होर्मुज स्ट्रेट संकट: अमेरिका से अलग होकर दुनिया के देश खुद कर रहे हैं समाधान की कोशिश

Hormuz Strait mein global efforts, America ke bina samadhan ki koshish, Iran, Europe, international cooperation

होर्मुज स्ट्रेट संकट: अमेरिका से अलग होकर दुनिया के देश खुद कर रहे हैं समाधान की कोशिश

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट संकट (Hormuz Strait Crisis) को सुलझाने के लिए अब दुनिया के कई बड़े देश अमेरिका से अलग होकर अपने स्तर पर समाधान तलाश रहे हैं। ईरान युद्ध और उसके क्षेत्रीय प्रभावों को लेकर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच मतभेद लगातार गहरा रहे हैं, जिससे एक नई कूटनीतिक दरार साफ दिखाई दे रही है। खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) से तेल और गैस पर निर्भर देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से पूरी तरह खोलने के लिए तेजी से प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि इस संकट के कारण वैश्विक व्यापार (Global Trade) और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर सीधा असर पड़ रहा है। वहीं, इस पूरे मामले में अमेरिका के अनिर्णायक रवैये को लेकर भी कई देशों में नाराजगी बढ़ रही है।

अमेरिका-यूरोप संबंधों में दरार और अंतर्राष्ट्रीय पहल

इसी सप्ताह ब्रिटेन (UK) ने 40 से अधिक देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें होर्मुज जलमार्ग (Hormuz Waterway) से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही फिर से शुरू कराने पर गहन चर्चा हुई। इस बैठक के दौरान वैश्विक व्यापार में आई रुकावट के लिए ईरान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया। हालांकि, इस बैठक में भी पश्चिमी देशों (Western Countries) के बीच गहरे मतभेद खुलकर सामने आए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने अमेरिका के सैन्य कार्रवाई (Military Action) के प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका खुद फैसले लेकर कार्रवाई करे और फिर दूसरों से समर्थन की उम्मीद रखे, यह सही नीति नहीं है। मैक्रों ने इसे "हमारा अभियान नहीं है" कहकर यूरोपीय देशों की अलग राय को उजागर किया।

यूरोपीय देश इस संकट को सुलझाने के लिए सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत (Dialogue) और आर्थिक दबाव (Economic Pressure) को अधिक प्रभावी और सुरक्षित तरीका मानते हैं। अधिकारियों और विशेषज्ञों का हवाला देते हुए ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (The Wall Street Journal) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए सैन्य विकल्पों को अवास्तविक (Unrealistic) और बेहद जोखिम भरा (Risky) माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में बहरीन (Bahrain) ने इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है, हालांकि ‘द हिल’ (The Hill) की रिपोर्ट के अनुसार, उसे चीन (China) के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय सहमति बनाना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका और यूरोप के बीच दशकों पुराने रिश्तों में बढ़ती दूरी को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान युद्ध (Iran War) ने अमेरिका और यूरोप के संबंधों को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां दरार साफ दिखाई दे रही है। अमेरिका इस बात से नाराज है कि उसके सहयोगी देश इस युद्ध में उसका साथ नहीं दे रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भी यूरोपीय देशों से नाराज बताए जा रहे हैं और उन्होंने नाटो (NATO) के भविष्य पर भी सवाल उठाए हैं, जिससे इस महत्वपूर्ण सैन्य गठबंधन (Military Alliance) को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ईरान की बढ़ती पकड़ और मानवीय चिंताएं

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान भी अस्पष्ट और विरोधाभासी रहे हैं। उन्होंने एक ओर कहा कि जो देश खाड़ी क्षेत्र के तेल पर निर्भर हैं, उन्हें खुद आगे आकर इस रास्ते को खोलना चाहिए और अमेरिका केवल मदद करेगा। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका खुद इस रास्ते को खोल सकता है और इससे तेल व्यापार (Oil Trade) में फायदा उठा सकता है। इससे उनकी नीति में स्पष्ट असमंजस (Policy Confusion) दिखाई देता है।

वहीं दूसरी ओर जमीनी स्थिति की बात करें तो ‘द हिल’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस जलमार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। कुछ मित्र देशों को ही सीमित रूप से गुजरने दिया जा रहा है और जहाजों से शुल्क (Fees) लेने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इस संकट के कारण कई देशों ने आपात योजनाएं (Emergency Plans) बनानी शुरू कर दी हैं। इसमें शिपिंग कंपनियों (Shipping Companies) के साथ तालमेल और ईरान पर दबाव बनाने के लिए संभावित प्रतिबंधों (Sanctions) पर चर्चा शामिल है। मानवीय चिंताएं (Humanitarian Concerns) भी तेजी से बढ़ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने खाद, अनाज और अन्य जरूरी सामान की कमी से निपटने के लिए एक विशेष टीम बनाई है, क्योंकि इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हो रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने सुझाव दिया है कि ऊर्जा से जुड़े मुद्दों और युद्ध से जुड़े मुद्दों को अलग-अलग तरीके से हल किया जाना चाहिए, ताकि स्थिति को स्थिर किया जा सके। कुल मिलाकर युद्ध कब तक चलेगा, इसको लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और अमेरिका के पास इससे बाहर निकलने की कोई स्पष्ट योजना फिलहाल नजर नहीं आ रही है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

एक टिप्पणी भेजें