किसानों के हक का यूरिया लूट रहीं प्लाईवुड फैक्ट्रियां: 'ऑपरेशन किसान' का बड़ा खुलासा

Plywood factories illegally diverting subsidized urea meant for farmers, ZEE NEWS investigation

हाल ही में ZEE NEWS के 'ऑपरेशन किसान' (Operation Kisan) ने देश को हिला देने वाले एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसमें किसानों के हक का सरकारी यूरिया प्लाईवुड फैक्ट्रियों (plywood factories) द्वारा लूटा जा रहा है। यह चौंकाने वाला खुलासा दिखाता है कि कैसे सिस्टम की खामियों और पुलिस की कथित लापरवाही का फायदा उठाकर बिचौलिये, सरकारी अधिकारी और प्लाईवुड फैक्ट्रियां मिलकर किसानों के हक का यूरिया औद्योगिक उपयोग के लिए बेच रहे हैं। यह सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों के अधिकारों पर सीधा डाका है, जिसका सीधा असर कृषि उत्पादन और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

दरअसल, प्लाईवुड और एमडीएफ (MDF) बोर्ड बनाने में जिस 'ग्लू' (glue) या रेजिन (resin) का इस्तेमाल होता है, उसे बनाने के लिए यूरिया की आवश्यकता होती है। नियमानुसार, इन फैक्ट्रियों को 'टेक्निकल ग्रेड यूरिया' (Technical Grade Urea) का उपयोग करना चाहिए, जिसकी कीमत 80 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है। लेकिन, भारी मुनाफा कमाने के लालच में, कई कंपनियां किसानों को मिलने वाले सब्सिडी वाले यूरिया (subsidized urea) का इस्तेमाल कर रही हैं, जो मात्र 6 रुपये प्रति किलोग्राम में उपलब्ध होता है। कीमत में यह बड़ा अंतर ही इस सरकारी यूरिया की कालाबाजारी (black marketing) का मुख्य कारण है, जिससे कंपनियों को करोड़ों का फायदा होता है और सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान।

इस नेटवर्क की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर (Bulandshahr) में 3 ट्रकों से 1575 बैग सरकारी यूरिया पकड़े गए थे, जिन्हें कालाबाजारी के लिए ले जाया जा रहा था। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि यह चोरी सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित गिरोह द्वारा की जा रही है। ZEE NEWS की टीम ने पहचान बदलकर हरियाणा के यमुनानगर (Yamunanagar) स्थित प्लाईवुड फैक्ट्रियों में खुफिया कैमरे (spy camera) के साथ पड़ताल की, जहां यूरिया की कालाबाजारी का पूरा खेल रिकॉर्ड हुआ।

कैमरे पर कुछ लोगों ने स्वीकार किया कि इन फैक्ट्रियों में ग्लू बनाने में यूरिया का उपयोग होता है, और यह सब अधिकारियों व फैक्ट्री मालिकों की मिलीभगत से चल रहा है। 'सेटिंग' (setting) होने के कारण किसी जांच या छापे का डर नहीं रहता, जो पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घोटाले में प्लाईवुड फैक्ट्रियों, ग्लू निर्माताओं और यूरिया आपूर्तिकर्ताओं के बीच बिचौलिये एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं, जो किसानों के हक की खाद को लूटने में शामिल हैं।

यह एक विशालकाय सिंडिकेट (syndicate) है, जिसमें लगभग 200-300 लोग शामिल हैं। ये लोग किसानों के नाम पर सब्सिडी वाला खाद खरीदते हैं, उसे ट्रकों में भरकर कंपनियों तक पहुंचाते हैं। रसायन और खाद पर बनी संसद की स्टैंडिंग कमेटी (Standing Committee on Chemicals and Fertilizers) के चेयरमैन कीर्ति आजाद (Kirti Azad) ने भी इस बात की पुष्टि की है कि एक संगठित सिंडिकेट किसानों के यूरिया को लूटकर कंपनियों तक पहुंचा रहा है। कई ऐसे बिल (bills) भी सामने आए हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में रेजिन (ग्लू) की खरीद दिखाई गई है, जिससे यह साफ होता है कि नामी प्लाईवुड कंपनियां भी इस अवैध खेल का हिस्सा हैं।

किसानों का हक मार रहीं प्लाईवुड फैक्ट्रियां: गहराता संकट और समाधान

यह सरकारी यूरिया घोटाला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा (food security) और किसान कल्याण नीतियों (farmer welfare policies) पर एक गंभीर हमला है। जब किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलता, तो उनकी फसल की पैदावार प्रभावित होती है। इससे न केवल उनकी आय घटती है, बल्कि देश में कृषि उत्पादन भी प्रभावित होता है। सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो अंततः जनता के पैसे का दुरुपयोग है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि वे सबसे कमजोर वर्ग, यानी किसानों के हक को भी नहीं बख्श रही हैं। इस तरह की अनियमितताएं न केवल कानूनी प्रणाली पर सवाल उठाती हैं, बल्कि सरकारी सब्सिडी (government subsidy) के प्रभावी कार्यान्वयन पर भी पुनर्विचार की आवश्यकता पर जोर देती हैं। दीर्घकालिक रूप से, यह किसानों के विश्वास को तोड़ता है और उन्हें खेती से विमुख कर सकता है, जिसका भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए गंभीर परिणाम हो सकता है।

ZEE NEWS द्वारा उजागर किया गया यह 'ऑपरेशन किसान' हमें एक कड़वी सच्चाई से रूबरू कराता है। यह जरूरी है कि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच हो और दोषी बिचौलियों, अधिकारियों और फैक्ट्रियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सरकार को सब्सिडी वाले यूरिया की वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों के लिए आवंटित खाद उन तक ही पहुंचे। यह समय है कि हम सब मिलकर किसानों के हक को सुरक्षित करें और ऐसे घोटालों पर लगाम लगाएं जो हमारे देश की रीढ़ की हड्डी, यानी कृषि क्षेत्र को कमजोर कर रहे हैं।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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