ISI की नई साजिश: आतंकियों को राजनीतिक पार्टियों में 'घुसपैठ' का फरमान, खुफिया एजेंसियों का बड़ा खुलासा

ISI ki Nayi Sajish: Rajnitik Parties mein Aatankiyon ki Ghuspaith

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के नेटवर्क को बचाने के लिए पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) एक नई और खतरनाक रणनीति पर काम कर रही है। खुफिया एजेंसियों ने ISI की नई साजिश का खुलासा किया है, जिसके तहत उसने अपने 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (OGWs) को राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों में 'घुसपैठ' करने का फरमान जारी किया है। यह खुलासा श्रीनगर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए OGWs से पूछताछ के दौरान हुआ, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। इस रणनीति का मुख्य मकसद आतंकवाद के इन हमदर्दों को वैध राजनीति का हिस्सा दिखाकर सुरक्षा बलों की निगरानी और कार्रवाई से बचाना है। यह खबर देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह आतंकियों की राजनीतिक घुसपैठ को दर्शाता है, जिससे आतंकवाद विरोधी अभियानों में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के मुताबिक, जांच में पता चला है कि इनमें से कुछ OGWs पहले से ही राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों के सदस्य थे। ISI की योजना अपने नेटवर्क को राजनीतिक गतिविधियों की आड़ में छिपाने की है, ताकि किसी भी कार्रवाई के दौरान उनके कार्यकर्ताओं को सुरक्षा एजेंसियों के संदेह से बचाया जा सके। ये OGWs वही लोग हैं जो आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक (logistics) मदद, भर्ती और फंडिंग (funding) मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि पहले संदिग्ध लोग पुलिस से बचने के लिए वोटर आईडी (Voter ID) कार्ड और फिर आधार कार्ड (Aadhaar Card) का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब वे राजनीतिक दलों की सदस्यता को सुरक्षा कवच की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि ऐसी कोशिशें अक्सर नाकाम रहती हैं और सुरक्षा एजेंसियां पूरी जांच के बाद ही कार्रवाई करती हैं।

बदलती रणनीति और FATF का दबाव

ISI की योजना केवल राजनीतिक घुसपैठ तक सीमित नहीं है। एक अधिकारी के अनुसार, ISI अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए 90 के दशक के उन आतंकी संगठनों को भी सक्रिय करने की कोशिश कर रही है, जो लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं। इनमें अल-उमर मुजाहिदीन (Al-Umar Mujahideen), अल-बद्र (Al-Badr) और तहरीक-उल-मुजाहिदीन (Tehrik-ul-Mujahideen) जैसे संगठन शामिल हैं। पाकिस्तान ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को स्थानीय आंदोलन के रूप में पेश किया जा सके और एक झूठा नैरेटिव (narrative) गढ़ा जा सके।

पाकिस्तान पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की लगातार नजर बनी हुई है, जो मनी लॉन्ड्रिंग (money laundering) और आतंकवाद के वित्तपोषण (terrorist financing) पर निगरानी रखती है। ISI ऐसे तरीके तलाश रही है, जिनसे आतंकी नेटवर्क सक्रिय भी रहें और पाकिस्तान की प्रत्यक्ष संलिप्तता भी उजागर न हो। इसी कारण पुराने स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल करने की रणनीति अपनाई जा रही है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारियों ने ISI की इस रणनीति को उसकी "हताशा" बताया है। उनका कहना है कि सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों के कारण पारंपरिक आतंकी संगठनों पर भारी दबाव है और नए छद्म संगठनों (proxy organizations) के लिए स्थानीय समर्थन भी काफी कम हो चुका है। ऐसे में ISI नई पीढ़ी को प्रभावित कर नेटवर्क को राजनीतिक सुरक्षा देने की कोशिश में है।

सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती और आगे की राह

इस नई रणनीति से सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक जटिल चुनौती खड़ी हो गई है। राजनीतिक दलों की सामान्य सदस्यता किसी व्यक्ति को जांच या कानूनी कार्रवाई से नहीं बचा सकती, और जांच एजेंसियां अपने स्तर पर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करती हैं। ऐसे मामलों में किसी भी राजनीतिक नेतृत्व द्वारा कभी हस्तक्षेप नहीं किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इन निष्क्रिय संगठनों के नाम फिर से सामने आने पर भी कड़ी नजर रख रही हैं, क्योंकि इन संगठनों का शीर्ष नेतृत्व अब भी पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में सुरक्षित ठिकानों पर मौजूद है।

फिर से सक्रिय किए जा रहे इन नेटवर्कों का इस्तेमाल दुष्प्रचार फैलाने, फंडिंग जुटाने और युवाओं में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि केंद्रीय खुफिया एजेंसियां इन गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और OGWs द्वारा तैयार किए जा रहे लॉजिस्टिक नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में काम कर रही हैं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए लगातार अपनी रणनीति बदल रहा है, लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी मुस्तैदी के साथ इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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