भारत का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit - CAD) एक बार फिर सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। पेट्रोल, डीजल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते आयात के कारण यह घाटा लगातार बढ़ रहा है, जिससे देश की आर्थिक सेहत पर दबाव पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में आयात पर लगाम कसने की अपील की थी, जिसका सीधा मकसद इस घाटे को कम करना था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी स्वीकार किया है कि सरकार इस स्थिति पर करीब से नजर रख रही है और इसे नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार किया जा रहा है। यह स्थिति आम नागरिक के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा असर रुपये के मूल्य और महंगाई पर पड़ सकता है।
बढ़ता चालू खाते का घाटा: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 2 मार्च को जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारत का चालू खाते का घाटा (CAD) बढ़कर 13.2 अरब डॉलर हो गया, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1.3 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 11.3 अरब डॉलर था। हालांकि, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान देश का कैड (CAD) घटकर 30.1 अरब डॉलर (जीडीपी का 1 प्रतिशत) रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 36.6 अरब डॉलर (1.3 प्रतिशत) था। फिर भी, तिमाही आधार पर वृद्धि चिंता का विषय है।
किसी देश का चालू खाते का घाटा तब बढ़ता है जब एक निश्चित अवधि में आयातित वस्तुओं एवं सेवाओं तथा अन्य भुगतानों का कुल मूल्य उसी दौरान निर्यातित वस्तुओं एवं सेवाओं तथा अन्य प्राप्तियों के कुल मूल्य से अधिक हो जाता है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार के सभी विभाग एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं और वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद हमें विश्वास है कि हम इस चुनौती से पार पा लेंगे।
सोने और चांदी के आयात ने बढ़ाई चिंता
गोयल ने बताया कि सोने और चांदी के बढ़ते आयात से व्यापार घाटा (Trade Deficit) और चालू खाते का घाटा (CAD) दोनों बढ़ रहे हैं। वित्तीय वर्ष (FY) 2025-26 में सोने का आयात 24 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया। मात्रा में गिरावट (721.03 टन) के बावजूद, ऊंची कीमतों ने आयात मूल्य बढ़ाया। इस साल अप्रैल में भी सोने का आयात सालाना आधार पर (Year-on-Year - YoY) 81.69 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर हो गया, जिसका मुख्य कारण ऊंची कीमतें थीं।
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केवल सोने ही नहीं, चांदी के आयात ने भी देश के खजाने पर बोझ डाला है। वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी का आयात लगभग 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया। मात्रा के हिसाब से भी यह 2025-26 में 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन हो गया। अप्रैल में इन कीमती धातुओं के आयात में वृद्धि के कारण देश का व्यापार घाटा तीन महीने के उच्चतम स्तर 28.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया। राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत लगभग 1,56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत लगभग 2.53 लाख रुपये प्रति किलोग्राम थी।
भारतीय रुपये में तेज गिरावट नीति-निर्माताओं, निवेशकों और व्यवसायों के लिए एक बड़ी आर्थिक चेतावनी है। महंगे तेल, पूंजी निकासी, बढ़ते व्यापार घाटे और मजबूत अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के कारण रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है। साल 2026 में अब तक रुपये में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट आई है, और ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से यह लगभग 6.1 प्रतिशत कमजोर हुआ है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। इसका सीधा मतलब है कि जब वैश्विक तेल कीमतें बढ़ती हैं, तो डॉलर की मांग भी बढ़ जाती है, क्योंकि भारतीय रिफाइनरियों को आयातित तेल के लिए अधिक डॉलर की आवश्यकता होती है।
यह स्थिति संकेत देती है कि सरकार को आयात पर लगाम कसने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। अल्पकालिक उपायों में गैर-आवश्यक वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाना शामिल हो सकता है, जबकि दीर्घकालिक रणनीति में घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाना महत्वपूर्ण है। रुपये की गिरती कीमत आयात को और महंगा बनाएगी, जिससे महंगाई बढ़ने का जोखिम है। सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा मिलकर काम करने का आश्वासन एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन चुनौतियों का सामना करने के लिए त्वरित और प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, चालू खाते का बढ़ता घाटा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसके लिए सरकार को विभिन्न मोर्चों पर काम करना होगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, घरेलू नीतियों को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता कम करना ही इस संकट को टालने का एकमात्र रास्ता है। आने वाले समय में सरकार के कदमों और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।
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