मानो या न मानो: अमेरिकी एक्‍सपर्ट का दावा - ईरान बना चौथी सबसे बड़ी ताकत, जानें क्यों?

ईरान की होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए बढ़ती वैश्विक ताकत

हाल ही में अमेरिकी एक्‍सपर्ट रॉबर्ट पेप (Robert Pape) ने एक चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और शक्ति संतुलन (Power Balance) पर नई बहस छेड़ दी है। पेप के अनुसार, ईरान अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत (Fourth Major Power) के रूप में उभर रहा है, जिसे नजरअंदाज करना पश्चिमी देशों के लिए मुश्किल होगा। यह उस वक्त सामने आया है, जब ईरान अमेरिका के सामने मजबूती से खड़ा है और खुद अमेरिकी जनता भी युद्ध के खिलाफ संसद के बाहर प्रदर्शन कर रही है।

अमेरिकी टीवी शो 'मॉर्निंग जो' (Morning Joe) की एक चर्चा का हवाला देते हुए रॉबर्ट पेप ने बताया कि अब तक पश्चिमी मीडिया में ईरान की कमजोरी पर बहस होती थी, लेकिन अब अचानक पूरी चर्चा का रुख बदल गया है। अब वहां 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के भविष्य और ईरान के साथ बातचीत (Negotiation) कैसे की जाए, इस पर मंथन हो रहा है। पेप का मानना है कि दुनिया अब समझ गई है कि ईरान को अब 'सुलझाई जाने वाली समस्या' के बजाय एक 'बड़ी ताकत' के रूप में देखना होगा, जिसका लोहा मानना ही पड़ेगा।

ईरान की 'चौथी सबसे बड़ी ताकत' बनने की वजह: होर्मुज जलडमरूमध्य

रॉबर्ट पेप ने इस वैश्विक नजरिए में आए इस गहरे बदलाव को रेखांकित किया है। उनका कहना है कि दुनिया में नए 'पावर सेंटर' (Power Centers) इसी तरह से उभरते हैं। दो हफ्ते पहले 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' (The New York Times) में अपने एक लेख में भी उन्होंने यही बात कही थी कि ईरान बिखर नहीं रहा, बल्कि होर्मुज का इस्तेमाल करके एक टिकाऊ ताकत (Sustainable Power) बन रहा है। उस समय उनकी बात कई लोगों को अजीब लगी थी, लेकिन आज वही बात एक सच्चाई बन चुकी है।

पेप ने समझाया कि ईरान की इस नई ताकत के पीछे की चाबी 'होर्मुज जलडमरूमध्य' है। यह दुनिया का वह संकरा समुद्री रास्ता (Narrow Sea Passage) है, जहां से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। यह पूरी दुनिया के समुद्री तेल व्यापार (Maritime Oil Trade) का करीब 25 फीसदी हिस्सा है। एशिया से लेकर खाड़ी देशों (Gulf Countries) की पूरी अर्थव्यवस्था इसी एक समुद्री रास्ते पर टिकी हुई है। पेप कहते हैं कि जो भी देश इस 'चोकपॉइंट' (Chokepoint) को नियंत्रित (Control) करेगा, वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की ताकत रखेगा।

ईरान की इस नई शक्ति के पीछे एक बेहद स्मार्ट रणनीति (Smart Strategy) है, जिसे पेप 'दबदबा' (Dominance) नहीं, बल्कि 'डिनायल' (Denial) की नीति कहते हैं। ईरान को इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह से बंद करने की कोई आवश्यकता नहीं है। वह केवल अपनी मिसाइलों (Missiles), ड्रोन्स (Drones), समुद्री सुरंगों (Sea Mines) और अपनी शानदार भौगोलिक स्थिति (Geographic Position) का उपयोग करके वहां एक लगातार बना रहने वाला 'खतरा' (Threat) पैदा कर रहा है। इस रास्ते पर केवल 'अनिश्चितता' (Uncertainty) का खौफ पैदा करना ही दुनिया का व्यवहार बदलने के लिए पर्याप्त है। इस तरह, ईरान बिना रास्ता ब्लॉक किए ही अपना काम निकाल रहा है।

पश्चिम के लिए कड़वी सच्चाई और 'एस्केलेशन ट्रैप'

रॉबर्ट पेप ने पश्चिमी देशों और अमेरिका के सामने एक बहुत बड़ी सच्चाई रखी है। उनका कहना है कि इस स्थिति ने दुनिया के सामने एक गहरी चुनौती पेश कर दी है। अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं। या तो पूरी दुनिया ईरान को वैश्विक शक्ति के 'चौथे केंद्र' (Fourth Center of Global Power) के रूप में स्वीकार कर ले, या फिर ईरान के इस दबदबे को तोड़ने के लिए एक ऐसी जंग छेड़े, जिसकी भयंकर कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ेगी। पेप इसे 'द एस्केलेशन ट्रैप' (The Escalation Trap) यानी बढ़ते तनाव का जाल कहते हैं। यह स्थिति वैश्विक नीति निर्माताओं (Global Policymakers) के लिए एक जटिल पहेली बन गई है, जहां हर कदम के दूरगामी परिणाम होंगे।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि वैश्विक भू-राजनीति में तेजी से बदलाव आ रहे हैं और पुरानी धारणाएं टूट रही हैं। ईरान का रणनीतिक उभार न केवल मध्य पूर्व (Middle East) बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा (Global Energy Security) और अंतरराष्ट्रीय संबंधों (International Relations) के लिए भी महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है। आने वाले समय में दुनिया यह देखेगी कि क्या पश्चिमी देश ईरान की इस नई पहचान को स्वीकार करते हैं, या फिर 'एस्केलेशन ट्रैप' में फंसते हैं।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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