सोमवार मध्यरात्रि को रूस और यूक्रेन के बीच लागू तीन दिवसीय युद्धविराम (ceasefire) औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। इस अस्थायी शांति के खत्म होते ही दोनों देशों के बीच संघर्ष एक बार फिर भड़क उठा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, इस विराम के दौरान भी दोनों देशों की सेनाओं के बीच रुक-रुक कर लड़ाई जारी रही थी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर रूस-यूक्रेन युद्ध की जटिलता और इसके शांतिपूर्ण समाधान की राह में आने वाली चुनौतियों को उजागर किया है।
युद्धविराम की अवधि समाप्त होते ही सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात रूस ने यूक्रेनी शहरों पर 216 ड्रोन हमले किए। इन भीषण हमलों से राजधानी कीव (Kyiv) समेत कई अन्य स्थानों पर आग लग गई। इन हमलों में एक व्यक्ति की मौत की दुखद खबर है, जबकि छह अन्य घायल हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में नागरिक सुविधाओं (civilian facilities) और बच्चों के स्कूल (children's school) को भी निशाना बनाया गया, जो युद्ध के मानवीय पहलुओं पर गहरा प्रभाव डालता है।
सीजफायर खत्म: रूस ने नहीं माना युद्धविराम बढ़ाने का प्रस्ताव, अमेरिका कर रहा मध्यस्थता
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा (Andriy Sybiha) ने इस बात की पुष्टि की है कि उनके देश ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन रूस इस पर सहमत नहीं हुआ। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी इस युद्धविराम को बढ़ाए जाने की इच्छा व्यक्त की थी। गौरतलब है कि शुरुआती युद्धविराम के लिए रूस और यूक्रेन के बीच अमेरिका (USA) ने ही मध्यस्थता (mediation) की थी, जिससे दोनों देश अस्थायी शांति के लिए सहमत हुए थे। अमेरिका की इस भूमिका से वैश्विक स्तर पर शांति प्रयासों को बल मिला था, लेकिन रूस के ताजा रुख ने इन प्रयासों को झटका दिया है।
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इस बीच, रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय क्रेमलिन (Kremlin) ने यूक्रेन युद्ध के जल्द खत्म होने की संभावना जताई है। क्रेमलिन ने कहा है कि इस सिलसिले में त्रिपक्षीय प्रयासों (tripartite efforts) को गति दिए जाने की जरूरत है। इस मामले में रूस और यूक्रेन के बीच अमेरिका लगातार मध्यस्थता कर रहा है। कुछ दिन पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने भी युद्ध खत्म होने को लेकर ऐसी ही संभावना व्यक्त की थी। हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने रूस के इस रुख पर संदेह जताया है, जिससे शांति वार्ता की राह में अनिश्चितता बनी हुई है। ज़ेलेंस्की का मानना है कि रूस के बयानों और वास्तविक इरादों में अंतर हो सकता है।
आगे की राह और संभावित प्रभाव
युद्धविराम का समाप्त होना और रूस द्वारा ताबड़तोड़ ड्रोन हमले इस बात का स्पष्ट संकेत देते हैं कि संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है। यूक्रेन का युद्धविराम बढ़ाने का प्रस्ताव ठुकराए जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि रूस अपनी सैन्य कार्रवाइयों को जारी रखने पर अडिग है। अमेरिका की मध्यस्थता के बावजूद, दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी शांति प्रयासों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। नागरिक ठिकानों पर हमले युद्ध अपराधों (war crimes) की श्रेणी में आ सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय (international community) पर रूस पर दबाव बनाने के लिए नए सिरे से विचार करने का दबाव डाल सकते हैं।
इस संघर्ष का दीर्घकालिक प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था (global economy), ऊर्जा सुरक्षा (energy security) और भू-राजनीतिक संबंधों (geopolitical relations) पर पड़ेगा। विशेष रूप से भारत जैसे देश जो रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संबंध रखते हैं, उन्हें इस स्थिति से निपटने के लिए सावधानीपूर्वक कूटनीति (diplomacy) का सहारा लेना होगा। युद्ध की तीव्रता बढ़ने से मानवीय संकट (humanitarian crisis) और गहरा सकता है, जिससे लाखों लोगों का विस्थापन (displacement) और बुनियादी सुविधाओं का अभाव एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
कुल मिलाकर, रूस-यूक्रेन संघर्ष एक बेहद नाजुक मोड़ पर है। युद्धविराम की समाप्ति ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जबकि अमेरिका की मध्यस्थता और क्रेमलिन के बयान एक उम्मीद की किरण जगाते हैं। हालांकि, जब तक दोनों पक्ष वास्तविक शांति के लिए प्रतिबद्ध नहीं होते, तब तक इस संघर्ष का कोई स्थायी समाधान खोजना मुश्किल होगा। दुनिया की निगाहें अब अगले घटनाक्रमों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों पर टिकी हैं कि क्या वे इस युद्ध को समाप्त करने का लिए कोई प्रभावी रास्ता निकाल पाते हैं या नहीं।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.