क्या अमेरिका एक बार फिर ईरान पर सैन्य कार्रवाई करेगा? चीन से लौटने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर जारी तनाव के बीच, अमेरिका की ओर से दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। यह सिर्फ दो देशों का मामला नहीं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति (global oil supply) और मध्य पूर्व (Middle East) की स्थिरता को प्रभावित करने वाला एक गंभीर संकट है।
अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकारों ने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए नई योजनाएँ तैयार कर ली हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यदि ट्रंप को यह लगने लगता है कि कूटनीति (diplomacy) पूरी तरह विफल हो चुकी है, तो अमेरिका जल्द ही ईरान पर फिर से सैन्य हमले शुरू कर सकता है। बताया जा रहा है कि पेंटागन (Pentagon) के अधिकारी "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" (Operation Epic Fury) को नए नाम के साथ दोबारा शुरू करने की तैयारी में हैं, जिसे पिछले महीने ट्रंप द्वारा युद्धविराम (ceasefire) घोषित किए जाने के बाद रोक दिया गया था।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को किया खारिज, होर्मुज संकट पर बढ़ी चिंता
हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। बीजिंग से लौटते समय एयर फोर्स वन (Air Force One) में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में कहा, "मैंने प्रस्ताव देखा और अगर मुझे पहली लाइन ही पसंद नहीं आती, तो मैं उसे फेंक देता हूं।" उनके इस बयान से स्पष्ट है कि ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते के लिए अमेरिका की शर्तें काफी सख्त होंगी।
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ट्रंप ने इस बात की भी पुष्टि की कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के साथ उनकी बैठक में ईरान का मुद्दा उठा था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने चीन से ईरान पर दबाव बनाने के लिए कोई विशेष अनुरोध नहीं किया। चीन, ईरान का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार (strategic partner) है और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल और गैस आपूर्ति पर उसकी निर्भरता काफी अधिक है। यही कारण है कि कई देश इस संकट को खत्म करने और ईरान को इस समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने के लिए समझौते की कोशिशों में जुटे हैं।
अमेरिका इस पूरे प्रकरण को एक कूटनीतिक जीत (diplomatic victory) के तौर पर पेश करना चाहता है। रिपोर्ट के अनुसार, कई देशों के अधिकारी ऐसे समझौते कराने में लगे हैं, जिससे ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक सफलता बता सकें। इसका एक बड़ा उद्देश्य अमेरिकी मतदाताओं (American voters) को यह भरोसा दिलाना भी है कि अमेरिका किसी लंबे और महंगे युद्ध में नहीं फंसेगा। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने हाल ही में कांग्रेस (Congress) में बयान देते हुए कहा, "जरूरत पड़ने पर हमारे पास संघर्ष बढ़ाने की योजना तैयार है।" वहीं, उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका के पास मध्य पूर्व में मौजूद 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों को धीरे-धीरे वापस बुलाने की योजना भी है, जो एक दोहरी रणनीति का संकेत है।
वर्तमान स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली (Israeli) अधिकारी अगले सप्ताह ईरान पर संभावित नए हमलों की तैयारी कर रहे हैं। मध्य पूर्व के दो अधिकारियों ने इसे युद्धविराम लागू होने के बाद की "सबसे बड़ी तैयारी" बताया है। यह दर्शाता है कि भले ही कूटनीति के रास्ते खुले हों, लेकिन सैन्य विकल्प को अभी भी मेज पर रखा गया है। आने वाले दिन इस क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, जब यह तय होगा कि क्या अमेरिका फिर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई करेगा या कोई कूटनीतिक हल निकलेगा।
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