कान्स में आलिया के डबल स्टैंडर्ड पर बवाल: भारतीय सिनेमा पर सवाल उठाकर हुईं जबरदस्त ट्रोल

Alia Bhatt Cannes trolling double standard Indian cinema

हाल ही में 79वें कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) में बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट ने अपने ग्लैमरस अंदाज से खूब सुर्खियां बटोरीं। फ्रेंच रिवेरा में उनके मिंट बॉल गाउन और डिजाइनर तमाशा राल्फ के बनाए पीच कलर के गाउन ने सबका ध्यान खींचा। भारत पवेलियन के उद्घाटन के लिए पहनी गई उनकी साड़ी गाउन और पायल ने भी खूब वाहवाही लूटी। सोशल मीडिया पर उनके फैशन स्टेटमेंट्स की जमकर तारीफ हुई, लेकिन इसी बीच उनके एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है, जिस पर उन्हें आलिया के डबल स्टैंडर्ड का आरोप झेलना पड़ रहा है और वह जबरदस्त ट्रोलिंग का शिकार हो गई हैं।

भारतीय सिनेमा में जेंडर डायनामिक्स पर आलिया के सवाल

दरअसल, कान्स में ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ से बात करते हुए आलिया भट्ट ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के जेंडर डायनामिक्स (gender dynamics) पर अपने विचार रखे। उन्होंने 'बार्बी', 'द डेविल वेयर्स प्राडा 2' जैसी हालिया सफल फीमेल सेंट्रिक (female-centric) फिल्मों का जिक्र करते हुए भारतीय सिनेमा की तुलना की। आलिया ने सवाल उठाया कि जब भारतीय फिल्ममेकर्स (filmmakers) अक्सर 75% पुरुष दर्शकों (mass audience) को ध्यान में रखकर फिल्में बनाते हैं, तो महिला दर्शकों की जरूरतों का ख्याल कौन रखेगा?

उन्होंने स्पष्ट किया, "मैं यह नहीं कह रही कि हम पुरुषों को अलग-थलग करें, लेकिन हमें किसी को भी अलग क्यों करना चाहिए? हमें सिर्फ एक जेंडर को क्यों टारगेट करना चाहिए? हम ऐसी फिल्में क्यों नहीं बना सकते जो जेंडर एग्नॉस्टिक (gender agnostic) हों, जहां कहानी सबसे महत्वपूर्ण हो? चाहे फिल्म में हीरो हो या हीरोइन, यह मायने नहीं रखना चाहिए। सिर्फ कहानी मायने रखनी चाहिए।" उनका यह बयान महिला सशक्तिकरण और सिनेमा में बराबरी की वकालत करता प्रतीत होता है।

'एनिमल' फिल्म के समर्थन पर उठे सवाल: आलिया पर पाखंड का आरोप

आलिया का यह बयान तेजी से वायरल हुआ और इसके तुरंत बाद उन्हें सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। कई यूजर्स ने उन पर 'पाखंडी' (hypocrite) होने का आरोप लगाया। यूजर्स ने सवाल उठाया कि आलिया ने अपने पति रणबीर कपूर की 2023 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'एनिमल' (Animal) का खुलकर समर्थन किया था, जिसे कई लोग 'टॉक्सिक मैस्क्युलिनिटी' (toxic masculinity) और महिला-विरोधी (anti-women) करार देते हैं।

एक वायरल पोस्ट में लिखा था, "अजीब है कि आलिया भट्ट, रणबीर कपूर की एनिमल की सबसे बड़ी चीयरलीडर बनी रहीं, जबकि वो सबसे ज्यादा महिला-विरोधी फिल्म थी।" एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, "जब उनके पति ने मेल-सेंट्रिक, सबसे खराब और महिला-विरोधी फिल्म बनाई, तब यह सोच कहां गई थी?" इन टिप्पणियों से साफ है कि नेटिजन्स (netizens) आलिया के बयान और उनके पिछले आचरण के बीच विरोधाभास देख रहे हैं। कई यूजर्स ने उन्हें 'परफॉर्मेटिव एक्टिविज्म' (performative activism) का भी आरोप लगाया और कहा कि बदलाव की शुरुआत उन्हें अपने घर से करनी चाहिए।

बहस का विश्लेषण: बॉलीवुड में जेंडर प्रतिनिधित्व और सोशल मीडिया की भूमिका

आलिया भट्ट के इस बयान और उस पर हुई प्रतिक्रिया ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में जेंडर प्रतिनिधित्व (gender representation) की बहस को एक बार फिर गरमा दिया है। एक ओर जहां आलिया ने सिनेमा में कहानियों को जेंडर-मुक्त रखने की बात की, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया ने उनके निजी और पेशेवर जीवन के बीच के अंतर पर सवाल उठाए। यह घटना दर्शाती है कि कैसे पब्लिक फिगर्स (public figures) के बयानों को उनके पिछले कार्यों के संदर्भ में देखा जाता है।

हालांकि, आलिया के कुछ फैंस उनके बचाव में भी सामने आए हैं। एक समर्थक ने लिखा, "वह गलत नहीं हैं… ज्यादातर सिनेमा दर्शक पुरुष हैं और फिल्में उन्हीं को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।" दूसरे ने तर्क दिया, "अगर भारतीय महिलाओं को पुरुषों जितनी नौकरियां और आजादी मिले और वे पुरुषों की तरह सिनेमाघर जाएं, तो पूरी फिल्म इंडस्ट्री काफी अलग होती।" यह दिखाता है कि इस मुद्दे पर समाज में अलग-अलग राय मौजूद है और यह केवल एक व्यक्ति की राय का मामला नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक चर्चा का विषय है।

कुल मिलाकर, कान्स में आलिया भट्ट का बयान और उस पर हुई सोशल मीडिया प्रतिक्रिया भारतीय सिनेमा में लैंगिक समानता की जटिलताओं को उजागर करती है। यह बहस फिल्ममेकर्स, दर्शकों और कलाकारों सभी के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल छोड़ जाती है कि क्या भारतीय सिनेमा केवल एक वर्ग को ही लक्षित करता रहेगा या फिर कहानियों को प्राथमिकता देकर एक अधिक समावेशी (inclusive) मंच बन पाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह चर्चा बॉलीवुड में भविष्य की फिल्मों और उनके विषयों को कैसे प्रभावित करती है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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