पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत का बड़ा कदम: इंडक्शन चूल्हे की सप्लाई चेन मजबूत करने पर जोर

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत में इंडक्शन चूल्हा सप्लाई चेन विकसित करने पर जोर

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल और इसके परिणामस्वरूप वैश्विक ईंधन संकट ने भारत सरकार को ऊर्जा सुरक्षा (energy security) के प्रति अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है। इसी क्रम में, देश में इंडक्शन चूल्हा (induction cooktop) और इससे संबंधित बर्तनों की पूरी सप्लाई चेन (supply chain) को विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं और भारत में एलपीजी (LPG) की आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका है। यह कदम न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन वाले देश के आम नागरिकों के लिए खाना पकाने के एक विश्वसनीय और वैकल्पिक स्रोत की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है।

पश्चिम एशिया संकट: ऊर्जा सुरक्षा और इंडक्शन चूल्हे की बढ़ती अहमियत

भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, और रसोई गैस (cooking gas) के रूप में एलपीजी का इस्तेमाल देश के अधिकांश घरों में होता है। देश में लगभग 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं, जो इस ईंधन पर हमारी व्यापक निर्भरता को दर्शाता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल और गैस बाजारों को अस्थिर कर दिया है, जिससे एलपीजी की कीमतों और आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है। इस स्थिति से निपटने और भविष्य में ऐसी किसी भी चुनौती के लिए तैयार रहने हेतु, सरकार अब इलेक्ट्रिक कुकिंग (electric cooking) समाधानों, विशेष रूप से इंडक्शन चूल्हा (induction cooktop) को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

इस महत्वपूर्ण एजेंडे पर चर्चा करने के लिए, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव, बिजली मंत्रालय (Power Ministry) के सचिव, विदेश व्यापार महानिदेशक (Directorate General of Foreign Trade - DGFT) और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में इंडक्शन चूल्हा (induction cooktop) और इससे जुड़े उपकरणों के निर्माण को गति देना और पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना था।

इंडक्शन सप्लाई चेन को मजबूत करने पर सरकार का जोर

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि इंडक्शन उत्पादों के निर्माण से लेकर उनकी बिक्री और रखरखाव तक, पूरी सप्लाई चेन को सुदृढ़ किया जाए। यह कोई नया विचार नहीं है; तीन साल पहले, बिजली मंत्रालय के अधीन कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ईईएसएल (Energy Efficiency Services Limited - EESL) ने 'गो-इलेक्ट्रिक' (Go-Electric) योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का लक्ष्य लोगों को सस्ते दामों पर इंडक्शन चूल्हा और उससे संबंधित बर्तन उपलब्ध कराना था।

अब, पश्चिमी एशिया संकट के मद्देनजर, ईईएसएल एक बार फिर इस दिशा में सक्रिय हो गई है। जानकारी के अनुसार, ईईएसएल जल्द ही पांच लाख इंडक्शन चूल्हों की खरीद करने की योजना बना रही है। ईईएसएल का यह मॉडल पहले भी सफल रहा है, जब उसने बड़े पैमाने पर एलईडी बल्ब (LED bulb) और सीलिंग फैन (ceiling fan) जैसे इलेक्ट्रिक आइटम (electric items) की खरीदारी कर उन्हें कम दामों पर उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया था। वर्तमान में, बाजार में इंडक्शन चूल्हे की कीमत लगभग 2000 रुपये से शुरू होती है।

ईईएसएल की भूमिका और सस्ती उपलब्धता

ईईएसएल की रणनीति थोक खरीद (bulk procurement) के माध्यम से कीमतों को कम करना है, जिससे आम उपभोक्ता के लिए ये उत्पाद अधिक किफायती बन सकें। यह दृष्टिकोण ऊर्जा-कुशल उपकरणों को बढ़ावा देने और बिजली की खपत को कम करने के सरकार के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है। हालांकि, एलपीजी की संभावित कमी और इंडक्शन चूल्हे की बढ़ती मांग के कारण हाल के दिनों में इसकी कीमतों में भी इजाफा देखा गया है।

चुनौतियाँ और आगे की राह: बिजली की लागत और आपूर्ति

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इंडक्शन चूल्हे की कीमतों को कम करने से ही इसके प्रचलन को बढ़ावा नहीं मिलेगा। इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए दो प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना होगा: बिजली की कीमत और उसकी निर्बाध उपलब्धता। भारत में, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, बिजली की आपूर्ति अभी भी एक बड़ी चुनौती है। इसके अतिरिक्त, बिजली की ऊंची दरें कई परिवारों के लिए इंडक्शन चूल्हे के उपयोग को महंगा बना सकती हैं, भले ही उपकरण सस्ता क्यों न हो।

इसलिए, सरकार को न केवल इंडक्शन उपकरणों की सप्लाई चेन पर काम करना होगा, बल्कि बिजली उत्पादन, वितरण और टैरिफ (tariff) संरचना में भी सुधार करना होगा। नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) स्रोतों को बढ़ावा देना और बिजली ग्रिड (power grid) को मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। इससे उपभोक्ता को सस्ती और विश्वसनीय बिजली मिलेगी, जो इंडक्शन चूल्हे को एलपीजी का एक व्यवहार्य विकल्प बनाने में मदद करेगी।

निष्कर्षतः, पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न हुई स्थिति ने भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति पर गहन विचार करने का अवसर दिया है। इंडक्शन चूल्हे की सप्लाई चेन को मजबूत करने पर सरकार का जोर ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ईईएसएल जैसी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी और बिजली की कीमतों व उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करके ही भारत अपने नागरिकों के लिए खाना पकाने का एक स्थायी और विश्वसनीय विकल्प सुनिश्चित कर पाएगा। यह पहल न केवल भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करेगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को अपनाने में भी देश को आगे बढ़ाएगी।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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