भविष्य की महामारियों की रोकथाम: वैश्विक समझौते को पूरा करने की UN की अपील

भविष्य की महामारियों की रोकथाम के लिए वैश्विक सहयोग

भविष्य की महामारियों की रोकथाम के लिए एक ऐतिहासिक वैश्विक समझौते को अंतिम रूप देने का आह्वान अब और भी मुखर हो गया है। संयुक्त राष्ट्र समाचार (UN News) के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रोस ऐडहोनॉम घेब्रेयेसस और ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने एक संयुक्त पत्र लिखकर इस बात पर ज़ोर दिया है कि कोविड-19 जैसी विनाशकारी घटनाओं को दोबारा होने से रोकना पूरी मानवता की साझा ज़िम्मेदारी है। यह अपील ऐसे समय में आई है जब दुनिया एक और संभावित वैश्विक स्वास्थ्य संकट की आशंकाओं के बीच खड़ी है, और इस समझौते को पूरा करना भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षा कवच बन सकता है।

कोविड-19 महामारी ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। अनुमानतः 2 करोड़ लोगों की जान गई और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लगभग 13 ट्रिलियन डॉलर (trillion dollars) का भारी नुक़सान हुआ। अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव था, परिवारों ने अपने प्रियजनों को अकेलेपन में खो दिया, और अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों ने अभूतपूर्व तनाव का सामना किया। इस सामूहिक त्रासदी ने दुनिया भर के देशों के बीच एक दृढ़ संकल्प पैदा किया कि भविष्य में किसी भी महामारी का सामना बिना पूर्व तैयारी के नहीं किया जाएगा।

इस संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ी उम्मीद तब जगी जब एक वर्ष से अधिक समय पहले देशों ने WHO महामारी समझौते (Pandemic Accord) को अपनाया। यह समझौता महामारी की रोकथाम, पूर्व तैयारी और उससे निपटने के लिए अधिक प्रभावी सहयोग का प्रतीक था। संयुक्त पत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि एक विभाजित दुनिया में इस तरह के समझौते को अपनाना कोई साधारण उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह आशा और एक-दूसरे पर विश्वास का प्रतीक था। हालांकि, यह उम्मीद अभी पूरी नहीं हुई है, और इसे ज़मीन पर उतारने की ज़िम्मेदारी अब विश्व नेताओं के हाथों में है।

वैश्विक महामारी समझौते के मार्ग में बाधा: PABS परिशिष्ट

ब्राज़ील के राष्ट्रपति और WHO प्रमुख ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि इस समझौते के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा ‘पैथोजन ऐक्सेस एंड बेनिफ़िट-शेयरिंग’ (PABS) परिशिष्ट (annex) है, जो अभी तक अधूरा है। यह परिशिष्ट समझौते का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। PABS ढाँचा देशों को ख़तरनाक रोगजनकों (pathogens) की आनुवंशिक जानकारी (genetic information) की शीघ्र पहचान करने और उसे साझा करने में सक्षम बनाता है, ताकि वैज्ञानिक जीवनरक्षक जाँच, उपचार और टीकों का तेज़ी से विकास कर सकें। संयुक्त संदेश में चेतावनी दी गई है कि इस परिशिष्ट के बिना, महामारी समझौता औपचारिक रूप से लागू नहीं हो सकेगा, जिससे भविष्य की महामारियों से बेहतर ढंग से निपटने का वैश्विक संकल्प अधूरा रह जाएगा।

जटिल चुनौतियाँ और आगे की राह

PABS परिशिष्ट को अंतिम रूप देने में कई जटिल चुनौतियाँ सामने हैं, विशेष रूप से इस बात को लेकर कि रोगजनकों के बारे में जानकारी साझा किए जाने से प्राप्त लाभों का न्यायसंगत वितरण (equitable distribution) किस तरह सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए ऐसा शासन ढाँचा (governance framework) बनाना ज़रूरी है जो सभी देशों के साथ निष्पक्ष व्यवहार की गारंटी दे। ये वही प्रश्न थे जो कोविड-19 महामारी के दौरान सुरक्षा और संसाधनों तक समान पहुँच में मौजूद ख़ामियों का कारण बने थे। इन मुद्दों पर सहमति बनाने और शेष मतभेदों को दूर करने के लिए वार्ताकार 6 से 17 जुलाई के बीच फिर से बैठक करेंगे।

संयुक्त अपील में विश्व नेताओं के समक्ष तीन प्रमुख आग्रह रखे गए हैं। पहला, उच्चतम स्तर पर राजनैतिक इच्छाशक्ति (political will) दिखाने की आवश्यकता है। नेताओं से आग्रह किया गया है कि वे PABS परिशिष्ट को अंतिम रूप देने को प्राथमिकता दें और वार्ताकारों को व्यापक सहमति बनाने के लिए आवश्यक समर्थन प्रदान करें। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह समझौता देशों की संप्रभुता (sovereignty) को किसी तरह भी कमज़ोर नहीं करता और न ही विश्व स्वास्थ्य संगठन को तालाबन्दी (lockdowns) या टीकाकरण (vaccination) अनिवार्य करने जैसे क़दम थोपने का अधिकार देता है। ऐसे निर्णय पूरी तरह अलग-अलग देशों के अधिकार क्षेत्र में ही रहेंगे।

दूसरा, समानता और न्याय की भावना को केंद्र में रखना होगा। PABS व्यवस्था इस सिद्धांत पर आधारित है कि जो देश ख़तरनाक रोगजनकों की जानकारी शीघ्रता से साझा करते हैं, उन्हें यह भरोसा भी होना चाहिए कि उनसे विकसित होने वाले टीके, उपचार और अन्य लाभ, उनकी आबादी तक भी पहुँचेंगे। पत्र में कहा गया है कि महामारी की रोकथाम कोई दान का कार्य नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक रणनीति है, क्योंकि प्रकोप को प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रित करने से जान-माल का नुक़सान और आर्थिक लागत दोनों कम होते हैं। इसके लिए न्यायसंगत और सुनिश्चित पहुँच की गारंटी देने वाले स्पष्ट और स्थायी नियमों की आवश्यकता है।

तीसरा, तत्काल कार्रवाई की भावना अपनाने की ज़रूरत है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले एक दशक में एक और महामारी आने की लगभग 25 प्रतिशत संभावना है। बदलती पर्यावरणीय और सामाजिक परिस्थितियाँ दुनिया भर में नई बीमारियों के उभरने के जोखिम को बढ़ा रही हैं, जबकि जैव प्रौद्योगिकी (biotechnology) में प्रगति से आकस्मिक या जानबूझकर रोगजनकों के फैलने की आशंकाएँ भी बढ़ी हैं। इसलिए पत्र में 17 जुलाई को समझौते की समय-सीमा के रूप में मानने और किसी भी ख़तरनाक देरी से बचने की पुकार लगाई गई है।

कई देशों में इबोला जैसी मौजूदा बीमारी के प्रकोप यह दर्शाते हैं कि वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम अब भी बने हुए हैं, जबकि इनके इलाज के लिए अब भी कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। कोविड-19 महामारी से हुई भारी मानवीय और आर्थिक क्षति की याद दिलाते हुए पत्र में कहा गया है कि इसकी तुलना में PABS जैसे प्रारंभिक चेतावनी और प्रतिक्रिया तंत्र में निवेश अपेक्षाकृत कम ख़र्चीला, लेकिन बेहद ज़रूरी है। इतिहास में दुनिया ने एकजुट होकर चेचक का उन्मूलन किया, पोलियो को लगभग समाप्ति के कगार तक पहुँचाया और एचआईवी, तपेदिक व मलेरिया जैसी बीमारियों से लड़ाई में लाखों लोगों की जान बचाई है। इस समझौते को अंतिम रूप देना उस विरासत से अलग हटना नहीं है, बल्कि उसी का स्वाभाविक अगला अध्याय है, और इसे पूरा करना हमारी पहुँच के भीतर है।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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