भारत का सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र: आत्मनिर्भरता की ओर महत्वपूर्ण कार्यशाला
नई दिल्ली: भारत के तेजी से बढ़ते तकनीकी परिदृश्य में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR) ने 27 फरवरी 2026 को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। नई दिल्ली के पूसा परिसर स्थित विवेकानंद हॉल में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य विषय 'भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र (India's Semiconductor Ecosystem) को सुदृढ़ करना: नीतियां, चुनौतियां और अवसर' था। इस आयोजन ने अनुसंधान एवं विकास संस्थान (R&D Institutions), सरकार, शिक्षा और उद्योग जगत के विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाकर देश के सेमीकंडक्टर (semiconductor) क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए रणनीतिक चर्चा को बढ़ावा दिया।
यह कार्यशाला सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर द्वारा हाल ही में किए गए 'भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र की तुलना में वैश्विक सेमीकंडक्टर नीतियों और रणनीतियों का तुलनात्मक विश्लेषण' पर आधारित एक अध्ययन को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इसका लक्ष्य भारत के सेमीकंडक्टर परिदृश्य का आकलन करना, चुनौतियों की पहचान करना, सहयोग के अवसरों को खोजना, वैश्विक पद्धतियों से सीखना और व्यावहारिक सिफारिशें विकसित करना था ताकि भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत किया जा सके।
कार्यशाला के उद्देश्य और प्रमुख बिंदु
कार्यशाला में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission), बीआईटीएस पिलानी (BITS Pilani), नीति आयोग (NITI Aayog), डीआरडीओ (DRDO) की सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL), आईआईटी जोधपुर (IIT Jodhpur), आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi), इंटेल इंडिया (Intel India), लैम रिसर्च (Lam Research) सहित कई प्रमुख संस्थानों और कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इन प्रतिभागियों ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (semiconductor ecosystem) को मजबूत करने के लिए अपने मूल्यवान विचार साझा किए।
उद्घाटन सत्र में, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वानी रायसम ने विज्ञान संचार (science communication) और नीति अनुसंधान (policy research) में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला और संवाद के महत्व पर जोर दिया। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार ने भारत की सेमीकंडक्टर संबंधी विरोधाभासी स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया - मजबूत वैश्विक डिजाइन नेतृत्व के बावजूद 95% आयात पर निर्भरता। उन्होंने 2030 तक भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक सेमीकंडक्टर हब (global semiconductor hub) के रूप में स्थापित करने के लिए साक्ष्य-आधारित नीति सुधारों, आईएसएम 2.0 (ISM 2.0) नवाचार प्रोत्साहन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता (strategic self-reliance) पर बल दिया।
बीआईटीएस पिलानी के ग्रुप वाइस चांसलर प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव ने मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता (national competitiveness) और तकनीकी आत्मनिर्भरता (technological self-reliance) के लिए सेमीकंडक्टरों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने उन्नत फाउंड्री (advanced foundries) की मेजबानी करने के बजाय स्वदेशी प्रौद्योगिकी (indigenous technology), मिशन-मोड कार्यक्रमों और डीप-टेक स्टार्टअप (deep-tech startups) पर केंद्रित रणनीति अपनाने की वकालत की।
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तकनीकी सत्रों में गहन चर्चा
कार्यशाला में तीन विषयगत तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया:
पहला सत्र 'अनुसंधान एवं विकास और नवाचार, डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र' पर केंद्रित था। वक्ताओं ने आईएसएम 2.0 से पायलट फैब्स (pilot fabs), विशिष्ट रक्षा सेमीकंडक्टर (defense semiconductors), स्वदेशी सामग्री/उपकरणों, डिजाइन-आधारित अनुसंधान एवं विकास, फोटोनिक्स/एआई फोकस, पर्यावरण-जिम्मेदार उत्पादन, विविध विनिर्माण (diverse manufacturing) और वैश्विक साझेदारी (global partnerships) के माध्यम से शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को पाटने का आग्रह किया।
द्वितीय सत्र 'कुशल कार्यबल और प्रतिभा विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र' पर था, जिसकी अध्यक्षता इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के निदेशक (प्रौद्योगिकी) डॉ. मनीष के हुडा ने की। इस सत्र में संतुलित डिजाइन-विनिर्माण विकास (design-manufacturing development), सीएमओएस-केंद्रित शैक्षणिक कार्यक्रमों (CMOS-centric academic programs), संरचित कौशल विकास (structured skill development) और उद्योग जगत से सहयोग पर जोर दिया गया।
तृतीय सत्र का मुख्य विषय 'नीति, शासन और संस्थागत ढांचा' रहा, जिसकी अध्यक्षता अमृता विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर प्रोफेसर सुजीत भट्टाचार्य ने की। इस सत्र में वैश्विक नीति मॉडलों की तुलना की गई, एकीकृत शासन (integrated governance) और एक राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र (national research center) की आवश्यकता पर बल दिया गया। वक्ताओं ने एआई-चिप स्टार्टअप (AI-chip startups) के अवसरों, सेमीकंडक्टर कूटनीति (semiconductor diplomacy), दुर्लभ खनिजों तक पहुंच और आपूर्ति शृंखला (supply chain) में अनुकूलन पर भी चर्चा की।
विशेषज्ञों के विचार और भविष्य की राह
'रणनीतिक मार्ग: भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य के लिए एक रोडमैप' पर एक पैनल चर्चा और समापन सत्र के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। भारतीय विज्ञान संस्थान (IISC, बेंगलुरु) के प्रोफेसर नवकांत भट की अध्यक्षता में विशेषज्ञों ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 1.0 और 2.0) के माध्यम से भारत सरकार की निरंतर प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने अगले चरण में बेहतर क्रियान्वयन, नवाचार (innovation) और विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया। उद्योग जगत के दृष्टिकोण ने शिक्षा-उद्योग सहयोग (academia-industry collaboration) के माध्यम से उन्नत विनिर्माण क्षमताओं (advanced manufacturing capabilities) और संरचित कार्यबल (structured workforce) के विकास पर बल दिया।
वक्ताओं ने स्वदेशी एनालॉग (analog), सेंसर (sensors) और एप्लीकेशन-विशिष्ट उत्पादों (application-specific products) में भारत की ताकत पर जोर देते हुए, विशिष्ट सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में उच्च विशिष्ट वैज्ञानिक प्रतिभा (scientific talent) की तत्काल आवश्यकता को भी रेखांकित किया। चिप-टु-चिप-लेस आर्किटेक्चर (chip-to-chip-less architecture) और क्वांटम-इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर सिस्टम (quantum-integrated semiconductor systems) जैसे उभरते क्षेत्रों को अभूतपूर्व प्रगति के अवसरों के रूप में पहचाना गया। कार्यशाला के समापन पर, डॉ. विपिन कुमार और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. चारू वर्मा ने अपने विचार साझा किए। विभिन्न सत्रों में हुई चर्चाओं ने सामूहिक रूप से वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला (global semiconductor value chain) में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए अनुसंधान एवं विकास, डिजाइन, विनिर्माण, कौशल और नीतिगत समर्थन में समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। इस कार्यशाला ने साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुझाव प्रदान करने और रणनीतिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (S&T) डोमेन पर बहु-हितधारक संवाद को सुविधाजनक बनाने में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की भूमिका को भी प्रभावी ढंग से दर्शाया।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.