दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलाजाब इलाके में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया, जब एक पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक ढह गई। इस दर्दनाक घटना में अब तक 10 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें से दो घायलों को इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर (AIIMS Trauma Center) में भर्ती कराया गया है। यह इमारत पास की एक दूसरी बिल्डिंग पर जा गिरी, जिसके नीचे बनी कैंटीन में खाना खा रहे कुछ छात्र मलबे में दब गए। घटना की जानकारी मिलते ही फायर डिपार्टमेंट (Fire Department), एनडीआरएफ (NDRF) और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की टीमें मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जो इमारत गिरी वह एक कमर्शियल बिल्डिंग थी जिसमें कई दफ्तर थे। गनीमत यह रही कि शनिवार का दिन होने के कारण अधिकांश कार्यालय बंद थे, जिससे इमारत के अंदर फंसे लोगों की संख्या कम होने की आशंका है। हालांकि, हादसे का सबसे ज्यादा असर बगल वाली बिल्डिंग पर पड़ा, जहां एक लाइब्रेरी और उसके नीचे एक कैंटीन चल रही थी। लाइब्रेरी में विदेश से एमबीबीएस (MBBS) करके लौटे छात्र भारत की मेडिकल परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। अधिकांश छात्र समय रहते बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कैंटीन में डिनर कर रहे कुछ छात्र मलबे में दब गए।
दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास 5 मंजिला इमारत गिरी: बचाव कार्य जारी
दिल्ली फायर सर्विसेज को शनिवार शाम करीब 7:44 बजे इस हादसे की पहली सूचना मिली। रात का समय होने के कारण बचाव कार्य में कई चुनौतियां आ रही हैं। मलबे को हटाने और फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए जेसीबी (JCB) मशीनों के साथ-साथ रोशनी के लिए लाइट वैन और वाटर टेंडर (WT) भी मौके पर भेजे गए हैं। डिविजनल ऑफिसर (DO) रविंदर सिंह, एडीओ (ADO) संतोष कुमार और एसटीओ (STO) फूल सिंह मीणा की देखरेख में रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operation) तेजी से जारी है। स्थानीय लोग भी अपने मोबाइल की फ्लैशलाइट (Flashlight) जलाकर बचाव दल का सहयोग कर रहे हैं।
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अब तक कुल 10 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। इनमें से 7 लोगों को दिल्ली फायर सर्विस की टीम ने रेस्क्यू किया, जबकि 3 लोगों को फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों और पीसीआर (PCR) वैन ने मिलकर निकाल लिया था। दिल्ली की सीएम (CM) रेखा गुप्ता ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरी चिंता व्यक्त की है और बताया कि मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। घटनास्थल पर संकरी गलियों और घनी आबादी के कारण बचाव वाहनों को जगह देने में काफी दिक्कतें आ रही हैं, जिस वजह से लगातार भीड़ को हटाया जा रहा है।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के इलाके की घेराबंदी कर दी है और लोगों से अनावश्यक भीड़ न लगाने की अपील की है ताकि बचाव दल बिना किसी रुकावट के काम कर सके। आसपास की इमारतों की सुरक्षा की निगरानी भी शुरू कर दी गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गिरी हुई इमारत का भारी मलबा बगल की टिन शेड कैंटीन पर गिरा, जहां बच्चे डिनर कर रहे थे। फिलहाल, मलबे के अंदर अभी भी कितने लोग फंसे हैं, इसकी सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है, और सर्च ऑपरेशन (Search Operation) तब तक जारी रहेगा जब तक पूरा मलबा साफ नहीं हो जाता।
यह घटना दिल्ली जैसे महानगरों में शहरी नियोजन (Urban Planning) और इमारत सुरक्षा मानकों (Building Safety Standards) की समीक्षा की आवश्यकता पर बल देती है। अक्सर पुरानी और कमजोर इमारतों के रखरखाव में लापरवाही या अवैध निर्माण ऐसे हादसों का कारण बनते हैं। प्रशासन को बचाव कार्य के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। शहरी विकास प्राधिकरणों (Urban Development Authorities) को इमारतों की नियमित जांच और सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
मौके पर राहत और बचाव का काम युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन हर फंसे व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों का स्पष्टीकरण आगे की जांच रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगा।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.