दिल्ली में अब राशन का पैसा सीधे गरीबों के पेट तक पहुंचेगा, यह सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रेखा सरकार ने केंद्र सरकार के खाद्य विभाग (DoFPD) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ मिलकर राजधानी की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में भारतीय रिजर्व बैंक की डिजिटल करेंसी (CBDC या e₹) को लागू करने का मास्टरप्लान तैयार कर लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राशन के लिए डिजिटल करेंसी के माध्यम से मिलने वाले पैसे का दुरुपयोग रोकना है, ताकि कोई भी इसे शराब, जुए या अन्य फिजूलखर्ची में न उड़ा सके। यह कदम न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा बल्कि लाखों जरूरतमंद परिवारों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को सीधा लाभ पहुंचाएगा।
दिल्ली में अब राशन के लिए मिलेगा 'पर्पज-स्पेसिफिक' डिजिटल करेंसी
अभी तक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के तहत राशन की सब्सिडी का पैसा सीधे बैंक खातों में आता था, जहाँ से कई बार परिवार के पुरुष सदस्य इसे राशन खरीदने के बजाय अपनी गलत आदतों पर खर्च कर देते थे। इससे महिलाएं और बच्चे अक्सर अनाज से वंचित रह जाते थे। लेकिन अब यह चालाकी नहीं चलेगी। दिल्ली सरकार द्वारा भेजी जाने वाली यह डिजिटल करेंसी (digital currency) 'पर्पज-स्पेसिफिक' (purpose-specific) होगी, यानी इसका इस्तेमाल केवल अधिकृत सरकारी राशन दुकानों (Fair Price Shops - FPS) पर ही किया जा सकेगा। दुकान पर खड़ा होकर कोई चाहकर भी गोलगप्पे या सिगरेट के लिए उस पैसे को ट्रांसफर नहीं कर पाएगा।
कैसे काम करेगा यह नया डिजिटल सिस्टम और क्या होंगे इसके फायदे?
यह नया लॉक्ड डिजिटल सिस्टम कई मायनों में गेम चेंजर साबित होगा:
यह डिजिटल रुपया केवल राशन दुकान पर मान्य होगा। आपके वॉलेट में मौजूद इस पैसे को सिर्फ अधिकृत सरकारी राशन दुकान का क्यूआर कोड (QR code) ही स्वीकार कर सकेगा। आम डीबीटी (DBT) के विपरीत, जहाँ पैसा लोग अपनी मर्जी से कहीं भी खर्च कर लेते थे, नई व्यवस्था में राशन की सब्सिडी का पैसा किसी दूसरे काम में इस्तेमाल होना नामुमकिन होगा। यह पैसा सीधे लाभार्थी के ई-वॉलेट (e-wallet) में आएगा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के लाभार्थियों को चावल पर ₹44.57 प्रति किलो और गेहूं पर ₹30.13 प्रति किलो की दर से मिलने वाली सब्सिडी सीधे उनके ई-वॉलेट में भेजी जाएगी।
इसके साथ ही, सरकार ने राशन कार्ड (PHH श्रेणी) के लिए सालाना पारिवारिक आय की सीमा को ₹1.20 लाख से बढ़ाकर ₹2.50 लाख करने का प्रस्ताव दिया है। इससे दिल्ली के लाखों कामकाजी गरीब इस दायरे में आ जाएंगे, जिन्हें पहले पात्रता नहीं मिल पाती थी। एक और महत्वपूर्ण सुविधा यह है कि लाभार्थी फेयर प्राइस शॉप पर जाकर आसानी से क्यूआर कोड स्कैन करके या मोबाइल पर आए एसएमएस-आधारित ओटीपी (SMS-based OTP) के जरिए बिना किसी नकद लेनदेन के अपना राशन ले सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी होगी जिनके पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं है। यह प्रोग्रामेबल मनी (programmable money) सुनिश्चित करेगी कि पैसा उसी काम में लगे जिसके लिए इसे भेजा गया है।
Similar Posts
- India's Exports Record: वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का निर्यात 860 अरब डॉलर के ऐतिहासिक शिखर पर, पीयूष गोयल की घोषणा
- Bihar BJP New Era: बिहार में BJP का नया दौर, राजनीति और व्यवस्था में बड़े बदलाव की आहट, समझें 5 इनसाइड स्टोरी
- सेबी (SEBI) की बड़ी राहत: कंपनियां IPO साइज 50% तक बदल सकेंगी, DRHP दोबारा नहीं होगा जरूरी - बिजनेस स्टैंडर्ड
- राघव चड्ढा की सुरक्षा में बड़ा बदलाव: पंजाब ने ली वापस, केंद्र ने दी जेड सिक्योरिटी
- संसद में पप्पू यादव का विस्फोटक दावा: 'कौन देखता है सबसे ज्यादा पोर्न?' और महिला आरक्षण बिल का हश्र
दूरगामी प्रभाव: गरीबों को सशक्तिकरण और पारदर्शिता का नया युग
दिल्ली जैसे महंगे शहर में, जहाँ एक अकुशल मजदूर की न्यूनतम मासिक मजदूरी ₹18,000 से अधिक है, पुरानी आय सीमा (₹1.20 लाख) कई जरूरतमंदों को राशन कार्ड से वंचित कर देती थी। अब ₹2.50 लाख की नई सीमा से 64.93 लाख मौजूदा लाभार्थियों के साथ-साथ हजारों नए परिवारों को भी खाद्य सुरक्षा कवच मिल पाएगा। यह संशोधन दिल्ली खाद्य सुरक्षा नियम, 2026 के नियम 3(1) के तहत प्रस्तावित है।
इस 'पर्पज-स्पेसिफिक' डिजिटल करेंसी (purpose-specific digital currency) को आर्थिक और सामाजिक सुधार के लिहाज से दुनिया भर में क्रांतिकारी तकनीक माना जा रहा है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पैसे का दुरुपयोग शून्य (Zero) हो जाएगा, जिससे परिवार की महिलाएं और बच्चे, जो अक्सर पुरुषों की फिजूलखर्ची का शिकार होते थे, अब सीधे अनाज प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही, दिल्ली की 1,943 सरकारी राशन दुकानों पर इस सिस्टम के आने से पूरा लेन-देन रियल-टाइम ट्रैक होगा, जिससे राशन डीलरों द्वारा होने वाली हेराफेरी और कालाबाजारी पर हमेशा के लिए लगाम लग जाएगी।
यह पहल दिल्ली में खाद्य सुरक्षा और वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, कुशल और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शुरुआती चरण में इसे गेहूं और चावल की सब्सिडी के लिए लागू किया जा रहा है, लेकिन सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत मिलने वाली 1 किलो चीनी जैसी अन्य वस्तुओं के वितरण को भी इसी डिजिटल करेंसी (CBDC) मोड में लाया जा सकता है। यह एक ऐसा मॉडल बन सकता है जिसे देश के अन्य राज्य भी अपनी सार्वजनिक वितरण प्रणालियों में अपनाकर गरीबों तक सीधी और सुनिश्चित सहायता पहुंचा सकें।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.