ट्रंप की चीन यात्रा के बाद भारत में क्वाड की बैठक: जानें भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण

क्वाड विदेश मंत्रियों की भारत में बैठक, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग

नई दिल्ली: भारत द्वारा 26 मई को आयोजित होने वाली क्वाड की बैठक (Quad Meeting) इन दिनों वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दक्षिण चीन सागर (South China Sea) और ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) से लेकर हिंद महासागर (Indian Ocean) और पश्चिम एशिया (West Asia) तक भू-राजनीतिक उथल-पुथल (Geopolitical Turmoil) लगातार बढ़ती जा रही है। नई दिल्ली में होने वाली यह मंत्रिस्तरीय बैठक इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) रणनीतिक ढांचे के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में क्वाड की भूमिका को और मजबूत करने की उम्मीद जगाती है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को आकार देने में उसके बढ़ते प्रभाव का भी संकेत है।

इस बैठक से पहले, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मुलाकात हुई, जिसने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों (Regional Security Equations) में भारत की केंद्रीय भूमिका पर वाशिंगटन (Washington) के बढ़ते जोर को उजागर किया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, रुबियो ने रक्षा, रणनीतिक प्रौद्योगिकी (Strategic Technology), व्यापार और निवेश (Trade and Investment), ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security), कनेक्टिविटी (Connectivity), शिक्षा और जन-संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग (Bilateral Cooperation) में हुई प्रगति की जानकारी दी। रुबियो ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अमेरिका का दृष्टिकोण साझा किया, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने शांति प्रयासों के लिए भारत के निरंतर समर्थन की पुष्टि की। इस दौरान रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस (White House) आने का निमंत्रण भी दिया, जिसकी पुष्टि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने अपने सोशल मीडिया (Social Media) हैंडल पर की।

क्वाड की उत्पत्ति और भारत के लिए इसका महत्व

क्वाड (Quadrilateral Security Dialogue) की उत्पत्ति 2004 की हिंद महासागर सुनामी (Indian Ocean Tsunami) के बाद हुए मानवीय सहयोग (Humanitarian Cooperation) से हुई थी। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने आपदा राहत कार्यों के लिए "सुनामी कोर ग्रुप" (Tsunami Core Group) का गठन किया था। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे (Shinzo Abe) ने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाले "लोकतांत्रिक सुरक्षा घेरे" (Democratic Security Diamond) की वकालत करते हुए क्वाड की अवधारणा को आगे बढ़ाया। हालांकि, 2008 में ऑस्ट्रेलिया के अलग होने से इसकी गति रुक गई थी, लेकिन 2017 में चीन (China) की बढ़ती सैन्य उपस्थिति और बेल्ट एंड रोड पहल (Belt and Road Initiative - BRI) के रणनीतिक निहितार्थों के मद्देनजर इसे पुनर्जीवित किया गया।

यह पुनरुद्धार 'स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक' (Free and Open Indo-Pacific - FOIP) अवधारणा के उदय के साथ हुआ। भारत के लिए, क्वाड की बैठक की मेजबानी करना उसकी कूटनीतिक संतुलन रणनीति (Diplomatic Balancing Strategy) का हिस्सा है, जहाँ वह पश्चिमी लोकतंत्रों (Western Democracies) के साथ संबंधों को गहरा करते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) बनाए रखता है। हिंद महासागर समुद्री मार्गों (Maritime Routes) पर भारत की भौगोलिक स्थिति इसे समुद्री सुरक्षा गणनाओं (Maritime Security Calculations) के केंद्र में रखती है।

शुरुआत में चीन के रणनीतिक प्रतिसंतुलन (Strategic Counterbalance) के रूप में देखा जाने वाला क्वाड अब आर्थिक सुरक्षा (Economic Security), महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों (Critical Technologies), बुनियादी ढांचे (Infrastructure), स्वास्थ्य सुरक्षा (Health Security) और जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience) जैसे व्यापक क्षेत्रों को कवर करता है। हाल के वर्षों में, क्वाड ने सेमीकंडक्टर सहयोग (Semiconductor Cooperation), लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं (Resilient Supply Chains), समुद्र के नीचे केबल संरक्षण, वैक्सीन वितरण (Vaccine Distribution), महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) व क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर पहल शुरू की हैं। आगामी बैठक में इन गैर-सैन्य आयामों को और आगे बढ़ाने की उम्मीद है, जो क्वाड के खुद को महज एक सुरक्षा गुट के बजाय क्षेत्रीय सार्वजनिक हित प्रदाता (Regional Public Interest Provider) के रूप में प्रस्तुत करने के प्रयास को दर्शाता है।

क्वाड की प्रभावशीलता पर विशेषज्ञ राय

हालांकि, मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में अमेरिका में ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) के तहत क्वाड कितना प्रभावी होगा, इस पर अटकलें जारी हैं। अनुभवी अमेरिकी पत्रकार और लेखक मयंक छाया (Mayank Chhaya) के अनुसार, भारतीय दृष्टिकोण से क्वाड कितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो, वर्तमान में अमेरिकी दृष्टिकोण से इसका उतना महत्व नहीं है। उन्होंने ईटीवी भारत को बताया कि ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की प्राथमिकताओं में क्वाड का महत्व फिलहाल कम हो गया है, क्योंकि वाशिंगटन का मानना ​​है कि बीजिंग (Beijing) ईरान (Iran) युद्ध को समाप्त करने में मदद कर सकता है। छाया ने कहा कि चीन क्वाड को अपने खिलाफ एक प्रयास के रूप में देखता है, और ऐसे में, अमेरिका को ईरान पर दबाव बनाने के लिए चीन की मदद की आवश्यकता है। इसलिए, यह संदेहजनक लगता है कि क्वाड को उस हद तक पुनर्जीवित किया जा सकेगा जितना भारत चाहता है।

इसके विपरीत, उदयपुर स्थित उसनास फाउंडेशन थिंक टैंक (Usanas Foundation Think Tank) की रिसर्च एसोसिएट रुचिका शर्मा (Ruchika Sharma) ने क्वाड की प्रभावशीलता के बारे में कुछ हद तक सकारात्मक रुख अपनाया। शर्मा ने कहा कि आगामी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए विदेश मंत्री रुबियो का नई दिल्ली दौरा कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, खासकर पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास अस्थिरता से जुड़ी ऊर्जा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर। उन्होंने यह भी बताया कि रुबियो द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका पाकिस्तान (Pakistan) के करीब आता दिख रहा है। गौरतलब है कि क्वाड की बैठक राष्ट्रपति ट्रंप की चीन यात्रा के बाद हो रही है, जिसे व्यापक रूप से प्रतीकात्मक माना जा रहा है, ताइवान (Taiwan) पर संभावित चीनी आक्रमण की बढ़ती आशंकाओं और ताइपे (Taipei) को अमेरिकी हथियारों की बिक्री पर हाल ही में लगी रोक के मद्देनजर।

कुल मिलाकर, नई दिल्ली में होने वाली आगामी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक एक सामान्य कूटनीतिक बैठक से कहीं अधिक है। यह बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक के निरंतर संस्थागत सुदृढ़ीकरण (Institutional Strengthening) का प्रतिनिधित्व करती है, और भारत के लिए वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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