लाख युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए नई-नई योजनाओं पर काम कर रही है। पार्टी ने युवा नेताओं के ज़रिए इन युवाओं तक संपर्क साधने की तैयारी की है और इसमें बीजेपी युवा मोर्चा की मदद ली जा रही है। बीजेपी की यह कोशिश राज्य में 5 से 6 प्रतिशत अतिरिक्त वोट हासिल करने की है, जिससे डीएमके नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन से नज़दीकी मुकाबला संभव हो सके। पिछले दो चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए और डीएमके नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के बीच 5 से 6 प्रतिशत वोटों का अंतर रहा है, जिसे बीजेपी अब कम करना चाहती है।

युवाओं के साथ-साथ, बीजेपी नए-नए जाति समूहों और संगठनों को भी अपने पाले में लाने का प्रयास कर रही है। राज्य की राजनीति में वन्नियार, थेवर, दलित और ओबीसी समुदायों का बड़ा प्रभाव है। बीजेपी इन समुदायों के बीच पैठ बनाने के लिए सामाजिक अभियानों, स्थानीय नेताओं को आगे बढ़ाने और केंद्र सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से प्रचारित करने पर जोर दे रही है। पार्टी की यह बहुआयामी रणनीति तमिलनाडु में अपनी जड़ों को गहरा करने और एक मजबूत चुनावी आधार तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कमान अमित शाह के हाथों में, प्रदेश नेतृत्व भी सक्रिय

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु में चुनावी कमान खुद संभाली है। वे पार्टी की चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए राज्य के दो दिवसीय दौरे पर भी जा रहे हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन भी राज्य में पार्टी संगठन में नई जान फूंकने के लिए पूरे राज्य में यात्रा शुरू कर चुके हैं। केंद्रीय और राज्य नेतृत्व की यह सक्रियता दर्शाती है कि बीजेपी तमिलनाडु को लेकर कितनी गंभीर है।

2024 के लोकसभा चुनाव में, एआईएडीएमके से गठबंधन टूट जाने के बाद अकेले चुनाव लड़ने वाली बीजेपी 18.28 प्रतिशत वोट हासिल करने में सफल रही थी, जिसमें उसे 79 लाख से ज़्यादा वोट मिले थे। इस प्रदर्शन से पार्टी काफी उत्साहित है, क्योंकि यह उसके वोट शेयर को दहाई के आंकड़े तक पहुंचाता है। इससे पूर्व 2021 के विधानसभा चुनाव में, कुल 234 सीटों में से सत्ताधारी डीएमके गठबंधन को 159 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन को 75 सीटें मिलीं थीं। रणनीतिकारों का मानना है कि यदि 2024 का लोकसभा चुनाव दोनों दलों ने मिलकर लड़ा होता तो 12 सीटों पर जीत की संभावनाएं बन सकती थीं, क्योंकि एआईएडीएमके को 23 प्रतिशत और भाजपा को 18 प्रतिशत वोट मिले थे, जो संयुक्त रूप से 41.33 प्रतिशत होता, जबकि सत्ताधारी डीएमके नेतृत्व इंडिया गठबंधन ने 46.97 प्रतिशत वोट हासिल कर सभी 39 लोकसभा सीटें जीती थीं।

बीजेपी की यह युवा केंद्रित और जातिगत समीकरणों को साधने की रणनीति तमिलनाडु में उसकी दीर्घकालिक विस्तार योजना का हिस्सा है। पार्टी का लक्ष्य केवल तात्कालिक चुनावी लाभ नहीं, बल्कि राज्य में अपनी एक स्थायी पहचान बनाना और भविष्य में एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरना है। यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना में कितनी सफल हो पाती है और क्या वह डीएमके के गढ़ में सेंध लगा पाएगी।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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