बंपर बाइंग से शेयर बाजार गुलजार: सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार रिकवरी
भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में पिछले कुछ दिनों से जारी अनिश्चितता और उठापटक के बीच 29 अप्रैल को निवेशकों के लिए राहत भरी खबर आई। एक दिन पहले की भारी गिरावट और अस्थिरता को पीछे छोड़ते हुए बाजार ने जबरदस्त वापसी की। बंपर बाइंग से शेयर बाजार गुलजार (Bumper buying in stock market) नजर आया और सेंसेक्स व निफ्टी दोनों ने ही दिन के कारोबार के दौरान ऊंचाइयों को छुआ। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में खरीदारी का जो दौर शुरू हुआ, उसने प्रमुख इंडेक्स को हरे निशान के काफी ऊपर पहुंचा दिया।
29 अप्रैल के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स (Sensex) अपनी पिछली क्लोजिंग से करीब 1095.6 अंक उछलकर 77,982.51 के ऑल-टाइम हाई स्तर के करीब पहुंच गया। इसी तरह, निफ्टी (Nifty) भी पीछे नहीं रहा और इसने 336.1 अंकों की शानदार बढ़त के साथ 24,331.80 का स्तर छू लिया। हालांकि, दिन के दूसरे हिस्से में वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों के कारण बाजार थोड़ा नीचे जरूर आया, लेकिन ओवरऑल सेंटीमेंट सकारात्मक बना रहा। यह तेजी आम निवेशकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बाजार की लिक्विडिटी और घरेलू निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
बाजार में तेजी के 4 प्रमुख कारण और सेक्टर वार प्रदर्शन
शेयर बाजार में आई इस शानदार तेजी के पीछे चार मुख्य कारण (Key drivers of market rally) रहे हैं। इनमें सबसे अहम रही निचले स्तरों पर खरीदारी। 28 अप्रैल को जब सेंसेक्स 416.72 अंकों की गिरावट के साथ 76,886.91 पर बंद हुआ था, तो कई गुणवत्तापूर्ण स्टॉक्स (Quality Stocks) आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध थे।
1. निचले स्तरों पर वैल्यू बाइंग
बाजार में गिरावट के बाद निवेशकों ने "वैल्यू बाइंग" (Value Buying) की रणनीति अपनाई। विशेष रूप से ऑटो, रियल्टी, आईटी (IT) और एफएमसीजी (FMCG) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में जमकर खरीदारी हुई। निवेशकों को लगा कि मौजूदा भाव लंबी अवधि के लिए निवेश का बेहतरीन मौका हैं, जिससे बाजार को जबरदस्त सहारा मिला।
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2. एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत
भारतीय बाजार को ग्लोबल सेंटीमेंट, खासकर एशियाई बाजारों (Asian Markets) की मजबूती से काफी बल मिला। हेंग सेंग, कॉस्पी, शंघाई कंपोजिट और जकार्ता कंपोजिट जैसे इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि ताइवान और निक्केई में थोड़ी कमजोरी थी, लेकिन समग्र एशियाई रुख ने भारतीय बुल्स (Bulls) को उत्साहित किया।
3. घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) का भरोसा
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने गिरने नहीं दिया। आंकड़ों के अनुसार, जहां विदेशी निवेशकों ने 2,103.74 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, वहीं घरेलू निवेशकों ने 1,712.01 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार के संतुलन को बनाए रखा।
कच्चे तेल की कीमतों का दबाव और व्यापार घाटे की चिंता
हालांकि बाजार में तेजी थी, लेकिन दिन के अंत में रफ्तार कुछ धीमी पड़ती दिखी। इसका मुख्य कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में फिर से आया उछाल रहा। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। भारत के लिए यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात (Import) के जरिए पूरा करता है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे तौर पर भारत के आयात बिल (Import Bill) को बढ़ाती है, जिससे व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। इसका असर भारतीय रुपये पर भी पड़ता है और विनिर्माण (Manufacturing), एविएशन और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर्स की इनपुट कॉस्ट बढ़ जाती है। यही कारण था कि सेंसेक्स और निफ्टी अपनी शुरुआती तेजी को पूरी तरह बरकरार नहीं रख पाए और ऊंचे स्तरों से थोड़े नीचे फिसल गए।
निष्कर्ष के तौर पर देखें तो बाजार में वर्तमान तेजी काफी हद तक घरेलू निवेशकों की सक्रियता और वैल्यू बाइंग पर टिकी है। शॉर्ट-टर्म (Short-term) में बाजार पर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक नीतियों (Global Economic Policies) का असर बना रहेगा। अगर वैश्विक स्तर पर तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो आने वाले दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी नए रिकॉर्ड बना सकते हैं। फिलहाल निवेशकों को 'बाय ऑन डिप्स' (Buy on dips) की रणनीति अपनाते हुए अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.