NSE IPO: 10 साल बाद दाखिल हुआ DRHP, ₹30,000 करोड़ का हो सकता है इश्यू; SBI बेचेगा सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

NSE IPO DRHP फाइलिंग के बाद शेयर बाजार में उत्साह, ₹30000 करोड़ का इश्यू

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange - NSE), ने आखिरकार 10 साल के लंबे इंतजार के बाद अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (Initial Public Offering - IPO) की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में, NSE ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के पास 607 पेज का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (Draft Red Herring Prospectus - DRHP) दाखिल कर दिया है। यह खबर भारतीय पूंजी बाजार (Capital Market) के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है, जो निवेशकों को देश के अग्रणी स्टॉक एक्सचेंज में सीधा निवेश करने का अवसर प्रदान करेगी। अनुमान है कि यह IPO लगभग 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है, जो इसे 2024 में Hyundai Motor India के 27,000 करोड़ रुपये के IPO के बाद सबसे बड़ा IPO बना सकता है।

NSE IPO: 10 साल का लंबा इंतजार और ₹30,000 करोड़ का इश्यू

NSE का यह बहुप्रतीक्षित IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (Offer For Sale - OFS) होगा। इसका मतलब है कि एक्सचेंज को इस इश्यू से कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। प्रस्तावित योजना के तहत, विभिन्न शेयरधारक मिलकर NSE की लगभग 6% इक्विटी (Equity) बाजार में उतारेंगे। अनलिस्टेड (Unlisted) मार्केट में NSE का मौजूदा वैल्यूएशन (Valuation) करीब 5 लाख करोड़ रुपये आंका जा रहा है, जिसके आधार पर ही 30,000 करोड़ रुपये के IPO आकार का अनुमान लगाया गया है। इस IPO में एक दिलचस्प पहलू यह है कि NSE की प्रमुख शेयरधारक और देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India - LIC) अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रही है।

ड्राफ्ट दस्तावेज के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India - SBI) इस OFS में सबसे बड़ा विक्रेता होगा, जो 2.47 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है। इसके अलावा, मॉरीशस स्थित MS Strategic (Mauritius) Limited 1.60 करोड़ शेयर और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड (Canada Pension Plan Investment Board) लगभग 1.19 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगा। अन्य प्रमुख विक्रेताओं में Aranda Investments (Mauritius) Pte. Ltd., बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन (Stock Holding Corporation) शामिल हैं, जो प्रत्येक करीब 1.1 करोड़ शेयर तक बेच सकते हैं।

सरकारी बीमा कंपनियों की भी हिस्सेदारी बिक्री

इस मेगा IPO में कई सरकारी बीमा कंपनियां भी अपनी हिस्सेदारी घटाएंगी। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (General Insurance Corporation of India - GIC Re) लगभग 1.06 करोड़ शेयर बेचेगी, जबकि द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (The New India Assurance Company Limited) करीब 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (National Insurance Company Limited) और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (United India Insurance Company Limited) भी प्रत्येक लगभग 60-60 लाख शेयर बेचने की तैयारी में हैं। IPO फाइलिंग से पहले, NSE की IPO कमेटी ने प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए बैठक की थी, और NSE के बोर्ड ने DRHP को पहले ही मंजूरी दे दी थी। NSE के शेयर केवल BSE पर लिस्ट होंगे, ठीक वैसे ही जैसे BSE के शेयर केवल NSE पर लिस्टेड हैं।

NSE की लिस्टिंग करीब 10 साल से अटकी हुई थी, जिसकी मुख्य वजह को-लोकेशन (Co-location) विवाद था। इस विवाद में कुछ ब्रोकरों को ट्रेडिंग सिस्टम तक दूसरों के मुकाबले तेज और प्राथमिक पहुंच मिलने के आरोप लगे थे। NSE ने 2016 में करीब 10,000 करोड़ रुपये के OFS के लिए पहली बार ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे, लेकिन SEBI ने गवर्नेंस (Governance) संबंधी चिंताओं के चलते प्रस्ताव वापस लेने की सलाह दी थी। इसके बाद NSE ने अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं और अनुपालन (Compliance) में कई सुधार किए। SEBI ने पहले ही एक्सचेंज को 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (No Objection Certificate - NOC) जारी कर दिया था, जिससे लिस्टिंग का रास्ता साफ हो गया। यह मंजूरी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसे को-लोकेशन मामले से जुड़े कुछ पुराने मामलों के अंतिम निपटारे से अलग रखा गया था।

यह घटना भारतीय पूंजी बाजार की बढ़ती परिपक्वता (Maturity) और गहराई को दर्शाती है। NSE का IPO न केवल निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर है, बल्कि यह देश के वित्तीय बाजारों में पारदर्शिता (Transparency) और विश्वास को भी बढ़ाएगा। हालांकि, को-लोकेशन मामले में सेटलमेंट (Settlement) की कोशिशें अभी भी जारी हैं; NSE ने जून 2025 में 1,387.39 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा था, जबकि SEBI की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (High-Powered Advisory Committee - HPAC) ने करीब 1,880 करोड़ रुपये के सेटलमेंट की सिफारिश की थी। यह मामला अभी भी SEBI के विचाराधीन है। इस IPO के माध्यम से, NSE भारतीय अर्थव्यवस्था में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को और मजबूत करने के लिए तैयार है, जो आगे चलकर अन्य बड़ी अनलिस्टेड कंपनियों के लिए भी IPO लाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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