आधुनिक शिक्षा में एआई का बढ़ता प्रभाव: शिक्षकों ने तर्कशक्ति पर दिया जोर
बिहारशरीफ, निज संवाददाता। आधुनिक शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जो शिक्षण प्रणाली के लिए नए अवसर और चुनौतियाँ दोनों लेकर आया है। इसी विषय पर बिहारशरीफ के मंगला स्थान स्थित डैफोडिल पब्लिक स्कूल में रविवार को नालंदा सहोदया क्लस्टर के शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय मंत्रणा (deliberation) कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान शिक्षकों ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को इस तकनीक के प्रति सजग करना और उनमें तर्क-वितर्क की क्षमता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों और विभिन्न स्कूलों के प्रतिनिधियों ने इस तेजी से बदलते परिदृश्य में शिक्षकों की भूमिका और छात्रों के लिए तार्किक सोच (logical thinking) के महत्व पर गहन विचार-विमर्श किया।
एआई: अवसर और चुनौती दोनों - समस्या समाधान के लिए चाहिए तर्कशक्ति
‘समस्या समाधान की तार्किक प्रक्रिया और एआई को समझना’ विषय पर आयोजित इस मंत्रणा कार्यक्रम में नालंदा सहोदया क्लस्टर के अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह और जिला समन्वयक रुबीना निशात ने एआई को एक 'दोधारी तलवार' (two-edged sword) बताया। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग जितने सलीके और तरीके से किया जाएगा, उतने ही बेहतर परिणाम मिलेंगे, लेकिन थोड़ी सी भी चूक या गलत विवेचना हानिकारक सिद्ध हो सकती है। यह स्थिति शिक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती होने के साथ-साथ एक शानदार अवसर भी प्रस्तुत करती है, जिसे बेहतर ढंग से धरातल पर उतारने की आवश्यकता है। दैनिक जीवन में भी एआई का हस्तक्षेप अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है, ऐसे में हम इंसानों में अच्छे और बुरे की पहचान करने के लिए तर्क-वितर्क की शक्ति का होना अनिवार्य है, तभी जीवन सहज, सरल और आसान बन पाएगा। शिक्षकों ने इस बात पर सहमति जताई कि बच्चों को बचपन से ही एआई के प्रति न सिर्फ आगाह करना होगा, बल्कि उन्हें इसके हिसाब से तैयार भी करना होगा।
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शिक्षा में तकनीक की भूमिका और भविष्य की राह
इस कार्यक्रम में कई स्कूलों के प्रतिनिधियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence), कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (Computational Thinking) और आधुनिक शिक्षा में तकनीक की भूमिका (role of technology) पर अपने विचार व्यक्त करते हुए आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। प्रतिभागियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के लिए तार्किक सोच, समस्या समाधान क्षमता (problem-solving skills) तथा एआई की समझ अत्यंत आवश्यक हो गई है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन (resource persons) पवन कुमार वर्मा, मो. साबिर हुसैन, कुंदन पाठक, प्राचार्य डॉ. रविचंद कुमार, उप प्राचार्या ज्योति मेहता और दीपक कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। डैफोडिल पब्लिक स्कूल, कैम्ब्रिज स्कूल सिलाव, सदर आलम मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल और कैंब्रिज स्कूल पहाड़पुरा के शिक्षकों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में एआई के उपयोग, डिजिटल लर्निंग (digital learning), कोडिंग स्किल्स (coding skills) और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। शिक्षकों ने ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों को विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया, जो उन्हें बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुकूल ढलने में मदद करेंगे।
निष्कर्षतः, आधुनिक शिक्षा में एआई का बढ़ता प्रभाव एक ऐसी वास्तविकता है जिससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। यह आवश्यक है कि शिक्षक और छात्र दोनों ही इस तकनीक को समझें, इसके लाभों का उपयोग करें और इसकी चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी तार्किक और विवेचनात्मक क्षमताओं को मजबूत करें। बिहारशरीफ में आयोजित यह मंत्रणा कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य की पीढ़ियों को एआई के साथ सामंजस्य बिठाकर चलने के लिए तैयार करने की आवश्यकता पर बल देता है।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.