कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लाभ: समावेशी पहुँच और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करना समय की मांग – UNDRR प्रमुख कमल किशोर

आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समावेशी लाभों पर UNDRR प्रमुख कमल किशोर

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लाभ: वैश्विक पहुँच और समावेशिता है समय की मांग, UNDRR प्रमुख कमल किशोर

संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) के प्रमुख और यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि, कमल किशोर ने हाल ही में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समावेशी विकास पर ज़ोर दिया है। उनका कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लाभ सभी तक समान रूप से पहुँचने चाहिए, विशेषकर वैश्विक दक्षिण के देशों तक, ताकि कोई भी इस तकनीकी क्रांति में पीछे न छूटे। नई दिल्ली में आयोजित 'AI Impact Summit 2026' के दौरान यूएन न्यूज़ से विशेष बातचीत में कमल किशोर ने AI की क्षमता और इसके नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

आपदा प्रबंधन में AI की क्रांतिकारी भूमिका

कमल किशोर के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आपदा प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। AI जोखिम की पहले पहचान करने, प्रभावित क्षेत्रों का सटीक आकलन करने और समय रहते राहत पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह आपदाओं को त्रासदी बनने से रोकने में सहायक सिद्ध हो सकती है। उदाहरण के लिए, जंगल की आग के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने या लू के दौरान सर्वाधिक प्रभावित समुदायों की पहचान करने में AI बेहद प्रभावी है। पटना के पास गंगा नदी क्षेत्र में विकसित बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली, जो AI का उपयोग करती है, पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में अधिक तेज़ और सटीक साबित हुई है।

भारत ने 2004 की सुनामी के बाद अपनी आपदा तैयारियों को वैज्ञानिक प्रगति और पूर्व चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से काफी मजबूत किया है, और अब AI इसमें एक और महत्वपूर्ण आयाम जोड़ सकता है। AI के माध्यम से शहरों के विस्तार, जोखिम वाले क्षेत्रों में निर्माण और इमारतों की सुरक्षा का विश्लेषण भी संभव हो सकता है, जिससे दीर्घकालिक जोखिम न्यूनीकरण में मदद मिलेगी।

समावेशी विकास और वैश्विक दक्षिण की भूमिका

कमल किशोर ने इस बात पर जोर दिया कि AI प्रभाव सम्मेलन का भारत और वैश्विक दक्षिण में पहली बार आयोजित होना एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अक्सर विकासशील देश AI जैसी तकनीकी दौड़ में पीछे रह जाते हैं, क्योंकि उनके पास पर्याप्त डेटा और डिजिटल कनेक्टिविटी का अभाव होता है, और अधिकांश शोध विकसित देशों के संदर्भ में होता है। ऐसे में भारत की भूमिका अहम है, जो विभिन्न देशों को साथ लाकर यह सुनिश्चित कर सकता है कि AI के लाभ कुछ लोगों या देशों तक सीमित न रहें, बल्कि सभी तक समान रूप से पहुँचें। इससे विकासशील देशों की आवाज़ वैश्विक स्तर पर सुनी जा सकेगी।

नैतिक उपयोग, निजता और मानवीय निगरानी

हालांकि AI की क्षमता अपार है, कमल किशोर ने आगाह किया कि इस पर पूर्ण निर्भरता उचित नहीं है। आपदा प्रबंधन में AI का उपयोग नैतिक तरीके से होना चाहिए, जिसमें निजता की सुरक्षा और मानवीय निगरानी आवश्यक है। कोई भी प्रणाली पूरी तरह से तकनीक पर निर्भर नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे हमेशा मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और मानवीय हस्तक्षेप के साथ जोड़ा जाना चाहिए। बड़े पैमाने पर AI को लागू करने के लिए स्पष्ट नीतियों और दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता है, ताकि इसे योजनाओं और कार्यप्रणाली में सही ढंग से शामिल किया जा सके। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में हुई प्रगति यह दर्शाती है कि समावेशी प्रणालियाँ बड़े पैमाने पर लागू की जा सकती हैं।

संयुक्त राष्ट्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि AI के विकास में कोई भी पीछे न छूटे और इसके दुरुपयोग, जैसे कि गलत सूचना के प्रसार, जैसे जोखिमों से निपटने के लिए रणनीतियाँ विकसित की जाएं। AI और जलवायु परिवर्तन का संबंध एक जटिल मुद्दा है। एक ओर AI ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और परिवहन प्रणालियों को अधिक कुशल बनाकर जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद कर सकता है, वहीं दूसरी ओर AI के डेटा केंद्र और प्रसंस्करण प्रणालियाँ स्वयं बहुत अधिक ऊर्जा और पानी की खपत करती हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि AI जलवायु संकट को और न बढ़ाए।

कमल किशोर की अपेक्षा है कि आपदा प्रबंधन के लिए विकसित AI अनुप्रयोग सभी के लिए सुलभ हों और निवेश इस तरह हो कि लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे, विशेषकर मजबूत जमीनी डिजिटल ढांचे के माध्यम से।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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