ग्लोबल फंड्स से निवेशकों ने निकाले 7 अरब डॉलर: अब AI थीम पर लगा रहे हैं पैसा, जानिए क्यों

ग्लोबल फंड्स से निकासी, AI में निवेश बढ़ता

वैश्विक वित्तीय बाजारों में जारी उथल-पुथल के बीच, निवेशकों के रुख में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पिछले आठ हफ्तों में पहली बार ग्लोबल इक्विटी फंड्स (Global Equity Funds) से बड़े पैमाने पर साप्ताहिक निकासी दर्ज की गई है। इलारा कैपिटल (Elara Capital) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते निवेशकों ने वैश्विक बाजारों से करीब 7 अरब डॉलर की भारी-भरकम रकम निकाल ली है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब निवेशक उभरते बाजारों और कमोडिटी से जुड़े सेक्टर्स में जोखिम लेने से बच रहे हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ रहा है।

मार्च के बाद यह पहली बार है जब वैश्विक शेयरों से इतनी बड़ी शुद्ध निकासी देखी गई है, जब ईरान संकट अपने चरम पर था। पिछले हफ्ते चीन, जापान और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में बड़े पैमाने पर निवेश की निकासी (redemption) हुई है। यह स्पष्ट संकेत देता है कि ईरान समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता और अन्य भू-राजनीतिक तनावों के कारण निवेशक अब सुरक्षित विकल्पों की तलाश में हैं।

उभरते बाजारों पर बढ़ता दबाव और भारतीय बाजार से दूरी

दुनिया भर के उभरते बाजारों (Emerging Markets) के लिए पिछले कुछ हफ्ते काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उभरते बाजारों से लगातार सातवें हफ्ते निवेश की निकासी हुई है। इस कमजोरी की मुख्य वजह चीन के घरेलू बाजार में जारी बिकवाली और भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) द्वारा लगातार पैसे निकालना है। वैश्विक उभरते बाजार (Global Emerging Market - GEM) फंड्स में भी लगातार चौथे हफ्ते गिरावट का दौर जारी रहा है। मार्च के बाद ऐसा पहली बार देखा गया है जब रीडम्पशन का ऐसा दौर देखा गया है, जिससे कुल निकासी का आंकड़ा बढ़कर 4.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

इलारा कैपिटल के उपाध्यक्ष सुनील जैन (Sunil Jain) का कहना है कि यह रुझान साफ करता है कि उभरते बाजारों की संपत्तियों में निवेशकों की दिलचस्पी अब बहुत कम हो गई है और वे अब केवल कुछ चुनिंदा मौकों पर ही दांव लगा रहे हैं। मई के महीने में इन बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, जहां दक्षिण कोरिया और ताइवान में क्रमशः 28% और 15% की तेजी आई, वहीं दूसरी ओर इंडोनेशिया में 12%, ब्राजील में 7% और भारत में 3% की गिरावट दर्ज की गई।

भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों का रुख

भारत के संदर्भ में देखें तो घरेलू बाजार से विदेशी निवेशकों (Foreign Portfolio Investors - FPI) की निकासी का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। पिछले हफ्ते विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 46.3 करोड़ डॉलर की रकम निकाल ली। विदेशी निवेश की आवक में कुछ समय के लिए जो स्थिरता आई थी, उसके बाद यह नई निकासी देखने को मिली है। अगर पूरे मई महीने की बात करें तो 27 मई तक FPI की कुल निकासी 34,000 करोड़ रुपये रही है। हालांकि, यह निकासी मार्च के 1.22 लाख करोड़ रुपये और अप्रैल के 70,000 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है, लेकिन फिर भी बाजार के सेंटिमेंट (sentiment) पर इसका असर दिख रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) थीम पर निवेशकों का बढ़ता भरोसा

इस चौतरफा बिकवाली और अनिश्चितता के बीच कुछ चुनिंदा सेक्टर ऐसे भी हैं जहां निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। इलारा कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय केवल अमेरिका केंद्रित और ग्लोबल मैंडेट फंड (Global Mandate Funds) ही ऐसी मुख्य कैटेगरी हैं जिनमें लगातार नया निवेश आ रहा है। इसमें भी सबसे ज्यादा निवेश टेक्नोलॉजी (Technology), इंडस्ट्रियल (Industrial) और सेमीकंडक्टर (Semiconductor) फंडों में देखा जा रहा है। इससे यह साफ पता चलता है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स का सबसे पसंदीदा विषय अभी भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) थीम ही बनी हुई है और वे इसी पर अपना पूरा फोकस रख रहे हैं।

कमोडिटी और कीमती धातुओं में सुस्ती

निवेशकों की पसंद में आया यह बड़ा बदलाव कमोडिटी मार्केट (Commodity Market) में भी साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। इस हफ्ते कीमती धातुओं से जुड़े फंडों से करीब 1.1 अरब डॉलर की भारी निकासी की गई है। हाल ही में चांदी ने अपनी तेजी की रफ्तार खोई थी और उसके बाद मार्च से सोने की कीमतों में भी सुस्ती का दौर शुरू हो गया है। रिपोर्ट के नोट में यह भी बताया गया है कि जिन सेक्टर्स को पहले एआई और इलेक्ट्रीफिकेशन (Electrification) ट्रेड से भारी फायदा हुआ था, जैसे दक्षिण कोरिया, ताइवान, ब्राजील, चांदी, सोना, कमोडिटी और एनर्जी, उन सभी में अब निवेश या तो बहुत धीमा हो गया है या फिर वहां से पैसे निकाले जा रहे हैं। अब बाजार में एकमात्र मजबूत निवेश सिर्फ यूएस टेक (US Tech), इंडस्ट्रियल और सेमीकंडक्टर सेगमेंट में ही दिखाई दे रहा है।

यह घटनाक्रम वैश्विक निवेशकों के बीच एक स्पष्ट रुझान को दर्शाता है: वे अब व्यापक जोखिम लेने से बच रहे हैं और इसके बजाय लक्षित, उच्च-विकास वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े तकनीकी नवाचारों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उभरते बाजारों और कमोडिटी से दूर हटना, और अमेरिकी प्रौद्योगिकी शेयरों की ओर बढ़ना, यह बताता है कि आने वाले समय में वैश्विक पूंजी प्रवाह इन्हीं चुनिंदा क्षेत्रों की ओर केंद्रित रहेगा, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों को अपनी नीतियों और आर्थिक आकर्षण को और मजबूत करने की आवश्यकता होगी।

*Image is AI-generated and used for representational purposes only.

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