वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर कमोडिटी बाजारों में हलचल मचा दी है। हाल ही में फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में ईरान और अमेरिका (US) के बीच हुई सैन्य झड़पों के बाद कॉपर की कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस घटनाक्रम ने न केवल संभावित युद्धविराम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, बल्कि संघर्ष के और बढ़ने की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर औद्योगिक धातुओं के वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है।
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर शुक्रवार को सात सत्रों में पहली बार हरे निशान में बंद होने के बाद, कॉपर की कीमतें 1.7% तक गिर गईं। यह गिरावट भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति बाजार की संवेदनशीलता को दर्शाती है। हालांकि, यूके में सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) के कारण सोमवार को LME बंद रहा, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव का असर जारी रहेगा।
कॉपर की कीमत पर ईरान-अमेरिका तनाव का गहरा असर
अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में ईरानी हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से दो अमेरिकी झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद की। इसी बीच, संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) के फुजैराह पोर्ट (Fujairah Port) पर एक ड्रोन हमला भी हुआ, जिसने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। इन घटनाओं से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) और ऊर्जा बाजारों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
Similar Posts
- Share Market Crash: शेयर बाजार में इन 5 कारणों से भूचाल, सेंसेक्स 943 अंक तक फिसला; निफ्टी 24000 से नीचे
- सेबी (SEBI) की बड़ी राहत: कंपनियां IPO साइज 50% तक बदल सकेंगी, DRHP दोबारा नहीं होगा जरूरी - बिजनेस स्टैंडर्ड
- US ने भारत से सोलर इंपोर्ट पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का किया ऐलान, Waaree Energies के शेयर 4% टूटे
- HCL Tech Share Fall: ₹59,000 करोड़ का झटका, 3 दिन में 15% गिरा शेयर; जानें आगे कैसी रहेगी चाल?
- SBI Report: देश में कैश और डिजिटल भुगतान दोनों जरूरी, क्यों संकट में नकदी जमा कर रहे हैं लोग?
धातुओं के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा संकट (Energy Shock) बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक (Central Banks) और अधिक सख्त मौद्रिक नीति (Monetary Policy) अपना सकते हैं, जिससे विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ेगा और औद्योगिक कमोडिटीज़ (Industrial Commodities) की मांग में कमी आएगी। यह एक ऐसा दुष्चक्र है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) को मंदी की ओर धकेल सकता है।
सप्लाई साइड (Supply Side) पर भी कॉपर के लिए स्थितियां अनुकूल नहीं हैं। LME-ट्रैक्ड वेयरहाउस (LME-Tracked Warehouse) में कॉपर का स्टॉक 2013 के बाद से अपने उच्चतम स्तर के पास बना हुआ है। यह अतिरिक्त स्टॉक बाजार में मंदी का माहौल (Bearish Sentiment) और बढ़ा रहा है, क्योंकि पर्याप्त आपूर्ति के बावजूद मांग में कमी की आशंका है। शंघाई टाइम (Shanghai Time) के अनुसार सुबह 10:02 बजे तक LME पर कॉपर 1% गिरकर 12,863 डॉलर प्रति टन पर कारोबार कर रहा था।
अन्य धातुओं और एशियाई बाजारों की स्थिति
कॉपर के साथ-साथ अन्य औद्योगिक धातुओं पर भी दबाव देखा गया। एल्युमिनियम (Aluminum) 0.9% और जिंक (Zinc) 1.1% गिरा। हालांकि, सिंगापुर एक्सचेंज (Singapore Exchange) पर आयरन ओर फ्यूचर्स (Iron Ore Futures) में थोड़ा बदलाव नहीं हुआ और यह 108.40 डॉलर प्रति टन पर स्थिर रहा। चीनी बाजारों में छुट्टी (Holiday) के कारण ट्रेडिंग गतिविधि धीमी थी, लेकिन चीनी बाजार बुधवार को फिर से खुलेंगे, जिससे एशियाई बाजारों में धातुओं की कीमतों पर नया असर देखने को मिल सकता है।
यह स्थिति दर्शाती है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का कमोडिटी बाजारों पर सीधा और तत्काल प्रभाव पड़ता है। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक व्यापार मार्गों (Global Trade Routes) में अवरोध पैदा होने की आशंका है, जो न केवल ऊर्जा की कीमतों को प्रभावित करेगा, बल्कि औद्योगिक उत्पादन (Industrial Production) और उपभोक्ता मांग (Consumer Demand) को भी प्रभावित कर सकता है। निवेशकों और नीति निर्माताओं (Policy Makers) को इन जोखिमों पर बारीकी से नजर रखने की आवश्यकता है ताकि संभावित आर्थिक झटकों से बचा जा सके। आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी कि क्या यह गिरावट अल्पकालिक है या वैश्विक धातु बाजार एक लंबी मंदी की ओर बढ़ रहा है।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.