हेनले पासपोर्ट इंडेक्स (Henley Passport Index) 2026 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग में भारत 80वें स्थान पर है। यह पिछले साल (2025 में 85वें स्थान) की तुलना में एक मामूली सुधार है, लेकिन आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर अग्रसर देश के लिए यह रफ्तार काफी धीमी मानी जा रही है। यह आंकड़ा भारतीय नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा की स्वतंत्रता को दर्शाता है और मौजूदा स्थिति को समझने के लिए गहराई से विश्लेषण की मांग करता है।
क्या इकोनॉमी का आकार तय करता है पासपोर्ट की ताकत?
आमतौर पर यह माना जाता है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था जितनी मजबूत होगी, उसका पासपोर्ट उतना ही शक्तिशाली होगा। हालांकि, हेनले पासपोर्ट इंडेक्स के आंकड़े इस धारणा को चुनौती देते हैं। उदाहरण के लिए, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, अमेरिका (USA) इस सूची में 10वें स्थान पर खिसक गया है, और 35 से अधिक ऐसे देश हैं जिनके पासपोर्ट अमेरिका के पासपोर्ट से ज्यादा शक्तिशाली हैं। चीन (China) भी, जिसकी अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है, टॉप 50 देशों में शामिल नहीं है और 59वें स्थान पर है।
इसके उलट, जर्मनी (Germany), फ्रांस (France), इटली (Italy) और जापान (Japan) जैसे देश लगातार इस लिस्ट में सबसे ऊपर बने हुए हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक अविश्वसनीय छलांग लगाई है, जो 38वें स्थान से सीधे दूसरे (2nd) स्थान पर पहुंच गया है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कुल जीडीपी (GDP) और पासपोर्ट की मजबूती के बीच कोई सीधा या अनिवार्य संबंध नहीं है।
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कैसे तय होती है किसी भी पासपोर्ट की रैंकिंग और भारत की स्थिति
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की रैंकिंग पूरी तरह से इस बात पर आधारित है कि किसी देश के नागरिकों को यात्रा की कितनी स्वतंत्रता मिलती है। विशेष रूप से, वे बिना पहले से वीजा (Visa) लिए कितने देशों की यात्रा कर सकते हैं। यह डेटा इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) से लिया गया है। जानकारों के अनुसार, रैंकिंग तय करने में कुल जीडीपी (Total GDP) के बजाय कुछ अन्य महत्वपूर्ण कारक भूमिका निभाते हैं:
माइग्रेशन रिस्क (Migration Risk): यह आकलन किया जाता है कि किसी देश के नागरिक अवैध रूप से दूसरे देशों में प्रवास करने की कितनी संभावना रखते हैं।
दस्तावेज सुरक्षा और कूटनीति (Document Security and Diplomacy): पासपोर्ट की सुरक्षा विशेषताएं और अन्य देशों के साथ राजनयिक संबंध भी महत्वपूर्ण होते हैं।
वर्तमान में, भारतीय पासपोर्ट धारकों को दुनिया भर की 56 जगहों पर बिना वीजा (Visa-free), वीजा-ऑन-अराइवल (Visa-on-arrival) या ईटीए (ETA) की सुविधा मिलती है। इनमें से अधिकांश देश अफ्रीका (Africa) और दक्षिण-पूर्व एशिया (South-East Asia) में हैं। इसके विपरीत, 170 देशों में जाने के लिए भारतीयों को अभी भी पहले से पारंपरिक वीजा (Traditional Visa) लेना पड़ता है। पिछले 20 सालों में भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग 70 से 90 के दायरे के बीच ही घूमती रही है, जिसमें 2015 में यह 88वें स्थान पर सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि 2024 में भारत ने 62 गंतव्यों तक आसान पहुंच के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था, लेकिन कुल मिलाकर पिछले 10 सालों में भारत को केवल 4 नए गंतव्यों का ही शुद्ध लाभ मिला है, जबकि शीर्ष देशों ने इस दौरान 10 से 20 नए देशों को अपने साथ जोड़ा है।
यह आंकड़े इस बात पर जोर देते हैं कि आर्थिक विकास के साथ-साथ कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करना, नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय में सुधार करना और दस्तावेज़ सुरक्षा को बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक स्थिति में सुधार के लिए इन सभी पहलुओं पर समग्र रूप से काम करना आवश्यक है ताकि देश की बढ़ती आर्थिक शक्ति उसकी वैश्विक पहुंच में भी परिलक्षित हो सके।
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