हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मंच शांग्री-ला डायलॉग (Shangri-La Dialogue) में पाकिस्तानी सेना के नवनिर्वाचित रॉकेट फोर्स (Rocket Force) चीफ लेफ्टिनेंट जनरल नौमान जकारिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। इस वीडियो में जनरल जकारिया अपने देश को 'डिटर वॉर' (Deter War) यानी युद्ध रोकने वाला राष्ट्र बताकर शांति का मसीहा साबित करने की कोशिश करते दिखे, लेकिन उनकी यह पाकिस्तानी जनरल की खोखली बयानबाजी जल्द ही सवालों के घेरे में आ गई। भारत के सैन्य विश्लेषकों और डिजिटल समाचार माध्यमों ने इस बयानबाजी की धज्जियां उड़ाते हुए पाकिस्तान के वास्तविक इरादों और उसके इतिहास को उजागर किया है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी छवि सुधारने का प्रयास करता है, जबकि ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। यह खबर आम नागरिकों और भू-राजनीतिक विश्लेषकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के दावों की सच्चाई पर प्रकाश डालती है।
पाकिस्तान का 'शांति' का पाखंड और भारत की मुंहतोड़ प्रतिक्रिया
जनरल जकारिया का यह दावा कि पाकिस्तानी सेना का प्राथमिक मिशन युद्ध रोकना है, इतिहास के पन्नों में दर्ज तथ्यों के विपरीत है। 1947 में कबाइलियों के भेष में कश्मीर पर हमला हो, 1965 का 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' (Operation Gibraltar) हो, 1971 की हिमाकत हो या फिर 1999 का कारगिल युद्ध (Kargil War) - इन सभी संघर्षों की शुरुआत पाकिस्तान ने ही की थी। इसके अलावा, पाकिस्तान भारत में आतंकवाद को प्रायोजित करके 'प्रॉक्सी वॉर' (Proxy War) यानी छद्म युद्ध चलाता रहा है, जिससे क्षेत्रीय शांति लगातार भंग होती रही है।
भारत ने पाकिस्तान की इन हरकतों का हमेशा कड़ा जवाब दिया है। 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) इसका एक ज्वलंत उदाहरण है। इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में भारतीय जांबाज़ों ने पाकिस्तानी सेना को करारी शिकस्त दी थी। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के पंजाब, सिंध और PoJK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) में घुसकर उसके 9 आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूद कर दिया था। भारतीय हवाई सुरक्षा को भेदते हुए न सिर्फ सैन्य ठिकानों को तबाह किया गया, बल्कि कई लड़ाकू विमानों को भी मार गिराया गया। इस भीषण मार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान को अपने 135 से अधिक सैनिकों को मरणोपरांत वीरता पदक देने पड़े और महज 4 दिनों के भीतर उसने घुटने टेकते हुए भारत से युद्धविराम की भीख मांगी। ऐसी शर्मनाक हार के बाद भी खुद को विजेता बताना पाकिस्तान के जनरलों की हकीकत से मुंह मोड़ने वाली मानसिकता को दर्शाता है।
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परमाणु ब्लैकमेलिंग और भारत की दृढ़ता
जनरल जकारिया ने अपने बयान में भारत-पाकिस्तान के बीच रिएक्शन टाइम (reaction time) के मिनटों में नहीं बल्कि सेकंड्स में होने की बात कही, जिसे दुनिया को डराने और न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग (nuclear blackmailing) करने की एक और नाकाम कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सच तो यह है कि पाकिस्तान को इस बात का सबसे बड़ा डर है कि अगर उसने कोई भी दुस्साहस किया तो भारत की 'नो फर्स्ट यूज' (No First Use) पॉलिसी के बाद का जो 'रिएक्शन' होगा, वह पाकिस्तान को नक्शे से मिटाने के लिए काफी होगा। भारत की मिसाइल तकनीक (जैसे ब्रह्मोस (BrahMos) और अग्नि सीरीज (Agni Series)) के सामने उनका डिफेंस सिस्टम (defense system) कमजोर नजर आता है।
साल 2001 में भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन पराक्रम' (Operation Parakram) के तहत जो आक्रामक सैन्य मोबिलाइजेशन (military mobilization) किया था, उसकी गूंज आज भी पाकिस्तानी जनरलों के बयानों में सुनाई देती है। भारत ने अपनी 'कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन' (Cold Start Doctrine) के जरिए पाकिस्तान के इस भ्रम को तोड़ दिया था कि वह परमाणु हमले की धमकी देकर भारत को चुप करा देगा। भारत ने साफ कर दिया कि वह पाकिस्तान की न्यूक्लियर थ्रेसहोल्ड (nuclear threshold) को पार किए बिना भी उसकी सीमा के भीतर घुसकर उसके आतंकी कैंपों और सैन्य ठिकानों को तबाह कर सकता है। बालाकोट एयरस्ट्राइक (Balakot Airstrike) जैसे 'नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर' (Non-Contact Warfare) के उदाहरण बताते हैं कि भारत आधुनिक तकनीक, ड्रोन्स (drones), साइबर वॉरफेयर (cyber warfare) और सटीक मिसाइल हमलों से लैस होकर दुश्मन को दूर बैठकर ही पंगु बना सकता है।
जनरल जकारिया की बयानबाजी पाकिस्तान की अंदरूनी घबराहट और आर्थिक बदहाली से ध्यान भटकाने का एक पैंतरा मात्र है। जिस देश की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर (ventilator) पर हो और अवाम आटे-बिजली के लिए तरस रही हो, उसकी सेना रॉकेट फोर्स (Rocket Force) का ढिंढोरा पीट रही है। यह महज एक बयान नहीं, बल्कि भारत की मार से सहमे एक लाचार पड़ोसी की बौखलाहट है। भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेगा, और किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.