नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। गुरुवार को अमेरिकी वाणिज्य मंडल (American Chamber of Commerce) के वार्षिक लीडरशिप समिट (Leadership Summit) में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gore) ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां अब भारत को अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रख रही हैं, जिसका सीधा असर भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है। गोर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का तेजी से बढ़ता विनिर्माण क्षेत्र (manufacturing sector), मजबूत डिजिटल ढांचा (digital infrastructure), नवाचार क्षमता (innovation capability) और कुशल मानव संसाधन (skilled human resources) अमेरिका की तकनीक (technology), निवेश (investment), आधुनिक शोध (modern research) और कारोबार में उसकी मजबूत स्थिति को बखूबी पूरा करते हैं। यह खबर न केवल दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों की गहराई को दर्शाती है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक शुभ संकेत है, जो वैश्विक मंच पर अपनी साख लगातार बढ़ा रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार: 20 साल में 11 गुना बढ़ोतरी, लक्ष्य $500 अरब
राजदूत सर्जियो गोर ने अपने संबोधन में बताया कि पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच का व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। यह आंकड़ा लगभग 11 गुना की बढ़ोतरी को दर्शाता है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों और आपसी भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आज भारत और अमेरिका एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार बन चुके हैं। गोर ने आगे कहा कि उनका दूतावास हर हफ्ते अमेरिकी कंपनियों के प्रमुखों और अधिकारियों की मेजबानी करता है, जो भारत में निवेश और व्यापार के अवसरों की तलाश में आते हैं। उबर (Uber), वॉलमार्ट (Walmart), बोइंग (Boeing), लॉकहीड (Lockheed) और जीई (GE) जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियां लगातार भारत को प्राथमिकता दे रही हैं और उनके अधिकारी यहां का दौरा कर रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार नए आयाम छू रहा है।
व्यापार समझौते पर अंतिम चरण में बातचीत
द्विपक्षीय व्यापार समझौते (bilateral trade agreement) के संदर्भ में राजदूत गोर ने जानकारी दी कि इस पर चल रही वार्ता अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का उद्देश्य ऐसा समझौता करना है, जिससे अमेरिकी कंपनियों और कामगारों को अधिक से अधिक अवसर मिलें। यह अस्थायी व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा, क्योंकि इससे बाजार तक पहुंच आसान होगी, व्यापार की बाधाएं कम होंगी और कारोबार को स्थिरता मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) मजबूत होगी, निवेश बढ़ेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। गोर ने बताया कि हाल ही में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका दौरे पर गया था और अगले महीने एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा, ताकि बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस समझौते पर बातचीत पिछले डेढ़ साल से चल रही है, जबकि यूरोपीय संघ (European Union) के साथ एक समान समझौते में लगभग 19 साल का समय लगा था। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में यह समझौता पूरा हो जाएगा।
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भारतीय बाजार में अमेरिकी निवेश और वैश्विक मान्यता
राजदूत गोर ने बताया कि दोनों देशों के बीच निवेश लगातार बढ़ रहा है। भारतीय कंपनियां अमेरिका में दवा (pharmaceuticals), विनिर्माण (manufacturing) और तकनीक (technology) के क्षेत्र में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियां भारत के तेजी से बढ़ते बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। उन्होंने खुलासा किया कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 20 अरब डॉलर से अधिक के निवेश का वादा किया है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। गोर ने गर्व से बताया कि निवेश आकर्षित करने के मामले में भारत में अमेरिकी दूतावास को दुनिया में पहला स्थान मिला है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह दिखाता है कि भारत एक मजबूत और विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है, जहां अमेरिकी कंपनियां न केवल अवसर देख रही हैं, बल्कि सक्रिय रूप से निवेश भी कर रही हैं।
यह सब कुछ भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक व्यापार में उसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की यह मजबूती न केवल अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगी, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी और गहरा करेगी। आगामी व्यापार समझौते और बढ़ते निवेश से भविष्य में दोनों देशों के लिए साझा समृद्धि के नए रास्ते खुलेंगे।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.