मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल-एक्टर ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गहराता जा रहा है। इस संवेदनशील ट्विशा शर्मा केस में एक नया मोड़ तब आया जब उनके पति समर्थ सिंह ने कोर्ट में सरेंडर किया। NDTV के कैमरे में समर्थ की यह तस्वीर कैद हुई, जिसने इस हाई-प्रोफाइल मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्विशा का परिवार अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहा है और जांच में कथित खामियों को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।
ट्विशा की भाभी डॉ. राशि ओबेरॉय शर्मा ने राज्य सरकार द्वारा सीबीआई (CBI) जांच की सिफारिश किए जाने पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक न्यूज एजेंसी से कहा कि "देर आए दुरुस्त आए, लेकिन इसमें काफी देर हो गई है।" उनका आरोप है कि इस मामले में कई गंभीर खामियां थीं, जिसकी वजह से उन्हें सीबीआई जांच की मांग करनी पड़ी। डॉ. राशि के अनुसार, एफआईआर (FIR) दर्ज होने में तीन दिन लग गए और पुलिस ने परिवार पर दबाव डाला कि वे पोस्टमार्टम (Post-mortem) रिपोर्ट आने से पहले ही ट्विशा का शव लेकर अंतिम संस्कार कर दें, जो अपने आप में बेहद संदिग्ध है।
ट्विशा शर्मा केस: जांच में लापरवाही और परिवार का संघर्ष
परिवार के मुताबिक, पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बुनियादी जानकारियां भी गलत थीं और सब कुछ बहुत अस्पष्ट तरीके से पेश किया गया। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि कथित तौर पर गला कसने में इस्तेमाल हुई चीज को फोरेंसिक जांच के लिए जमा ही नहीं किया गया, जिसे डॉ. राशि ने मध्य प्रदेश पुलिस की एक बड़ी लापरवाही बताया है। परिवार एक सही और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जिसके चलते ट्विशा का शव पिछले 9 दिनों से मुर्दाघर में पड़ा है और परिवार अभी तक उसका अंतिम संस्कार नहीं कर पाया है।
इस बीच, ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने बताया कि दूसरे पोस्टमार्टम के लिए उनकी अर्जी मान ली गई है। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Delhi) से डॉक्टरों की एक टीम AIIMS भोपाल आने वाली है। मेजर हर्षित ने समर्थ सिंह के सरेंडर को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर समर्थ को कुछ भी छिपाना नहीं था, तो उसे पहले ही सरेंडर कर देना चाहिए था। मेजर हर्षित का मानना है कि समर्थ ने यह कदम पूरे देश के समर्थन और लोगों के दबाव में आकर उठाया है, क्योंकि उसे एहसास हो गया है कि अब छिपने का कोई मतलब नहीं है।
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (High Court) ने शुक्रवार को ट्विशा शर्मा के दूसरे पोस्टमार्टम की इजाजत दे दी। ट्विशा नोएडा की रहने वाली थीं और उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि दहेज के लिए उन पर जुल्म किया गया, जिसके बाद पिछले हफ्ते उनकी मौत हो गई। ट्विशा के पिता नव निधि शर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। उनके वकील अंकुर पांडे ने बताया कि हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह AIIMS दिल्ली के डॉक्टरों की टीम को भोपाल लाने का इंतजाम करे।
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परिवार ने हाई कोर्ट का दरवाजा तब खटखटाया, जब एक निचली अदालत ने दो दिन पहले उनकी दूसरी पोस्टमार्टम की अर्जी को खारिज कर दिया था। निचली अदालत ने कहा था कि दोबारा पोस्टमार्टम का आदेश देने के लिए अदालत की अंतरात्मा का संतुष्ट होना जरूरी है और प्रक्रिया में छोटी-मोटी कमियों के आधार पर अदालत दूसरे पोस्टमार्टम का आदेश नहीं देगी। निचली अदालत ने यह भी तर्क दिया था कि ट्विशा का शव इस समय AIIMS भोपाल के मुर्दाघर में -4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा हुआ है, लेकिन लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इसे -80 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होगी, जो शहर में कहीं उपलब्ध नहीं है।
ट्विशा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं। परिवार ने उनके ससुराल वालों पर बेटी को मौत के मुंह में धकेलने का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल वालों का दावा है कि ट्विशा को नशे की लत थी। पुलिस ने इस मामले में 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धारा 80(2), 85 और 3(5) के तहत, साथ ही 'दहेज निषेध अधिनियम' (Dowry Prohibition Act) की संबंधित धाराओं के तहत एक एफआईआर दर्ज की है। इस एफआईआर में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास (जो कि पूर्व जज हैं) गिरिबाला सिंह को नामजद किया गया है। पुलिस ने समर्थ सिंह की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वाले को 30 हजार रुपये का नकद इनाम देने की भी घोषणा की है और उसके पासपोर्ट (Passport) को रद्द करवाने के लिए अदालत में अर्जी दी है।
यह पूरा घटनाक्रम भारतीय न्याय प्रणाली (Indian Justice System) में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करता है। हाई कोर्ट का दूसरा पोस्टमार्टम का आदेश और सीबीआई जांच की सिफारिश, शुरुआती जांच में कथित खामियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दिखाता है कि जब पीड़ित परिवार न्याय के लिए दृढ़ता से खड़ा होता है और सार्वजनिक समर्थन मिलता है, तो न्यायिक प्रक्रिया को सही दिशा में मोड़ा जा सकता है। अब सभी की निगाहें AIIMS दिल्ली की टीम द्वारा किए जाने वाले दूसरे पोस्टमार्टम और सीबीआई जांच पर टिकी हैं, जिससे ट्विशा की मौत के पीछे की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। यह मामला न केवल ट्विशा के परिवार के लिए, बल्कि उन सभी परिवारों के लिए एक मिसाल बनेगा, जो ऐसी परिस्थितियों में न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.