भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार का दिन निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ। दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) पर बिकवाली का ऐसा दबाव देखा गया कि प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई। Share Market Crash की इस लहर ने सेंसेक्स को 943 अंकों तक नीचे धकेल दिया, वहीं निफ्टी भी 24,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर (Psychological Level) से नीचे फिसल गया। बाजार में यह हलचल केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के कारण पैदा हुई है, जिसका सीधा असर आम निवेशकों की पूंजी पर पड़ा है।
Share Market Crash: क्यों धड़ाम हुआ भारतीय बाजार?
शुक्रवार को सेंसेक्स लाल निशान के साथ 77,483.80 पर खुला और देखते ही देखते यह पिछली क्लोजिंग के मुकाबले 943.35 अंक टूटकर 76,720.65 के निचले स्तर (Intraday Low) तक चला गया। इसी तरह, निफ्टी (Nifty 50) ने भी कमजोर शुरुआत की और लगभग 270 अंकों की गिरावट के साथ 23,903.25 का स्तर छुआ। इस गिरावट ने बाजार की धारणा (Market Sentiment) को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट पिछले तीन दिनों से जारी बिकवाली के सिलसिले का ही हिस्सा है, जिसने गुरुवार को भी सेंसेक्स को 852 अंक नीचे धकेला था।
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर (Ceasefire) को लेकर चल रही बातचीत का अचानक रुक जाना है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते तनाव ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे जोखिम उठाने की क्षमता कम हुई है।
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बाजार को डुबाने वाले 5 प्रमुख कारक
विशेषज्ञों ने आज की भारी गिरावट के पीछे पांच मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया है। सबसे पहले, कच्चे तेल की अस्थिरता (Crude Oil Volatility) है; ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 105.97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो भारत जैसे आयात प्रधान देश के लिए नकारात्मक संकेत है। दूसरा प्रमुख कारण भारतीय रुपये में आई रिकॉर्ड गिरावट (Depreciation in Rupee) है। शुक्रवार को रुपया शुरुआती कारोबार में ही 24 पैसे टूटकर 94.25 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और वैश्विक दबाव
विदेशी संस्थागत निवेशक (Foreign Institutional Investors - FII) भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को ही उन्होंने 3,254.71 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों (Global Markets) की सुस्ती ने भी आग में घी डालने का काम किया है। अमेरिकी बाजार लाल निशान में बंद हुए और जकार्ता, शंघाई और कोस्पी जैसे एशियाई बाजारों में भी गिरावट का रुख रहा। बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया वीआईएक्स (India VIX) 3.5 प्रतिशत से अधिक उछलकर 19.2 के स्तर पर पहुंच गया, जो निवेशकों के बीच बढ़े डर और सतर्कता को दर्शाता है।
आगामी समय के लिए संकेत और विश्लेषण
बाजार के इस रुख पर जियोजित इनवेस्टमेंट्स (Geojit Financial Services) के विशेषज्ञ वीके विजयकुमार का कहना है कि विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोरी एक साथ मिलकर लार्ज-कैप शेयरों (Large-cap Stocks) पर दबाव बनाए रख सकते हैं। तकनीकी रूप से देखें तो निफ्टी का 24,000 के स्तर से नीचे जाना शॉर्ट टर्म में मंदी के संकेत दे रहा है। यदि भू-राजनीतिक तनाव जल्द कम नहीं होता है, तो बाजार में अभी और सुधार (Correction) देखने को मिल सकता है।
अल्पकालिक रूप से बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, क्योंकि मुद्रास्फीति (Inflation) का डर और वैश्विक अनिश्चितता निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर जाने के लिए मजबूर कर रही है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गुणवत्तापूर्ण शेयरों में संचय (Accumulation) का अवसर भी हो सकता है, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की रणनीति अपनाना ही समझदारी होगी। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक नीतिगत फैसले बाजार की दिशा तय करेंगे।