नई दिल्ली: 12 जून, 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट (Ahmedabad Airport) से उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद हुए एयर इंडिया बोइंग फ्लाइट AI-171 क्रैश (Air India Boeing Flight AI-171 crash) का सच एक बार फिर सवालों के घेरे में है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (Federation of Indian Pilots - FIP) ने आधिकारिक जांच रिपोर्ट को चुनौती देते हुए दावा किया है कि इस दुखद दुर्घटना का कारण पायलट की लापरवाही नहीं, बल्कि विमान के सिस्टम में आई एक बड़ी बिजली की खराबी थी। इस खुलासे ने न केवल मृतक पायलटों के सम्मान पर लगे दाग को हटाने की उम्मीद जगाई है, बल्कि भारत में विमानन सुरक्षा (aviation safety) और जांच प्रक्रियाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला आम नागरिकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विमानन सुरक्षा के मानकों और जांच की निष्पक्षता से जुड़ा है, जो हर यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
AI-171 हादसे का सच: सिम्युलेटर टेस्ट ने खोली जांच की पोल
एफआईपी के प्रेसिडेंट कैप्टन सीएस रंधावा (Captain C.S. Randhawa) ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज दावे किए। उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं ने महत्वपूर्ण तकनीकी सबूतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया और देश के प्रमुख एविएशन एक्सपर्ट्स (aviation experts) को जांच से दूर रखा, ताकि वे अपने पहले से तय 'पायलट आत्महत्या' (pilot suicide) के निष्कर्ष पर पहुंच सकें। आधिकारिक अंतरिम रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फ्लाइट-क्रू ने जानबूझकर इंजन की फ्यूल सप्लाई (fuel supply) बंद कर दी थी, जिसके परिणामस्वरूप विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें सवार 250 लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, मैनुअल शटडाउन (manual shutdown) के ठीक चार सेकेंड बाद 'रैम एयर टर्बाइन' (RAM Air Turbine - RAT) नीचे गिर गया, जो कि पूरी तरह से बिजली जाने पर अपने आप चालू होने वाला एक बैकअप पावर सिस्टम (backup power system) है।
हालांकि, एफआईपी ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने उस घातक फ्लाइट के वजन, बैलेंस (balance) और मौसम की स्थितियों को हूबहू दोहराते हुए विस्तृत सिम्युलेटर टेस्ट (simulator tests) किए। इन टेस्ट के नतीजों ने आधिकारिक टाइमलाइन (official timeline) को गलत साबित कर दिया है। कैप्टन रंधावा ने बताया, "हमारे सिम्युलेटर टेस्ट साबित करते हैं कि मैनुअली फ्यूल बंद करने पर बैकअप टर्बाइन को नीचे गिरने में पूरे 18 सेकेंड लगते हैं। मैनुअल शटडाउन की स्थिति में चार सेकेंड की आधिकारिक टाइमलाइन भौतिक और तकनीकी रूप से असंभव है।"
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एफआईपी का तर्क है कि बैकअप टर्बाइन इतनी तेजी से इसलिए सक्रिय हुआ क्योंकि इंजन बंद होने से पहले ही विमान में बिजली की एक बड़ी खराबी आ गई थी, जिसने उसे बेकार कर दिया था। फेडरेशन का दावा है कि इसी सिस्टम की खराबी (system malfunction) ने इंजन स्विच (engine switch) को ट्रिप किया और अंततः विमान क्रैश हो गया। इस थ्योरी को फ्लाइट 171 में बचे एकमात्र व्यक्ति के बयान से भी बल मिलता है, जिसने बताया था कि विमान के नीचे गिरने (terminal descent) से ठीक पहले केबिन की लाइटें (cabin lights) टिमटिमा रही थीं और धीमी हो रही थीं। यह जानकारी अचानक और बड़े पैमाने पर बिजली जाने की एफआईपी की थ्योरी से पूरी तरह मेल खाती है।
जांच में पारदर्शिता की मांग: विशेषज्ञ को बाहर रखने के आरोप
एफआईपी ने यह भी बताया कि क्रैश हुए विमान का उस घातक उड़ान से पहले भी बिजली की अनसुलझी समस्याओं का रिकॉर्ड रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी जांचकर्ताओं ने भारत के शीर्ष बोइंग 787 एक्सपर्ट (Boeing 787 expert) माने जाने वाले कैप्टन आरएस संधू (Captain R.S. Sandhu) को वास्तविक जांच परीक्षणों से जानबूझकर दूर रखा। कैप्टन सीएस रंधावा ने सीधे तौर पर आरोप लगाया, "वे हमारे सबसे अनुभवी पायलट की राय को नजरअंदाज कर रहे हैं क्योंकि उनकी जानकारी से उनकी 'पायलट के आत्महत्या' वाली थ्योरी पूरी तरह गलत साबित हो जाएगी। किसी बड़ी मैकेनिकल (mechanical) या सॉफ्टवेयर खराबी (software malfunction) का सामना करने के बजाय, उन मृत पायलटों पर दोष मढ़ना आसान है जो अपना बचाव नहीं कर सकते।"
एफआईपी ने पुष्टि की है कि उसने अपना सिम्युलेटर डेटा (simulator data) और नतीजे बोइंग (Boeing) और सरकारी एविएशन अथॉरिटी (government aviation authority), दोनों को आधिकारिक तौर पर सौंप दिए हैं। फेडरेशन मांग कर रहा है कि जब तक टर्बाइन डिप्लॉयमेंट (turbine deployment) से जुड़ी गणितीय और तकनीकी गड़बड़ियों की पूरी तरह से जांच नहीं हो जाती, तब तक दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट (final report) प्रकाशित करने पर तुरंत रोक लगाई जाए। एफआईपी ने डेटा की पारदर्शी और निष्पक्ष समीक्षा (transparent and impartial review) सुनिश्चित करने के लिए आधिकारिक जांच टीम में कैप्टन संधू को तुरंत वापस शामिल करने की भी मांग की है।
इस नए मोड़ ने एयर इंडिया AI-171 हादसे की जांच में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। यह न केवल मृत पायलटों के सम्मान से जुड़ा है, बल्कि भारत की विमानन सुरक्षा और जांच प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। यह मामला दिखाता है कि कैसे तकनीकी सबूत और विशेषज्ञ की राय किसी भी दुर्घटना की वास्तविक वजह को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आगे देखना होगा कि सरकारी एविएशन अथॉरिटी एफआईपी के इन गंभीर आरोपों और मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या इस दुखद घटना का असली सच सामने आ पाएगा।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.