कनाडा के प्रशांत तट पर स्थित समुद्र के अंदर के 'तैरते जंगल' (Floating forests) कहे जाने वाले केल्प (Kelp) में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण बीते दशकों में 60 से 99 फीसदी तक की चौंकाने वाली गिरावट दर्ज की गई है। यह खुलासा यूनिवर्सिटी ऑफ विक्टोरिया (University of Victoria) के एक नए शोध में हुआ है, जो बताता है कि समुद्री पारिस्थितिकी (Marine Ecosystem) पर जलवायु परिवर्तन का असर जितना समझा जा रहा था, उससे कहीं पहले और ज्यादा व्यापक रूप से पड़ रहा है। यह खबर न केवल समुद्री जीवन के लिए चिंताजनक है, बल्कि उन तटीय समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है जो इन समुद्री जंगलों पर निर्भर करते हैं।
समुद्री केल्प जंगल: दशकों पुरानी गिरावट का भयावह सच
शोधकर्ताओं ने ‘इकोलॉजिकल एप्लिकेशंस’ (Ecological Applications) नामक वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित अपने अध्ययन में बताया कि केल्प जंगलों का यह विनाश हाल की घटनाओं का परिणाम नहीं है, बल्कि 1970 के दशक से ही यह प्रक्रिया तेजी से चल रही है। वैज्ञानिकों ने 1972 से लेकर अब तक के पुराने नक्शे, हवाई तस्वीरें, गोताखोरी के दौरान किए गए अध्ययन और लाइटहाउस (Lighthouse) से मिले समुद्री तापमान के रिकॉर्ड (Records) का गहन विश्लेषण किया। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया (British Columbia) तट के पास वैंकूवर आइलैंड (Vancouver Island) के कॉमॉक्स (Comox) और डेनमैन आइलैंड (Denman Island) जैसे इलाकों के समुद्री केल्प जंगलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। 2023 में किए गए नए सर्वेक्षणों की पुराने आंकड़ों से तुलना करने पर यह भयावह सच सामने आया।
समुद्र के बढ़ते तापमान ने ली जान
शोध में पाया गया कि 1970 के दशक में इन इलाकों में लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले विशाल केल्प जंगल थे, जो आज लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस गिरावट का बड़ा हिस्सा 1972 से 1984 के बीच ही हुआ था, जब हालिया 'हीटवेव' (Heatwave) जैसी बड़ी गर्म समुद्री घटनाएं नहीं हुई थीं। इसका सीधा अर्थ है कि समुद्र का तापमान लंबे समय से बढ़ रहा है। 1900 के शुरुआती वर्षों की तुलना में 1970 के दशक तक समुद्र काफी गर्म हो चुका था, और यही तापमान वृद्धि ठंडे पानी में रहने वाली केल्प प्रजातियों के लिए घातक साबित हुई। कुछ क्षेत्रों में इनकी संख्या में 60 से 99 प्रतिशत तक की भारी कमी देखी गई। चिंताजनक बात यह है कि जब ये ठंडे पानी की प्रजातियां खत्म हुईं, तो उनकी जगह नई गर्म पानी की प्रजातियां भी नहीं ले सकीं, जिससे समुद्र के अंदर एक खालीपन सा छा गया।
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समुद्री जीवन और तटीय सुरक्षा पर गहरा प्रभाव
केल्प जंगल समुद्री जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ये हेरिंग (Herring), रॉकफिश (Rockfish) और सैल्मन (Salmon) जैसी कई मछलियों के लिए आवास (Habitat) और भोजन का प्रमुख स्रोत हैं। इन जंगलों के खत्म होने से इन मछलियों के रहने और प्रजनन की जगहें कम हो जाती हैं, जिससे मछली पालन (Fisheries) और समुद्री खाद्य श्रृंखला (Marine Food Chain) गंभीर रूप से प्रभावित होती है। इसके अलावा, केल्प जंगल तटों को मजबूत करते हैं और समुद्री तूफानों (Storms) से सुरक्षा भी प्रदान करते हैं। इसलिए, इनका नुकसान केवल समुद्री जीवों के लिए ही नहीं, बल्कि तटीय समुदायों और उनकी आजीविका के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय है।
यह शोध हमें बताता है कि जलवायु परिवर्तन का असर अचानक नहीं होता, बल्कि यह धीरे-धीरे कई दशकों में पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बदल देता है। जो स्थिति हमें आज 'सामान्य' लगती है, वह शायद पहले से ही काफी खराब हो चुकी स्थिति का एक हिस्सा हो सकती है। इसलिए, यह अत्यंत आवश्यक है कि हम पुराने रिकॉर्ड और सटीक आंकड़ों के आधार पर समुद्री पर्यावरण को समझें और उसकी सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाएं। यदि समय रहते इन समुद्री जंगलों को बचाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए, तो ऐसे और भी समुद्री जीव और उनके आश्रय खतरे में पड़ सकते हैं, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव मानव जीवन पर भी पड़ेगा।
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