देसी AMCA का सपना साकार! फ्रांस के टॉप डेलिगेशन ने DRDO से की मुलाकात, इंजन डील पर बड़ी अपडेट

भारत का देसी AMCA फाइटर जेट और फ्रांस के साथ इंजन डील की प्रगति

भारत का बहुप्रतीक्षित पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान (5th Generation Fighter Jet) 'एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (AMCA) का सपना अब हकीकत में बदलने के करीब दिख रहा है। पिछले 16 सालों से जिस स्वदेशी फाइटर जेट के लिए भारत संघर्ष कर रहा था, उसके इंजन सह-विकास (Co-development) को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। हाल ही में फ्रांस की रक्षा खरीद एजेंसी (DGA) के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के मुख्यालय का दौरा, इस बात का पुख्ता संकेत दे रहा है कि भारत अपने महत्वाकांक्षी देसी AMCA परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। यह घटनाक्रम न केवल भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के लिए मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि देश की रक्षा आत्मनिर्भरता (Defence Self-reliance) की दिशा में एक महत्वपूर्ण छलांग भी है।

AMCA इंजन डील: फ्रांस के साथ बढ़ी भारत की नजदीकियां

20 मई को फ्रांस के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ आर्मामेंट्स (Directorate General of Armaments) के डेलिगेट जनरल पैट्रिक पेलौक्स (Patrick Pelloux) के नेतृत्व में एक फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित डीआरडीओ मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (DDR&D) के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत (Dr. Samir V. Kamat) के साथ गहन चर्चा की। आधिकारिक बयानों के अनुसार, इस बातचीत का मुख्य केंद्र भारत और फ्रांस के बीच उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों (Advanced Defence Technologies) में सहयोग को मजबूत करना था।

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत अपने AMCA फाइटर जेट के इंजन के सह-विकास के लिए फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी 'साफरान' (Safran) और जर्मनी जैसी कंपनियों में दिलचस्पी दिखा रहा था। पैट्रिक पेलौक्स का डीआरडीओ दौरा स्पष्ट रूप से फ्रांस के पलड़े को भारी करता दिख रहा है, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत जल्द ही साफरान के साथ इंजन डील को अंतिम रूप दे सकता है। साफरान के साथ यह संभावित समझौता भारत को 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट इंजन तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित होगा।

यह घटनाक्रम कोई अचानक नहीं हुआ है, बल्कि इसकी नींव इस साल की शुरुआत में भारत और फ्रांस के बीच नवीनीकृत रक्षा सहयोग समझौते (Defence Cooperation Agreement) से जुड़ी है। हाल ही में हुई 6वीं भारत-फ्रांस वार्षिक डिफेंस टॉक (India-France Annual Defence Talk) के दौरान, दोनों देशों ने अपने रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाया था। इस बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) और फ्रांस की सशस्त्र बल एवं पूर्व सैनिक मामलों की मंत्री कैथरीन वॉट्रिन (Catherine Vautrin) ने सह-अध्यक्षता की थी। इस समझौते ने उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण (Technology Transfer) और सह-विकास के लिए एक मजबूत मंच तैयार किया है।

भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं रहना चाहता, बल्कि एक प्रौद्योगिकी निर्माता और निर्यातक बनना चाहता है। इसी सोच के तहत, भारत ने फ्रांस से राफेल (Rafale) लड़ाकू विमानों में स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50% तक करने और भारत में ही उनके रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO - Maintenance, Repair, and Overhaul) सुविधाओं का बड़े पैमाने पर विस्तार करने की मांग रखी है। यह मांग भविष्य में विदेशी धरती पर निर्भरता कम करने और स्थानीय क्षमताओं को बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

AMCA परियोजना: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम

AMCA परियोजना की विकास यात्रा अक्टूबर 2010 में 90 करोड़ रुपये के शुरुआती फंड के साथ 'फिजिबिलिटी स्टडी' (Feasibility Study) से शुरू हुई थी। 2013-2014 में इसका 1:8 स्केल मॉडल (Scale Model) पेश किया गया और 2016 में भारतीय वायुसेना ने इसके डिजाइन को आधिकारिक मंजूरी दे दी। इस परियोजना का सबसे बड़ा मोड़ मार्च 2024 में आया, जब सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (Cabinet Committee on Security - CCS) ने AMCA के प्रोटोटाइप (Prototype) विकास के लिए 15,803 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को अंतिम मंजूरी दी।

मई 2026 में आंध्र प्रदेश में AMCA कार्यक्रम की सुविधा (Facility) और रक्षा हब (Defence Hub) की नींव रखी जाएगी, जहां इसके प्रोटोटाइप और निर्माण से जुड़े काम तेजी से आगे बढ़ेंगे। फ्रांस के साथ इंजन डील की संभावना इस समय सीमा को और तेज कर सकती है, जिससे भारत जल्द ही अपना खुद का 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट आसमान में उड़ान भरता देख सकेगा। यह न केवल भारतीय सेनाओं की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा।

फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल का डीआरडीओ दौरा भारत की रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, जहां जोर अब केवल खरीद पर नहीं, बल्कि सह-विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आत्मनिर्भरता पर है। AMCA परियोजना की सफलता भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर देगी जिनके पास अपनी 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की क्षमता है, जिससे देश की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) और सुरक्षा मजबूत होगी।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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