ईरान में अमेरिकी एयरमैन का हैरतअंगेज रेस्क्यू: राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर ऐसे बचाई गई जान

ईरान में फंसे अमेरिकी एयरमैन का रेस्क्यू ऑपरेशन, F-15E जेट, यूएस स्पेशल फोर्सेज

ईरान में फंसे अमेरिकी एयरमैन को कैसे बचाया गया? यह सवाल तब उठा जब अमेरिकी फाइटर जेट पर हमले के बाद एक वेपन्स ऑफिसर ईरान की धरती पर दो दिन तक फंसा रहा। इस दौरान, अमेरिकी सेना ने रेडियो पर सिर्फ तीन शब्द सुने, जिसने आखिरकार उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाने में मदद की। यह एक बेहद जोखिम भरा सैन्य ऑपरेशन था, जिसे तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सीधे आदेश पर अंजाम दिया गया। यह घटना न केवल अमेरिकी सेना की असाधारण क्षमताओं को दर्शाती है, बल्कि दुश्मन के इलाके में बचाव अभियानों की जटिलताओं और कूटनीतिक दांव-पेच को भी उजागर करती है।

ईरान में अमेरिकी एयरमैन का हैरतअंगेज रेस्क्यू ऑपरेशन

लगभग 48 घंटे पहले की घटना है, जब ईरान ने एक अमेरिकी F-15E ईगल फाइटर जेट को मार गिराया था। इस जेट में सवार दो क्रू मेंबर्स में से एक पायलट को तो जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स ऑफिसर (Airman) ईरान के दुर्गम पहाड़ी इलाके में फंस गया। यह अमेरिकी सेना के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया, जबकि ईरान उसे पकड़कर जंग में बढ़त हासिल करना चाहता था। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया था कि वे अपने किसी भी वॉर ऑफिसर को दुश्मन के इलाके में अकेला नहीं छोड़ेंगे।

फंसा हुआ वेपन्स ऑफिसर, जिसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के पहाड़ी इलाके में ईरानी सुरक्षाबलों से बचता रहा। उसने अपनी SERE (Survival, Evasion, Resistance, Escape) ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए खुद को छिपाए रखा। एक दिन से भी ज्यादा समय तक दुश्मन के इलाके में अकेले रहने के बावजूद, उसने अमेरिकी एजेंसियों से संपर्क साधने की कोशिश की और अपनी लोकेशन के बारे में जानकारी दी।

इस बीच, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) हरकत में आई। सीआईए ने एक सोची-समझी चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर अपने एजेंटों के माध्यम से गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना ने अपने पायलट को पहले ही ढूंढ लिया है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरानी सेना की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान, सीआईए ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल कर एयरमैन की सही लोकेशन का पता लगा लिया। यह लोकेशन तुरंत पेंटागन (Pentagon), अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस (White House) को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया।

मिशन को अंजाम देने के लिए स्पेशल फोर्सेज (Special Forces) की एक विशेष कमांडो यूनिट को भेजा गया। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान आसमान से भारी फायर कवर (Fire Cover) दिया गया और ईरानी बलों को रोकने के लिए एयरस्ट्राइक (Airstrike) भी की गईं। अमेरिकी बलों ने घायल पायलट तक पहुंचने के लिए भारी गोलाबारी की। रेस्क्यू टीम सुरक्षित रूप से सैनिक तक पहुंची और उसे हेलीकॉप्टर तक लेकर आई, जिसके बाद उसे एयरलिफ्ट (Airlift) कर सुरक्षित ईरान से बाहर निकाल लिया गया। इस रेस्क्यू के दौरान अमेरिका को अपने दो C-130 विमानों का नुकसान झेलना पड़ा, जिन्हें ईरान के हाथ लगने से बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने खुद ही उड़ा दिया।

तीन शब्दों के संदेश ने बचाई जान

इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का सबसे हैरतअंगेज पहलू वह तीन शब्दों का संदेश था, जिसने लापता एयरमैन की लोकेशन का पता लगाने में मदद की। राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया को बताया कि F-15E से इजेक्ट होने के बाद वेपन्स ऑफिसर ने रेडियो पर एक छोटा और असामान्य संदेश भेजा था। ट्रंप के अनुसार, उसने कहा था, "पावर बी टू गॉड" (Power be to God)। हालांकि, रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़े एक अधिकारी और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने बाद में पुष्टि की कि सटीक वाक्यांश "गॉड इज़ गुड" (God is good) था।

शुरुआत में, अमेरिकी सेना ने इस संदेश पर भरोसा नहीं किया और इसे ईरानी चाल समझकर दरकिनार कर दिया। लेकिन बाद में, सेना के अधिकारियों ने बताया कि लापता एयरमैन बहुत धार्मिक था, इसलिए ऐसा कहना उसके लिए स्वाभाविक था। संदेश को वेरिफाई करने के बाद ही उसे ढूंढने का अभियान शुरू हुआ। एयरमैन के पास एक कम्युनिकेशन डिवाइस (Communication Device), ट्रैकिंग बीकन (Tracking Beacon) और एक हैंडगन (Handgun) था। वह लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा और एक बार तो 7,000 फुट ऊंची रिजलाइन (Ridgeline) पर भी चढ़ गया ताकि पीछा करने वाले बलों से आगे रह सके। सीआईए ने आखिरकार उसके कम्युनिकेशन डिवाइस के जरिए उसकी छिपने की जगह का पता लगाया।

यह सफल रेस्क्यू ऑपरेशन अमेरिकी सेना की क्षमताओं और राष्ट्रपति ट्रंप के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है कि वे अपने सैनिकों को दुश्मन के इलाके में अकेला नहीं छोड़ते। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि मुश्किल परिस्थितियों में भी, सटीक खुफिया जानकारी और त्वरित सैन्य कार्रवाई से असंभव लगने वाले मिशन को भी अंजाम दिया जा सकता है। यह ऑपरेशन भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है, विशेषकर उन स्थितियों में जहां शत्रुतापूर्ण वातावरण में सैनिकों को बचाना होता है। घायल एयरमैन को इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया है, और ट्रंप ने पुष्टि की है कि वह जल्द ही ठीक हो जाएगा।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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