आर्टिफिशल इटेलिजेंस (AI) की बढ़ती चुनौती और पारंपरिक कारोबार पर मंडराते खतरों के बावजूद, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों ने अपने शेयरधारकों को दिल खोलकर भुगतान किया है। देश की शीर्ष 16 सूचीबद्ध IT कंपनियों ने निवेशकों पर लुटाया प्यार है, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिकॉर्ड 1.3 लाख करोड़ रुपये के लाभांश (dividend) और शेयर पुनर्खरीद (share buyback) की घोषणा की है। यह अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के कुल 95,400 करोड़ रुपये के भुगतान से 36.3 फीसदी अधिक है। यह पिछले 9 साल में आईटी उद्योग द्वारा शेयरधारकों को किए गए भुगतान में सबसे तेज वृद्धि है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब आईटी क्षेत्र को AI-आधारित बदलावों से जूझना पड़ रहा है, जिससे निवेशकों और बाजार में एक दिलचस्प विरोधाभास देखने को मिल रहा है।
आईटी कंपनियों का रिकॉर्ड भुगतान: एक विस्तृत विश्लेषण
यह रिकॉर्ड भुगतान वित्त वर्ष 2025 में देखी गई गिरावट के बिल्कुल विपरीत है, जब कंपनियों ने आय और मुनाफे में नरमी के चलते लाभांश देने के बजाय मुनाफे का ज्यादा हिस्सा अपने पास रखा था। हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में इन 16 कंपनियों का कुल शुद्ध मुनाफा (net profit) केवल 3.5 फीसदी बढ़ा, जो बीते 8 साल में सबसे धीमी वृद्धि है। इसी अवधि में उनकी कुल आय या शुद्ध बिक्री (net sales) 7.6 फीसदी बढ़ी। इस विरोधाभासी स्थिति में शेयरधारकों को इतना बड़ा भुगतान कई सवाल खड़े करता है।
इस भुगतान में वृद्धि का मुख्य कारण इन्फोसिस (Infosys) और विप्रो (Wipro) द्वारा की गई रिकॉर्ड शेयर पुनर्खरीद है। इन्फोसिस ने नवंबर में 18,000 करोड़ रुपये की अपनी अब तक की सबसे बड़ी शेयर पुनर्खरीद पूरी की, जबकि विप्रो ने 15,000 करोड़ रुपये की पुनर्खरीद की घोषणा की है। छोटी कंपनियों में साएंट (Cyient) ने भी 720 करोड़ रुपये की अपनी सबसे बड़ी शेयर पुनर्खरीद की घोषणा की है। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026 में आईटी उद्योग ने पुनर्खरीद पर 33,895 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की, जो वित्त वर्ष 2024 के बाद दूसरा सबसे ज्यादा आंकड़ा है। इसकी तुलना में, इक्विटी लाभांश भुगतान केवल 0.7 फीसदी बढ़कर 96,102 करोड़ रुपये रहा।
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हालांकि, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने इस प्रवृत्ति से अलग राह अपनाई है। ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक लाभांश देने वाली कंपनी टीसीएस ने वित्त वर्ष 2026 में अपने लाभांश भुगतान में 12.7 फीसदी की कटौती की है। कंपनी डेटा सेंटर (data center) और एआई कारोबार में निवेश करने की योजना बना रही है, जिसके लिए उसने वित्त वर्ष 2025 के 45,612 करोड़ रुपये से घटाकर 38,820 करोड़ रुपये का लाभांश दिया है। टीसीएस ने पिछले दो वित्त वर्ष में कोई शेयर पुनर्खरीद भी नहीं की है, जो भविष्य की तकनीक में निवेश पर उसके फोकस को दर्शाता है।
बाजार पूंजीकरण में गिरावट और विश्लेषकों की राय
बिज़नेस स्टैंडर्ड (Business Standard) के नमूने में शामिल 16 कंपनियों का भुगतान अनुपात (payout ratio) वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 102.2 फीसदी रहा, जो कुल शुद्ध मुनाफे (net profit) का 100 फीसदी से अधिक है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कुछ आईटी कंपनियों के शेयर भाव (share price) और बाजार पूंजीकरण (market capitalization) में गिरावट के कारण हुआ है। इक्विनॉमिक्स रिसर्च (Equinomics Research) के संस्थापक और सीईओ जी चोकालिंगम ने कहा, "आईटी उद्योग की वृद्धि में निरंतर बाधाओं के बावजूद, वित्त वर्ष 2026 में शेयरधारकों को भुगतान में तेज वृद्धि असल में कंपनियों की शेयर कीमतों में गिरावट के कारण बाजार पूंजीकरण में कमी को देखते हुए शेयरधारकों को प्रोत्साहित करने की रणनीति से प्रेरित लगती है।"
इन 16 आईटी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण वित्त वर्ष 2026 में 25.3 फीसदी घटा है, जो एक दशक से अधिक समय में उनका सबसे खराब वार्षिक प्रदर्शन है। मार्च 2025 के अंत में लगभग 32.2 लाख करोड़ रुपये से घटकर मार्च 2026 में यह करीब 24 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट बताती है कि शेयरधारकों को किए गए भुगतान में वृद्धि का कंपनियों के शेयर मूल्य पर बहुत कम या कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी (Kotak Institutional Equity) के विश्लेषकों का कहना है कि कुल तकनीकी खर्च (tech spending) में तेजी से वृद्धि के बावजूद, एआई खर्च आईटी सेवा खर्चों को प्रभावित कर रहा है। चोकालिंगम के अनुसार, 100 फीसदी से अधिक भुगतान अनुपात यह भी बताता है कि कंपनियां नई तकनीक में निवेश को लेकर आश्वस्त नहीं हैं, जिससे भारतीय आईटी सेवा उद्योग की दीर्घकालिक विकास क्षमता में निवेशकों का भरोसा बहाल नहीं होगा।
कुल मिलाकर, भारतीय आईटी कंपनियों द्वारा अपने शेयरधारकों को रिकॉर्ड भुगतान एक जटिल तस्वीर पेश करता है। एक ओर यह कंपनियों की पूंजी वापस करने की इच्छा को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह एआई के कारण भविष्य की अनिश्चितताओं और निवेश के प्रति संशय को भी उजागर करता है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां इस पूंजी का उपयोग कैसे करती हैं और क्या यह दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देगा या केवल अल्पकालिक राहत प्रदान करेगा।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.