भारतीय नाविकों की मौत: राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा, संप्रभुता पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने भारतीय नाविकों की मौत पर केंद्र सरकार की आलोचना की

नई दिल्ली: अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अमेरिकी बयानों को लेकर सरकार की चुप्पी और कथित समझौतावादी रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमारी केंद्र सरकार एक 'आज्ञकारी सेवक' की तरह व्यवहार कर रही है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि देश का सम्मान दांव पर है और एक संप्रभु राष्ट्र ऐसी अपमानजनक भाषा को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह विवाद अमेरिका द्वारा भारत को यह स्पष्ट संदेश दिए जाने के एक दिन बाद सामने आया है कि होर्मुज (Hormuz) में उसकी नाकेबंदी का कोई भी उल्लंघन और ईरानी तेल का अवैध परिवहन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीधे तौर पर अमेरिकी बयानों का हवाला देते हुए केंद्र पर हमला बोला। उन्होंने कहा, "अमेरिका के शब्द पढ़ें। उसने कहा है कि अमेरिकी सैन्य आदेशों का तुरंत पालन करें। कोई उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" उन्होंने इस भाषा को एक संप्रभु राष्ट्र के लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया। राहुल ने आरोप लगाया कि "समझौतावादी केंद्र सरकार देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगी, क्योंकि वह उन लोगों की एहसानमंद है, जो देश का अपमान करते हैं।" उनकी इस टिप्पणी ने न केवल भारतीय नाविकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि भारत की विदेश नीति (Foreign Policy) और वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारतीय नाविकों की मौत पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा: संप्रभुता पर सवाल

इस पूरे मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा (Global Reputation) और संप्रभुता (Sovereignty) को कमजोर किया है। खरगे ने आरोप लगाया कि भारत के राष्ट्रीय हितों (National Interests) से रोजाना समझौता किया जा रहा है, जो चिंताजनक है। राहुल गांधी ने अपनी 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में ओमान के डुक्म बंदरगाह (Duqm Port) पर खड़े एक जहाज पर मेडिकल दिक्कतों के कारण एक भारतीय नागरिक की मौत का भी जिक्र किया, जिससे यह मुद्दा और गहरा गया है। इन घटनाओं ने विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सरकार की प्रतिक्रिया पर बहस छेड़ दी है।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (US Trade Representative) जेमिसन ग्रीर (Jamison Greer) की आने वाली यात्रा को टालने का भी आग्रह किया है। पार्टी ने कहा कि कोई भी स्वाभिमानी देश धौंस जमाने वालों के खिलाफ अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सिर्फ फोन कॉल से कहीं ज्यादा कदम उठाएगा। यह मांग ऐसे समय में आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से मिलने वाले हैं। विपक्ष ने पूछा है कि क्या प्रधानमंत्री ओमान तट के पास एक जहाज पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भारत की कड़ी निंदा जाहिर करेंगे? साथ ही, क्या वह 12 जून को विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) के साथ बातचीत में यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट (US Secretary of State) मार्को रुबियो (Marco Rubio) द्वारा इस्तेमाल की गई "धमकी भरी और बिल्कुल अस्वीकार्य भाषा" का मुद्दा भी उठाएंगे?

यह घटनाक्रम भारत की कूटनीति (Diplomacy) और अंतरराष्ट्रीय संबंधों (International Relations) के लिए महत्वपूर्ण है। एक ओर, यह भारत की संप्रभुता और उसके नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता की परीक्षा है। दूसरी ओर, यह अमेरिका जैसे प्रमुख सहयोगी के साथ संबंधों को संतुलित करने की चुनौती को भी दर्शाता है। विपक्ष के हमलों से केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह इस मामले पर स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाए। यह देखना होगा कि आगामी दिनों में सरकार इस गंभीर मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या प्रधानमंत्री मोदी अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान इन चिंताओं को प्रभावी ढंग से उठा पाते हैं। इस घटना का दीर्घकालिक प्रभाव भारत की विदेश नीति और वैश्विक मंच पर उसकी स्वतंत्र पहचान पर पड़ सकता है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.
अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने सरकार के 'समझौतावादी' रुख पर सवाल उठाते हुए भारत की संप्रभुता पर चिंता जताई।

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