केंद्र सरकार का AI पर बड़ा फैसला: 'AI गवर्नेंस और इकोनॉमिक्स ग्रुप' गठित, जानें इसके कार्य

भारत सरकार द्वारा गठित AI गवर्नेंस समिति की बैठक

केंद्र सरकार ने देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) के बढ़ते प्रभाव और संभावनाओं को देखते हुए एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। देश में AI के क्षेत्र में नीति-निर्माण, समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च-शक्ति समिति 'AI गवर्नेंस और इकोनॉमिक्स ग्रुप' (AI Governance and Economics Group - AIGEG) का गठन किया गया है। यह फैसला भारत को वैश्विक AI परिदृश्य में एक मजबूत स्थिति में लाने और इस तकनीक का जनकल्याण व आर्थिक विकास के लिए प्रभावी ढंग से उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह समूह भारत की राष्ट्रीय AI गवर्नेंस रणनीति (AI Governance Strategy) का केंद्रीय संस्थागत तंत्र बनेगा, जो भविष्य की रूपरेखा तय करेगा।

AI गवर्नेंस रणनीति: जानिए समिति की संरचना और नेतृत्व

AI को बढ़ावा देने, जन उपयोग और इसके नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित इस महत्वपूर्ण समिति 'AIGEG' की अध्यक्षता केंद्रीय आईटी, रेलवे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव करेंगे। यह उनकी बहुआयामी जिम्मेदारियों को दर्शाता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद को इस समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति में देश के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार (Principal Scientific Advisor), मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor), नीति आयोग (NITI Aayog) के सीईओ (CEO) के साथ-साथ आर्थिक मामलों (Economic Affairs), दूरसंचार (Telecommunications), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology) मंत्रालयों के सचिव भी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। कुल 10 सदस्यों वाली यह समिति AI नीतियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

AIGEG समिति के गठन का प्रस्ताव पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (Economic Survey 2025-26) में रखा गया था। इस सर्वेक्षण में भारत की श्रम-आधारित अर्थव्यवस्था (Labor-based Economy), सामाजिक स्थिरता (Social Stability) और रोजगार (Employment) वास्तविकताओं के अनुरूप AI को ढालने के लिए एक समन्वय प्राधिकरण की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य AI को 'मानव कल्याण और आर्थिक समावेशन' (Human Welfare and Economic Inclusion) के अधीन रखना, श्रम-बाजार प्रभाव मूल्यांकन (Labor-market Impact Assessment) और कौशल विकास (Skill Development) पर विशेष ध्यान केंद्रित करना था।

AIGEG के मुख्य कार्य: AI क्षेत्र में भारत का रोडमैप

AIGEG का मुख्य कार्य विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और क्षेत्रीय नियामकों (Sectoral Regulators) के बीच नीतिगत समन्वय स्थापित करना होगा। यह समूह सार्वजनिक और निजी क्षेत्र (Public and Private Sector) में AI गवर्नेंस से जुड़ी राष्ट्रीय पहलों की निगरानी करेगा, साथ ही AI से जुड़े उभरते जोखिमों (Emerging Risks), नियामक कमियों (Regulatory Gaps) और कानूनी संशोधनों (Legal Amendments) की आवश्यकता का गहन अध्ययन करेगा।

यह समिति देश की AI स्थिति का आकलन कर एक व्यापक रणनीति तैयार करेगी और उद्योग व अन्य हितधारकों (Stakeholders) के साथ मिलकर अगले दशक के लिए AI उपयोग का रोडमैप (Roadmap) बनाएगी। विशेष रूप से, AI के रोजगार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन करना और उसके अनुरूप कौशल विकास की रणनीतियाँ तैयार करना भी इसके प्रमुख दायित्वों में शामिल है। यह समिति जिम्मेदार AI नवाचार (Responsible AI Innovation) को बढ़ावा देगी और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी AI उपयोग को स्थगित करने का अधिकार भी रखेगी।

भारत को AI महाशक्ति बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम

यह कदम भारत को एक AI महाशक्ति (AI Superpower) बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी प्रयास है। सरकार पहले से ही 'इंडियाएआई मिशन' (IndiaAI Mission) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इस क्षेत्र में निवेश कर रही है। AIGEG के गठन से AI से संबंधित नीतियाँ एकीकृत होंगी, संभावित जोखिम कम होंगे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सही मायनों में जनकल्याण व आर्थिक विकास का एक सशक्त माध्यम बन सकेगी। यह समिति देश में AI के विकास और उपयोग के लिए एक मजबूत नियामक और नीतिगत ढांचा तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर AI नवाचार में अग्रणी बन सकेगा।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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