क्रेडिट लेने की होड़ में 'ड्राफ्ट' का बवाल: शहबाज शरीफ की कूटनीति पर हंसी क्यों आ रही है?...

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने एक्स हैंडल पर 'ड्राफ्ट' पोस्ट साझा कर अंतर्राष्ट्रीय किरकिरी का सामना करते हुए.

क्रेडिट लेने की होड़ में 'ड्राफ्ट' का बवाल: शहबाज शरीफ की कूटनीति पर हंसी क्यों आ रही है?...

पड़ोसी मुल्क में जब कोई 'बड़ी खबर' बनती है, तो हम भारतीय दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। कभी राजनीति का ड्रामा, कभी अर्थव्यवस्था का झमेला और अब तो 'डिजिटल कूटनीति' की नई कॉमेडी! जी हां, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने आधिकारिक 'एक्स' (पहले ट्विटर) हैंडल से एक ऐसी पोस्ट साझा कर दी, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'कूटनीति के स्टैंड-अप कॉमेडियन' की उपाधि दिला दी। यह सिर्फ एक 'ड्राफ्ट' पोस्ट नहीं थी, यह मानो पूरे पाकिस्तानी 'सिस्टम' का एक लाइव 'एक्स-रे' था, जिसने दिखा दिया कि आखिर पर्दे के पीछे क्या खिचड़ी पक रही है। भारतीय जनता के लिए यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि मनोरंजन का एक शानदार पैकेज है, जहाँ पड़ोसी की 'अपरिपक्व कूटनीति' पर चटखारे लेने का मौका मिलता है।

जब 'ड्राफ्ट' ने खोल दी पोल: पश्चिम एशिया शांति का कच्चा चिट्ठा

किस्सा शुरू हुआ जब दुनिया पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की कोशिशों में जुटी थी, और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी खुद को 'शांतिदूत' के रूप में पेश करने की जुगत में थे। लेकिन उनकी इस 'उत्कृष्ट' कूटनीति का श्रीगणेश ही कुछ ऐसा हुआ कि सब हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। उनके 'एक्स' हैंडल से एक पोस्ट साझा की गई, जिसकी शुरुआत में ही बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था, 'ड्राफ्ट – पाकिस्तान्स पीएम मैसेज ऑन एक्स'। यह सिर्फ एक शब्द नहीं, यह तो लापरवाही की पूरी गाथा थी, जिसे उनकी सोशल मीडिया टीम ने बिना जांचे-परखे सीधे सार्वजनिक कर दिया।

इस 'कच्चे' संदेश में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर की कोशिशों का उल्लेख था। पोस्ट में सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से 'दो सप्ताह की समय सीमा' बढ़ाने का अनुरोध किया गया था, और ईरानी भाइयों से 'सद्भावना' के तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अपील की गई थी। अरे भाई! यह कूटनीतिक संदेश था या वॉट्सएप ग्रुप में भेजा गया कोई 'कच्चा चिट्ठा' जिसका 'सेंड' बटन गलती से दब गया?

जैसे ही इस बड़ी चूक का अहसास हुआ, पोस्ट को आनन-फानन में एडिट किया गया और 'ड्राफ्ट' शब्द हटा दिया गया। लेकिन 'एक्स' का एडिट हिस्ट्री फीचर तो सब याद रखता है, जैसे दादी-नानी पुरानी बातें याद रखती हैं। सोशल मीडिया पर तुरंत 'बचकाना कूटनीति' के ठहाके गूंजने लगे। लोग पूछने लगे कि क्या पाकिस्तान अब 'ड्राफ्टेड कूटनीति' करेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर, जहां डोनाल्ड ट्रंप जैसे वैश्विक नेता और ईरान का जिक्र हो, ऐसी लापरवाही पाकिस्तान की वैश्विक छवि को ज़बरदस्त नुकसान पहुंचाती है। यह 'शांतिदूत' बनने की होड़ में 'डिजिटल ड्राफ्ट' से 'डिप्लोमेटिक ड्रामा' का एक शानदार नमूना बन गया!

यह लापरवाही है या कूटनीतिक गंभीरता की कमी?

यह घटना सिर्फ एक तकनीकी चूक नहीं है, यह कहीं न कहीं 'क्रेडिट लेने की जल्दबाजी' और 'प्रशासनिक अपरिपक्वता' का जीता-जागता उदाहरण है। जब एक देश खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में पेश करने की कोशिश करता है, तो उसके संचार में ऐसी बचकानी गलतियां उसकी गंभीरता पर सवालिया निशान लगा देती हैं। डिजिटल युग में, जब एक ट्वीट या एक पोस्ट से देश की इमेज बनती और बिगड़ती है, पाकिस्तान जैसे देश के लिए यह सबक बड़ा महंगा पड़ सकता है। यह सिर्फ एक 'ड्राफ्ट' नहीं, यह एक 'डिजिटल डायरी' है, जिसमें देश की 'कूटनीति' के कच्चे पन्ने सार्वजनिक रूप से दर्ज होते रहते हैं। यह ट्रेंड है या सिर्फ एक और पाकिस्तानी 'एपिसोड'? शायद दोनों का मिश्रण। पाकिस्तान के लिए तो ऐसी 'चूकें' अब एक सामान्य सी बात हो गई हैं, लेकिन हर बार एक नया तरीका ढूंढ निकालना, यह वाकई काबिले-तारीफ है!

तो अगली बार जब शहबाज शरीफ 'शांतिदूत' बनने निकलें, उम्मीद है उनकी सोशल मीडिया टीम 'सेव एज ड्राफ्ट' और 'पब्लिश' के बीच का अंतर समझ चुकी होगी। वर्ना, ये डिजिटल दुनिया है साहब, यहां 'एडिट' करने का मौका मिलता है, लेकिन 'किरकिरी' की रिकॉर्डिंग हमेशा के लिए हो जाती है, जिसे न चाहते हुए भी इतिहास के 'एडिट हिस्ट्री' में दर्ज कर लिया जाता है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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