भोपाल की एक अदालत में चल रहे ट्विशा शर्मा मौत मामला की सुनवाई के दौरान आज एक अप्रत्याशित और नाटकीय मोड़ आया। कोर्ट रूम में गहमागहमी इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस हाथापाई की नौबत तक पहुंच गई। इस संवेदनशील मामले में, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया गया है। उन्हें 16 जून तक भोपाल सेंट्रल जेल (Bhopal Central Jail) में रखा जाएगा, जहाँ सुरक्षा कारणों और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें अन्य कैदियों से अलग बैरक में रखा जाएगा।
ट्विशा शर्मा के परिवार ने पूर्व जज और उनके बेटे पर गंभीर दहेज उत्पीड़न (Dowry Harassment) के आरोप लगाए हैं। पुलिस रिमांड (Police Remand) की अवधि समाप्त होने के बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आज दोनों आरोपियों को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत में पेश किया। सीबीआई ने उनकी रिमांड आगे बढ़ाने की मांग नहीं की, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया। यह घटनाक्रम पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, खासकर न्यायपालिका (Judiciary) से जुड़े लोगों के लिए।
ट्विशा शर्मा मौत मामला: कोर्ट रूम में पूर्व जज ने खुद लड़ा अपना केस
अदालत में मौजूद सूत्रों और NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, 63 वर्षीय पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने कोर्ट रूम में खुद खड़े होकर अपने केस की पैरवी की। उनका तेवर काफी आक्रामक था और वह बार-बार अपनी आवाज ऊंची कर रही थीं। उन्होंने विपक्ष के वकील अनुराग श्रीवास्तव पर बेहद गंभीर आरोप लगाए, जिसमें यह भी शामिल था कि अनुराग श्रीवास्तव ने जबलपुर हाई कोर्ट (Jabalpur High Court) परिसर के अंदर उनके बेटे समर्थ के साथ मारपीट की थी। इस आरोप पर वकील अनुराग श्रीवास्तव ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि, "अगर ऐसी कोई घटना सच में हुई है, तो कोर्ट के CCTV फुटेज की जांच होनी चाहिए। पूरे कोर्ट परिसर में कैमरे लगे हैं, सच सामने आ जाएगा।" यह आरोप-प्रत्यारोप बताता है कि मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल पक्षों के बीच तनाव कितना गहरा है।
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बहस के दौरान, वकील अनुराग श्रीवास्तव ने एक और बड़ा और विस्फोटक सवाल उठाया। उन्होंने कोर्ट के सामने पूछा कि समर्थ सिंह, जो पुलिस से फरार था और जिस पर 30,000 रुपये का इनाम (Reward) घोषित था, उसे जबलपुर के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (Principal District & Sessions Judge) के चैंबर (केबिन) के अंदर छिपने की जगह कैसे मिली? उन्होंने कहा, "एक इनामी भगोड़े को वहाँ शरण कैसे मिल सकती है? इस बात की अलग से स्वतंत्र जांच (Independent Investigation) होनी चाहिए।" जवाब में, समर्थ सिंह के वकीलों ने दलील दी कि अगर किसी नागरिक की जान को खतरा हो, तो उसे अपनी सुरक्षा के लिए शरण लेने का पूरा अधिकार है। कोर्ट रूम का माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया था कि दोनों पक्षों के बीच बात शाब्दिक झड़प से बढ़कर शारीरिक हाथापाई तक पहुंचने वाली थी, जिसे कोर्ट अधिकारियों ने किसी तरह संभाला।
'मीडिया ट्रायल' और सीबीआई जांच पर उठे सवाल
पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने इस मामले को लेकर चल रहे "मीडिया ट्रायल" (Media Trial) पर भी अपना गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने कोर्ट से कहा, "हम जहाँ भी जाते हैं, मीडिया हमारे पीछे पड़ जाता है। इसे तुरंत रोका जाना चाहिए, हमारी जान को खतरा है।" इसके अलावा, उन्होंने सीबीआई द्वारा घटना स्थल के री-कंस्ट्रक्शन (Scene Reconstruction) के तरीके पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि जांच अधिकारी उन्हें सीधे उनके घर ले जाने के बजाय कुछ दूर पहले ही गाड़ी से क्यों उतार रहे थे? मौत के बाद सामने आए विवादित CCTV फुटेज (Controversial CCTV Footage) पर सफाई देते हुए पूर्व जज ने कहा कि उनका इस वीडियो से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें नहीं पता कि इस वीडियो को किसने लीक किया है। इस पूरे हंगामे के बीच, सीबीआई ने शांति बनाए रखी और कोर्ट को बताया कि वे फिलहाल सिर्फ न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) की मांग कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर भविष्य में दोबारा पुलिस रिमांड मांग सकते हैं।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया कितनी जटिल और संवेदनशील है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआई इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और अदालत में कौन से नए तथ्य सामने आते हैं। इस मामले का परिणाम न्यायपालिका और समाज दोनों के लिए महत्वपूर्ण संदेश देगा, खासकर जब न्याय के तराजू पर एक पूर्व जज और उनके परिवार के सदस्य हों।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.