नई दिल्ली: भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY), देश में रोजगार सृजन और औपचारिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। इसी कड़ी में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आगामी 19 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक विशेष कार्यक्रम में इस योजना के अंतर्गत लगभग 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित करेंगे। यह भव्य आयोजन सायं 5 बजे होगा, जो देश के युवाओं और नियोक्ताओं के लिए एक नई उम्मीद लेकर आएगा। यह राशि वितरण योजना के कार्यान्वयन में एक बड़ी उपलब्धि है और रोजगार-आधारित विकास (employment-based growth) के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह योजना भारत सरकार की एक प्रमुख रोजगार-संबंधी प्रोत्साहन योजना (flagship employment-related incentive scheme) है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य रोजगार सृजन में तेजी लाना, रोजगार को औपचारिक बनाना (formalize employment), रोजगार क्षमता बढ़ाना और सभी सेक्टरों (sectors) में सामाजिक सुरक्षा कवरेज (social security coverage) का विस्तार करना है। आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के माध्यम से देश भर में पहले ही 15 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित किए जा चुके हैं, जो इसके प्रभावी कार्यान्वयन का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना: युवाओं और नियोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन
पीएम-वीबीआरवाई का मूल उद्देश्य श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को औपचारिक अर्थव्यवस्था (formal economy) में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत, पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारियों को 15,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है, जिससे उन्हें कार्यबल (workforce) में शामिल होने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। यह उन युवाओं के लिए एक बड़ा संबल है जो पहली बार नौकरी की तलाश में होते हैं।
वहीं, अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को भी लाभ मिलता है। उन्हें प्रति अतिरिक्त कर्मचारी प्रति माह 3,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है, जो सतत रोजगार सृजन (sustainable job creation) को बढ़ावा देता है। आर्थिक विकास को गति देने में विनिर्माण क्षेत्र (manufacturing sector) के रणनीतिक महत्व को देखते हुए, इस क्षेत्र के नियोक्ताओं को चार वर्षों की अवधि के लिए प्रोत्साहन प्राप्त करने की पात्रता है। अन्य सभी सेक्टरों के नियोक्ता दो वर्षों के लिए इस प्रोत्साहन का लाभ उठा सकते हैं। यह नीतिगत निर्णय विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति का हिस्सा है।
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यह योजना रोजगार-आधारित विकास के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि भारत की आर्थिक प्रगति के लाभ उसके युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण औपचारिक रोजगार के अवसरों में परिवर्तित हों। प्रधानमंत्री- विकसित भारत रोजगार योजना 1 अगस्त, 2025 से प्रभावी हुई थी। 99,446 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय (total outlay) वाली इस योजना का लक्ष्य दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करने के लिए प्रोत्साहन देना है। इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थी पहली बार कार्यबल में प्रवेश करेंगे, जो देश की युवा शक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने का एक बड़ा प्रयास है।
सामाजिक सुरक्षा और विकसित भारत का लक्ष्य
कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों की सहायता करने के जरिये, यह योजना औपचारिक रोजगार (formal employment) के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा कवरेज (social security coverage) को सुदृढ़ करने और 'विकसित भारत' (Viksit Bharat) के व्यापक विजन (vision) को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रोत्साहन राशि का यह वितरण न केवल तात्कालिक राहत प्रदान करेगा, बल्कि दीर्घकाल में देश की श्रम शक्ति को अधिक संगठित और सुरक्षित बनाने में भी सहायक होगा। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को गति देने और समावेशी विकास (inclusive growth) सुनिश्चित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना देश के श्रम बाजार (labour market) को बदलने और युवाओं के लिए उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक साहसिक और दूरदर्शी पहल है। 19 जून को होने वाला प्रोत्साहन राशि का वितरण इस योजना की सफलता और सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों का एक जीवंत प्रमाण है, जिससे देश भर में रोजगार के अवसरों की एक नई लहर आने की उम्मीद है।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.