चीन में ब्रेकअप के बाद अब डिजिटल एक्स का ट्रेंड, क्या भारत के मजनुओं के लिए ये है नई संजीवनी...

A humorous digital illustration representing the trend of creating virtual ex-partners after a breakup.

ब्रेकअप का दर्द अब डिजिटल ‘एक्स’ के साथ, क्या चीन के बाद अब भारत में भी आएगा ये ‘वर्चुअल’ तमाशा...

आजकल का प्यार वाई-फाई के सिग्नल जैसा है, कब गायब हो जाए, किसी को खबर नहीं। लेकिन जनाब, चीन से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर किसी भी इमोशनल भारतीय आशिक के रोंगटे खड़े हो सकते हैं। शंघाई के एक इंजीनियर झोउ तियानयी ने ब्रेकअप से उबरने का ऐसा नुस्खा ढूंढ निकाला है, जो शायद किसी भी ‘मजनू’ को हिला दे। अब वहां के युवा अपने पुराने प्यार के चैट्स, सोशल मीडिया पोस्ट और फोटोग्राफ्स को एक मशीन में डाल रहे हैं, ताकि उसकी एक डिजिटल कॉपी यानी ‘वर्चुअल एक्स’ तैयार की जा सके। यह डिजिटल वर्जन न तो फोन उठाना बंद करता है, न ही अचानक ब्लॉक करता है। बस आपके दुख को सुनता है और आपको तसल्ली देता है।

जब यादें रेंडरिंग का हिस्सा बन जाएं

सोचिए, जिस इंसान से पीछा छुड़ाने के लिए आपने महीनों तक रातें जागकर बिताईं, उसी की एक ‘अपग्रेडेड’ डिजिटल कॉपी आपके फोन में मौजूद है। यह टेक्नोलॉजी उन बारीक आदतों की भी नकल करती है जो आपके एक्स को स्पेशल बनाती थीं। अब चीन में यह चलन बहस का मुद्दा बन गया है। कुछ लोग इसे भावनात्मक सांत्वना कह रहे हैं, तो कुछ इसे डिजिटल मायाजाल। हमारे देश में तो ब्रेकअप का मतलब ही होता है—पड़ोस की चाय की टपरी पर बैठकर रोना और दोस्तों को ज्ञान देना। पर वहां तो लोग ‘कस्टमाइज्ड सांत्वना’ ले रहे हैं।

अब बात करते हैं हमारे यहां की। क्या सरकार इस पर भी कोई नियम लाएगी? अक्सर जब दुनिया में कोई नया ट्रेंड आता है, तो हमारी सरकारी मशीनरी सबसे पहले यह सोचती है कि कहीं इससे ‘संस्कृति’ को खतरा तो नहीं? खैर, इस डिजिटल एक्स के मामले में सरकार अगर पूछताछ करे कि भाई, आखिर तुम अपने डिजिटल पार्टनर से कौन सी ‘गुप्त बातें’ कर रहे हो, तो हैरानी नहीं होगी। वैसे भी, भारत में डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा का मुद्दा इतना गंभीर है कि अगर आपने अपने एक्स की फोटो किसी विदेशी प्लेटफॉर्म पर अपलोड की, तो शायद साइबर सेल वाले पूछेंगे—भैया, ये डेटा एक्सपोर्ट कर रहे हो या खुद का एक्स-पोर्ट? वैसे भी, बेरोजगारी के दौर में ‘डिजिटल एक्स’ के साथ वक्त गुजारना कहीं सरकार की नजर में ‘समय की बर्बादी’ या ‘नैतिक पतन’ तो नहीं बन जाएगा?

क्या यह सिर्फ एक ट्रेंड है या डिजिटल विदाई?

यह कहना मुश्किल है कि यह तकनीक हमें हीलिंग की तरफ ले जा रही है या हम एक और वर्चुअल लत का शिकार हो रहे हैं। अगर कल को ये डिजिटल कॉपी आपके किसी सरकारी फॉर्म या आधार कार्ड की डिटेल्स याद रखने लगी, तो आप क्या करेंगे? हकीकत तो यह है कि इंसान की फितरत ही ऐसी है—वह गलती सुधारने के बजाय, उसे एक मशीन में फीड करके ‘परफेक्ट’ बनाना चाहता है। यह ट्रेंड चीन से शुरू हुआ है, लेकिन सोशल मीडिया के इस दौर में इसे भारत तक पहुंचते देर नहीं लगेगी। बस दुआ कीजिए कि आपके डिजिटल एक्स का सॉफ्टवेयर क्रैश न हो, वरना ब्रेकअप का दुख तो होगा ही, साथ में रिपेयरिंग का बिल भी आएगा। आखिर में, प्यार हो या ब्रेकअप, सब कुछ अब एक एल्गोरिदम बन चुका है, और हम बस उसके यूजर हैं।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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