1991 का वो 'RBI सीक्रेट': जब 40,000 किलो सोना देश से बाहर गया और भारत की आर्थिक दिशा बदल दी

1991 भारत आर्थिक संकट, आरबीआई सोना गिरवी

आज से तीन दशक पहले, 1991 में भारत एक ऐसे आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ा था, जहाँ देश को दिवालिया होने से बचाने के लिए एक 'RBI सीक्रेट' ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। इस दौरान देश का लगभग 47,000 किलो सोना चुपचाप भारत से बाहर भेज दिया गया था। यह सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि भारत की नई आर्थिक शुरुआत का टर्निंग पॉइंट (Turning Point) साबित हुआ, जिसने आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था (Economy) को हमेशा के लिए बदल दिया। यह घटना आज भी प्रासंगिक है, खासकर तब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने हाल ही में अनावश्यक सोने की खरीद से बचने की अपील की है।

1991 का वो आर्थिक संकट और RBI का 'सीक्रेट' कदम

1990-91 तक, भारत भारी कर्ज, राजनीतिक अस्थिरता (Political Instability) और विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) की गंभीर कमी से जूझ रहा था। देश के पास सिर्फ एक हफ्ते का आयात (Import) करने लायक विदेशी मुद्रा बची थी। इसी दौरान खाड़ी युद्ध (Gulf War) छिड़ गया, जिससे तेल की कीमतें (Oil Prices) आसमान छू गईं और विदेशों में काम कर रहे भारतीयों से आने वाला पैसा (Remittances) भी कम हो गया। स्थिति इतनी विकट थी कि भारत के पास सिर्फ कुछ दिनों तक जरूरी सामान आयात करने लायक डॉलर (Dollars) बचे थे। विदेशी एजेंसियों ने भारत की क्रेडिट रेटिंग (Credit Rating) घटा दी और दुनिया के बैंक भारत को कर्ज देने से हिचकने लगे।

परिस्थिति इतनी विकट थी कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और तत्कालीन सरकार ने देश को डिफॉल्ट (Default) होने से बचाने के लिए एक अभूतपूर्व निर्णय लिया: देश का सोना गिरवी रखकर विदेशी बैंकों से कर्ज लेना। RBI ने करीब 46.91 टन सोना गुप्त रूप से इंग्लैंड (England) भेजा और इसके बदले लगभग 405 मिलियन डॉलर (Million Dollars) जुटाए गए। इससे पहले सरकार ने 20 टन जब्त सोना बेचकर 215 मिलियन डॉलर भी जुटाए थे।

जुलाई 1991 में, मुंबई के RBI वॉल्ट (Vault) से कड़ी सुरक्षा के बीच सोना ट्रकों में भरकर सांता क्रूज़ एयरपोर्ट (Santa Cruz Airport), जो अब मुंबई एयरपोर्ट (Mumbai Airport) के नाम से जाना जाता है, पहुँचाया गया और फिर कार्गो विमानों (Cargo Planes) से विदेश भेजा गया। यह पूरा ऑपरेशन (Operation) बेहद गोपनीय रखा गया था, यहाँ तक कि कस्टम अधिकारियों (Custom Officials) को भी विशेष अनुमति देनी पड़ी। लेकिन 8 जुलाई 1991 को एक अंग्रेजी अखबार में “Secret Sale of Gold by RBI Again” हेडलाइन (Headline) के साथ यह खबर छप गई और देशभर में हड़कंप मच गया। भारत में सोने को सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और भावनाओं से जुड़ा माना जाता है। इसलिए जब लोगों को पता चला कि देश अपना सोना विदेश भेज रहा है, तो इसे आर्थिक मजबूरी के साथ-साथ राष्ट्रीय अपमान (National Humiliation) के रूप में भी देखा गया। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर यह कदम नहीं उठाया जाता, तो भारत विदेशी भुगतान नहीं कर पाता और आर्थिक रूप से दिवालिया हो सकता था।

आर्थिक सुधारों की नींव और सोने की वापसी

इसी संकट के बीच, 21 जून 1991 को पीवी नरसिम्हा राव (P.V. Narasimha Rao) की सरकार बनी और तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) ने भारत में बड़े आर्थिक सुधारों (Economic Reforms) की नींव रखी। भारत की अर्थव्यवस्था को खोलने, विदेशी निवेश (Foreign Investment) बढ़ाने और कुख्यात 'लाइसेंस राज' (License Raj) खत्म करने जैसे साहसिक फैसले लिए गए। इस संकट ने भारत में आर्थिक उदारीकरण (Economic Liberalization) की शुरुआत की, जिसने आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक तस्वीर बदल दी।

भारत ने नवंबर 1991 तक सोने के बदले लिया गया कर्ज चुका दिया था। हालांकि, सोना लंबे समय तक विदेशों के वॉल्ट (Vaults) में ही रखा गया। बाद के वर्षों में भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत होती गई और RBI ने विदेशों में रखा काफी सोना वापस भारत लाना शुरू किया। मार्च 2026 तक RBI के पास करीब 880.5 टन सोना है, जिसकी कीमत 115 अरब डॉलर (Billion Dollars) से ज्यादा है। इसमें से लगभग 77% सोना अब भारत में ही सुरक्षित रखा गया है।

आज क्यों प्रासंगिक है 1991 का सबक?

आज एक बार फिर सोने की चर्चा जोर पकड़ रही है। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध और बढ़ती तेल कीमतों के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील की है। सरकार का तर्क है कि सोने का भारी आयात (Gold Import) भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) पर दबाव डालता है। भारत ने 2025-26 में करीब 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया, जो 1991 में सोना गिरवी रखकर जुटाई गई रकम से कई गुना ज्यादा है।

1991 का सोना संकट केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं था, बल्कि यह भारत के लिए आर्थिक सुधारों और उदारीकरण का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यह घटना हमें सिखाती है कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए दूरदर्शिता और साहसिक निर्णय कितने आवश्यक हैं। 1991 के उस 'RBI सीक्रेट' ऑपरेशन ने न केवल देश को तात्कालिक संकट से उबारा, बल्कि एक नए, खुले और अधिक गतिशील भारत की आर्थिक यात्रा का मार्ग भी प्रशस्त किया। यह आज भी एक शक्तिशाली अनुस्मारक है कि आर्थिक चुनौतियों का सामना कैसे किया जाए और उन्हें अवसरों में कैसे बदला जाए।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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