ट्रेन के टॉयलेट में बर्तन धोने पर बवाल: IRCTC और FSSAI के बीच बयानबाजी, रेलवे ने लिया एक्शन
भारतीय रेलवे में यात्रा के दौरान मिलने वाले खाने की स्वच्छता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT)-एर्नाकुलम दुरंतो एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12223) के टॉयलेट में खाने के बर्तन धोते हुए देखा गया। इस चौंकाने वाली घटना ने यात्रियों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) और इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) के बीच बयानों की जंग छिड़ गई है। यह मामला न केवल खाद्य सुरक्षा (Food Safety) के मानकों पर सवाल उठाता है, बल्कि रेलवे में कैटरिंग सेवाओं की निगरानी प्रणाली पर भी ध्यान आकर्षित करता है।
ट्रेन के टॉयलेट में बर्तन धोने: FSSAI का नोटिस और IRCTC का खंडन
वायरल वीडियो सामने आने के बाद FSSAI ने इसे खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता नियमों का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। FSSAI ने दावा किया है कि उन्होंने 28 मई को IRCTC को एक वैधानिक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में FSSAI ने घटना को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रेगुलेशंस, 2011 (Food Safety and Standard Regulations, 2011) का सीधा उल्लंघन बताया है और IRCTC से तत्काल रिपोर्ट मांगी है। FSSAI ने चेतावनी दी है कि लापरवाही जारी रहने पर फूड सेफ्टी एक्ट, 2006 (Food Safety Act, 2006) के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, IRCTC ने FSSAI के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर जारी अपने बयान में IRCTC ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस मामले में FSSAI की तरफ से कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। रेलवे की कैटरिंग कंपनी ने यह भी बताया कि उसके सभी मोबाइल कैटरिंग यूनिट्स FSSAI लाइसेंस (FSSAI License) के तहत संचालित होते हैं, लेकिन उनका निरीक्षण और नियमन रेलवे के नामित अधिकारियों द्वारा किया जाता है, न कि सीधे FSSAI अधिकारियों द्वारा।
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आईआरसीटीसी ने आगे बताया कि 24 मई को हुई घटना के तुरंत बाद उन्होंने कार्रवाई की थी। सेवा प्रदाता (Service Provider) पर जुर्माना लगाया गया और संबंधित कर्मचारियों को ड्यूटी से हटा दिया गया। कंपनी ने यात्रियों की सुरक्षा और स्वच्छता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्त कदम उठाए जाते हैं।
खाद्य सुरक्षा पर उठते सवाल और आगे की राह
यह घटना भारतीय रेलवे में खाद्य सुरक्षा (Food Safety) और स्वच्छता (Hygiene) प्रबंधन की मौजूदा चुनौतियों को उजागर करती है। एक तरफ FSSAI, जो देश में खाद्य सुरक्षा मानकों को लागू करने वाली शीर्ष संस्था है, उल्लंघन पर कार्रवाई का दावा कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ IRCTC, जो रेलवे में कैटरिंग सेवाओं का प्रबंधन करती है, नोटिस मिलने से इनकार कर रही है, लेकिन तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिला रही है। इस तरह की बयानबाजी से जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और रेलवे की कैटरिंग सेवाओं पर यात्रियों का विश्वास कम हो सकता है।
इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि रेलवे में खाद्य सेवाओं के निरीक्षण और नियमन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। FSSAI और IRCTC के बीच समन्वय (Coordination) और संचार (Communication) में सुधार, साथ ही नियमित और आकस्मिक निरीक्षण (Surprise Inspections) को मजबूत करना आवश्यक है। यात्रियों की सेहत से जुड़ा यह मामला सिर्फ एक ट्रेन की घटना नहीं है, बल्कि यह देश भर में रेलवे कैटरिंग सेवाओं के लिए एक चेतावनी है कि स्वच्छता मानकों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। दीर्घकालिक प्रभाव के रूप में, रेलवे को अपनी कैटरिंग नीति (Catering Policy) की समीक्षा करनी पड़ सकती है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके और यात्रियों को स्वच्छ व सुरक्षित भोजन मिल सके।
यह देखना दिलचस्प होगा कि FSSAI और IRCTC इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या रेलवे अपनी कैटरिंग सेवाओं में व्यापक सुधार के लिए कोई नई पहल करता है। यात्रियों की उम्मीदें और स्वास्थ्य सुरक्षा रेलवे के लिए सर्वोपरि होनी चाहिए।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.