डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 25वें संशोधन की मांग तेज: क्या है पूरा मामला और इसके मायने?

डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 25वां संशोधन लागू करने की मांग, अमेरिकी राजनीति में हलचल

अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को लेकर गरमागरम बहस छिड़ गई है। हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 25वें संशोधन (25th Amendment) को लागू करने की मांग तेजी से उठ रही है। यह मांग ट्रंप के एक विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट के बाद जोर पकड़ रही है, जिसमें उन्होंने ईरान को निशाना बनाते हुए अपशब्दों का प्रयोग किया था। इस घटनाक्रम ने अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और उनकी मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दरअसल, यह पूरा मामला ईस्टर (Easter) की सुबह का है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने 'ट्रूथ सोशल' (Truth Social) अकाउंट पर ईरान को लेकर एक बेहद तीखा और आपत्तिजनक पोस्ट किया था। इस पोस्ट में उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को तुरंत खोलने की मांग की थी, अन्यथा 'नरक जैसी स्थिति' झेलने की धमकी दी थी। उनके इस बयान के बाद, अमेरिकी कांग्रेस (US Congress) के कई सदस्यों और पूर्व अधिकारियों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि ट्रंप शायद मानसिक तौर पर ठीक नहीं हैं, और इसी कारण उनके खिलाफ अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन को लागू किया जाना चाहिए।

डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 25वें संशोधन की मांग: प्रमुख आवाजें

डोनाल्ड ट्रंप के इस पोस्ट के बाद कई प्रमुख हस्तियों ने 25वें संशोधन को लागू करने की वकालत की है। कनेक्टिकट (Connecticut) से डेमोक्रेटिक सीनेटर (Democratic Senator) क्रिस मर्फी (Chris Murphy) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर लिखा, “अगर मैं ट्रंप की कैबिनेट (Cabinet) में होता, तो मैं ईस्टर पर संवैधानिक वकीलों को 25वें संशोधन के बारे में बताता।” इसी तरह, डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेटिव (Democratic Representative) यासमीन अंसारी (Yasmin Ansari) ने भी पोस्ट किया, “25वां अमेंडमेंट किसी वजह से है।”

एमएसएनबीसी (MSNBC) के पूर्व होस्ट मेहदी हसन (Mehdi Hasan) ने भी राष्ट्रपति के ईस्टर संदेश को लेकर कहा कि उपराष्ट्रपति (Vice President) और कैबिनेट को वास्तव में 25वें संशोधन को लागू करना चाहिए। डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेटिव मेलानी स्टैंसबरी (Melanie Stansbury) ने तो यहां तक कह दिया, “सम्राट के पास कपड़े नहीं हैं। 25वें संशोधन का समय आ गया है। कांग्रेस और कैबिनेट को कार्रवाई करनी चाहिए।”

खास बात यह है कि ट्रंप की पुरानी समर्थक रहीं मार्जोरी टेलर ग्रीन (Marjorie Taylor Green) ने भी एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए अमेरिकी सरकार से ट्रंप के 'पागलपन' (Madness) में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी को और उन्हें जानती हूं। वह पागल हो चुके हैं और आप सभी इसमें शामिल हैं।” व्हाइट हाउस के रिपोर्टर एसवी डेट (SV Date) ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'वह पागल हो चुके हैं।' यह 25वें संशोधन का क्षेत्र होगा।” ट्रंप के विरोधी और पुराने कांग्रेसी जो वॉल्श (Joe Walsh) और उनके पहले कार्यकाल के व्हाइट हाउस कम्युनिकेशंस डायरेक्टर (White House Communications Director) एंथनी स्कारामुची (Anthony Scaramucci) ने भी इस मांग का समर्थन किया है, जिसमें ट्रंप को 'पागल आदमी' (Mad Man) बताया गया है जिसे पद से हटाया जाना चाहिए।

क्या है अमेरिका का 25वां संशोधन (25th Amendment)?

अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Provision) है, जो राष्ट्रपति की अक्षमता की स्थिति में उनके उत्तराधिकार (Presidential Succession) से संबंधित है। यह संशोधन उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के ज्यादातर सदस्यों को यह विकल्प देता है कि यदि वे यह मानते हैं कि राष्ट्रपति अपनी ड्यूटी निभाने में असमर्थ हैं, तो वे उन्हें पद से हटाकर उपराष्ट्रपति को कार्यवाहक राष्ट्रपति (Acting President) बना सकते हैं। यह प्रक्रिया तब लागू होती है जब राष्ट्रपति स्वेच्छा से अपनी अक्षमता घोषित करते हैं या जब कैबिनेट और उपराष्ट्रपति मिलकर यह निर्णय लेते हैं कि राष्ट्रपति पद के कर्तव्यों का पालन करने में सक्षम नहीं हैं। इस संशोधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का नेतृत्व हमेशा एक सक्षम व्यक्ति के हाथों में रहे।

यह घटनाक्रम अमेरिकी राजनीति में एक गंभीर मोड़ है, खासकर जब डोनाल्ड ट्रंप 2024 के राष्ट्रपति चुनावों (2024 Presidential Elections) में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। उनके खिलाफ 25वें संशोधन को लागू करने की मांग, भले ही अभी तात्कालिक तौर पर संभव न दिखे, लेकिन यह उनकी सार्वजनिक छवि (Public Image) और राजनीतिक भविष्य (Political Future) पर निश्चित रूप से गहरा प्रभाव डालेगी। यह मुद्दा न केवल उनकी मानसिक स्थिरता पर बहस छेड़ रहा है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति पद की गरिमा और संवैधानिक सीमाओं (Constitutional Limits) पर भी विचार करने के लिए मजबूर कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मांग कितनी दूर तक जाती है और अमेरिकी राजनीति पर इसका क्या दीर्घकालिक असर होता है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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