भारत-नेपाल द्विपक्षीय संबंध: पड़ोसी से साझेदार तक - रिश्तों को गहराने का संकल्प

भारत और नेपाल के विदेश मंत्रियों की बैठक, द्विपक्षीय संबंधों को गहराने पर चर्चा, डिजिटल सहयोग और विकास परियोजनाएं

पड़ोसी से साझेदार तक: भारत और नेपाल ने द्विपक्षीय रिश्तों को व्यापक बनाने का लिया संकल्प

नई दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुई एक महत्वपूर्ण वार्ता ने भारत और नेपाल के बीच मजबूत होते संबंधों को एक नई दिशा दी है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल और उनके भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर के बीच हुई इस बैठक के बाद जारी एक प्रेस विज्ञप्ति (Press Release) में बताया गया कि दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहरा तथा व्यापक बनाने पर सहमत हुए हैं। यह सहमति विकास साझेदारी (Development Partnership), बेहतर कनेक्टिविटी (Connectivity) और आपसी फायदे (Mutual Benefit) के प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी के माध्यम से रिश्तों को आगे बढ़ाने के संकल्प को दर्शाती है।

यह बैठक न केवल दोनों देशों के बीच मौजूदा सहयोग की समीक्षा का अवसर थी, बल्कि भविष्य के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार करने का भी मंच बनी। दोनों मंत्रियों ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिनमें जून 2023 में हस्ताक्षरित एनसीएचएल (NCHL) और एनपीसीआई (NPCI) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत पी2पी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट ट्रांजेक्शन (P2P Cross-Border Payment Transaction) को चालू करना शामिल है। यह कदम डिजिटल लेनदेन को सुगम बनाएगा और दोनों देशों के नागरिकों के लिए वित्तीय सेवाओं को आसान बनाएगा।

भारत-नेपाल द्विपक्षीय संबंध: विकास और डिजिटल सहयोग के नए आयाम

विकास के मोर्चे पर, भारत की डेवलपमेंट मदद (Development Aid) से नेपाल में निर्मित 72 स्वास्थ्य क्षेत्र और 12 सांस्कृतिक क्षेत्र के भूकंप के बाद के रिकंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स (Post-Earthquake Reconstruction Projects) को नेपाल को सौंपने की भी घोषणा की गई। यह भारत की 'पड़ोसी पहले' (Neighbourhood First) नीति और नेपाल के पुनर्निर्माण प्रयासों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है।

डिजिटल क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देते हुए, काठमांडू यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Centre for Digital Public Infrastructure and Artificial Intelligence) और डिजिटल इंडिया भाषानी डिवीजन (Digital India Bhashini Division) के बीच एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ। इसका उद्देश्य वॉइस फर्स्ट लैंग्वेज ट्रांसलेशन प्लेटफॉर्म (Voice First Language Translation Platform) के लिए नेशनल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (National Digital Infrastructure) को संयुक्त रूप से विकसित करना है, जो दोनों देशों के बीच भाषाई बाधाओं को कम करने में सहायक होगा।

मंत्रियों ने अपनी बातचीत के दौरान नेपाल-भारत के आपसी संबंधों के हर पहलू पर व्यापक और सार्थक चर्चा की। इसमें ट्रेड और इकोनॉमिक कोऑपरेशन (Trade and Economic Cooperation), क्रॉस-बॉर्डर कनेक्टिविटी (Cross-border Connectivity), एनर्जी पार्टनरशिप (Energy Partnership), वॉटर रिसोर्स मैनेजमेंट (Water Resource Management) और स्पोर्ट्स (Sports) के ज़रिए लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने (Promoting People-to-People Connections) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल थे। दोनों पक्षों ने अपनी पक्की साझेदारी (Robust Partnership) को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया, साथ ही चल रहे द्विपक्षीय प्रोजेक्ट्स (Bilateral Projects) और सहयोग पहलों (Cooperation Initiatives) की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने इन परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन के तरीकों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जो जमीनी स्तर पर सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित करेगा।

इसके अतिरिक्त, दोनों मंत्रियों ने आपसी चिंता के क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों (Regional and International Issues) पर भी चर्चा की, जिसमें मल्टीलेटरल फोरम (Multilateral Forum) में सहयोग भी शामिल है। यह दर्शाता है कि दोनों देश केवल द्विपक्षीय दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक-दूसरे का समर्थन करने को तैयार हैं। अपनी नई दिल्ली यात्रा के दौरान, नेपाल के विदेश मंत्री खनल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Advisor - NSA) अजीत डोभाल से भी मुलाकात की, जहां उन्होंने नेपाल-भारत के आपसी संबंधों को और मजबूत करने से जुड़े कई मामलों पर गहन चर्चा की। विदेश मंत्री खनल रविवार को काठमांडू लौट गए, लेकिन उनकी यात्रा ने दोनों देशों के भविष्य के सहयोग के लिए एक मजबूत नींव रखी है।

यह वार्ता स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि भारत और नेपाल अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को आधुनिक विकास और रणनीतिक साझेदारी के साथ जोड़कर एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। डिजिटल सहयोग, ऊर्जा साझेदारी और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण को दर्शाता है। परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन पर दिया गया बल यह सुनिश्चित करेगा कि इन समझौतों का लाभ जल्द से जल्द दोनों देशों के नागरिकों तक पहुंचे। यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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