कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण विधेयक (Women's Reservation Bill) और परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार 'महिलाओं के नाम पर राजनीति' कर रही है और असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। News24 से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि महिलाओं का हितैषी बनने का दावा करने से पहले सरकार को ज़मीनी हकीकत पर काम करना होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर बहस छिड़ी हुई है।
प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक के वर्तमान स्वरूप पर सवाल उठाते हुए कहा कि जितने भी पुरुष नेता हैं, वे अपनी मौजूदा सीटें सुरक्षित रखना चाहते हैं। यही वजह है कि महिलाओं के लिए अलग से सीटें बनाने की बात कही जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जब महिलाओं को आरक्षण देना है, तो मौजूदा लोकसभा सीटों (Lok Sabha seats) में ही उन्हें मौका क्यों नहीं दिया जा सकता? यह सवाल सीधे तौर पर विधेयक के क्रियान्वयन और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर उंगली उठाता है, जो देश की आधी आबादी के प्रतिनिधित्व से जुड़ा है।
महिलाओं के नाम पर राजनीति: प्रियंका गांधी के तीखे सवाल
परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर भी प्रियंका गांधी ने सरकार की नीयत पर संदेह जताया। उनका कहना था कि विपक्ष सत्ता पक्ष पर भरोसा नहीं कर सकता, क्योंकि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे (Political gain) के लिए किया जा सकता है। उन्होंने हाल की राजनीतिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जो कुछ भी हुआ, वह लोकतंत्र (Democracy), संविधान (Constitution) और देश की जीत थी, साथ ही विपक्ष की एकजुटता (Opposition unity) की भी जीत थी। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता में बने रहने के लिए एक साज़िश रच रही है और महिलाओं के नाम पर खुद को मसीहा साबित करने की कोशिश कर रही है।
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प्रियंका गांधी ने ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं का मसीहा बनना इतना आसान नहीं है। इसके लिए ज़मीन पर काम करके दिखाना पड़ता है। उन्होंने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्नाव और हाथरस जैसे चर्चित मामलों का जिक्र किया, साथ ही महिला ओलंपिक खिलाड़ियों (Women Olympic athletes) के मुद्दों को भी उठाया। उनका कहना था कि इन मामलों में सरकार की भूमिका पर सवाल उठे हैं और ऐसे में संसद में आकर महिलाओं के हितैषी बनने का दावा करना सही नहीं है। ये मुद्दे सीधे तौर पर सरकार की महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की नीतियों (Policies) पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
विधेयक में संशोधन और संतुलन की मांग
कांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि 2023 के महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन करके इसे तुरंत लागू किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में ही ओबीसी (OBC) के लिए आरक्षण का प्रावधान किया जा सकता है। इसके अलावा, उन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच संतुलन (North-South balance) बनाए रखने की बात कही। प्रियंका गांधी का मानना है कि फिलहाल 543 सीटों का मौजूदा ढांचा ही जारी रहना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे और किसी भी क्षेत्र को अनुचित फायदा या नुकसान न हो। उनके बयान से स्पष्ट है कि विपक्ष इस विधेयक को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखना चाहता है और इसकी शर्तों पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है। अंत में उन्होंने कहा कि जब विपक्ष एकजुट होता है, तो सरकार को पीछे हटना पड़ता है, जो मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में विपक्ष की बढ़ती ताकत का संकेत है।
प्रियंका गांधी के ये बयान महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन की राह में आने वाली राजनीतिक और प्रक्रियात्मक चुनौतियों को उजागर करते हैं। यह केवल महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा नहीं, बल्कि परिसीमन, ओबीसी आरक्षण और क्षेत्रीय संतुलन जैसे कई संवेदनशील राजनीतिक आयामों से जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों और सुझावों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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