डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दो टूक: ‘बात करनी है तो फोन करें’, नाटो से भी नाखुश अमेरिका?

डोनाल्ड ट्रंप ईरान को फोन करने की सलाह देते हुए और नाटो पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक अप्रत्याशित और सीधा संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है तो उसे अमेरिकी अधिकारियों को फोन करना चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दो टूक देते हुए यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और कूटनीतिक प्रयास विफल होते दिख रहे हैं। ट्रंप ने साथ ही उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के प्रति भी अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है, जिससे वैश्विक राजनीति में नई हलचल मच गई है।

ट्रंप का ईरान को सीधा संदेश: 'बात करनी है तो फोन करें'

रविवार को एक साक्षात्कार (interview) में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अमेरिकी और ईरानी अधिकारी सीधे फोन पर बात कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल (delegation) भेजने की लंबी प्रक्रिया को अनावश्यक बताया, जिसमें 17 घंटे की उड़ान का समय लगता। ट्रंप ने कहा, "हमारे पास सभी विकल्प मौजूद हैं। अगर वे (ईरान) बात करना चाहते हैं, तो वे हमारे पास आ सकते हैं, या वे हमें फोन कर सकते हैं।" यह बयान तब आया जब तेहरान के शीर्ष राजनयिक पाकिस्तान से रवाना हो गए थे, जिसके बाद वार्ता विफल होती दिखी। ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने अपने दूतों को इस्लामाबाद की यात्रा न करने का निर्देश दिया था, जिससे स्पष्ट होता है कि वे सीधी और उच्च-स्तरीय बातचीत के पक्ष में हैं।

नाटो से अमेरिका की नाराजगी और संभावित अलगाव की चेतावनी

ईरान पर अपनी टिप्पणियों के अलावा, डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO) के प्रति अपनी गंभीर नाराजगी भी व्यक्त की। उन्होंने इस सैन्य गठबंधन (military alliance) से "बहुत, बहुत निराश" होने की बात कही। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका इस गठबंधन से अलग होने पर विचार कर सकता है। उनकी नाराजगी का मुख्य कारण यह है कि सदस्य देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ईरान द्वारा प्रभावी ढंग से बंद करने के बाद अमेरिका की मदद की अपील को नजरअंदाज कर दिया। ट्रंप ने कहा, "हम कई वर्षों से उनकी मदद कर रहे हैं, खरबों डॉलर (trillions of dollars) खर्च कर रहे हैं, और जब हमें उनकी मदद चाहिए थी तो वे मौजूद नहीं थे, इसलिए हमें यह बात याद रखनी होगी।" यह बयान वैश्विक सुरक्षा समझौतों (global security agreements) पर अमेरिका के रुख में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।

वैश्विक भू-राजनीति पर ट्रंप के बयानों का असर

राष्ट्रपति ट्रंप के ये बयान वैश्विक भू-राजनीति (geopolitics) में एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत देते हैं। ईरान के साथ सीधे फोन पर बातचीत का सुझाव पारंपरिक कूटनीतिक प्रोटोकॉल (diplomatic protocol) से हटकर एक नया दृष्टिकोण है, जो तनाव कम करने की दिशा में एक त्वरित लेकिन जोखिम भरा कदम हो सकता है। यह दिखाता है कि ट्रंप प्रशासन (Trump administration) मध्य पूर्व (Middle East) में गतिरोध को तोड़ने के लिए अप्रत्यक्ष माध्यमों के बजाय सीधे संवाद को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, ईरान की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।

दूसरी ओर, नाटो से संभावित अलगाव की चेतावनी अमेरिका की विदेश नीति (foreign policy) में 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) के सिद्धांत को और मजबूत करती है। यह बयान वैश्विक गठबंधन (global alliances) और साझा सुरक्षा जिम्मेदारियों (shared security responsibilities) पर सवाल उठाता है। यदि अमेरिका वास्तव में नाटो से अलग होने पर विचार करता है, तो इसका यूरोप (Europe) और दुनिया भर में सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा और दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। यह रूस (Russia) और चीन (China) जैसे प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है और पश्चिमी देशों की एकता को कमजोर कर सकता है। इन दोनों बयानों से यह स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन अपनी शर्तों पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों को फिर से परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है, जिसके परिणाम आने वाले समय में देखने को मिलेंगे।

कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रंप के ये नवीनतम बयान ईरान के साथ सीधे टकराव को टालने और वैश्विक सहयोगियों के साथ अपनी भागीदारी पर पुनर्विचार करने की उनकी इच्छा को दर्शाते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान इस 'फोन कॉल' के प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया देता है और नाटो सदस्य देश अमेरिका की नाराजगी को कैसे दूर करते हैं। वैश्विक राजनीतिक मंच पर अगले कुछ दिन या सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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