इजरायल की जिद ने मध्य पूर्व में शांति के प्रयासों को फिर गहरा झटका दिया है। हिज्बुल्लाह (Hezbollah) के साथ संभावित शांति समझौते (peace agreement) की खबरें आने के 24 घंटे के भीतर ही इजरायल ने लेबनान (Lebanon) के अलग-अलग इलाकों में फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। इन हमलों में सात लोगों के मारे जाने की दुखद खबर है, जिनमें दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं। इजरायल की इस ताजा कार्रवाई ने ईरान (Iran) और अमेरिका (US) के बीच चल रही शांति वार्ता पर भी खतरे के बादल मंडरा दिए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है। यह घटना स्पष्ट रूप से शांति समझौते को खतरे में डाल रही इजरायल की जिद को दर्शाती है।
लेबनान की नेशनल न्यूज़ एजेंसी (National News Agency) के अनुसार, इजरायली हमलों में दक्षिणी शहर नबातिह (Nabatiyeh) और उसके आसपास के गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इन हमलों के बाद मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका थी, जिनमें से कम से कम सात शव निकाले जा चुके हैं। यह ऐसे समय में हुआ है जब मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम (ceasefire) कराने की कोशिश कर रहे थे, ताकि इस क्षेत्र में दशकों से चली आ रही हिंसा पर विराम लग सके।
इजरायल-लेबनान संघर्ष: युद्धविराम के बाद भी हमला, क्षेत्रीय शांति पर खतरा
दरअसल, शुक्रवार को लेबनान में हुई भारी गोलाबारी में कम से कम 47 लोगों और चार इजराइली सैनिकों के मारे जाने के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी। इसी के मद्देनजर कतर (Qatar), अमेरिका और ईरान जैसे मध्यस्थ इज़राइल और लेबनान के चरमपंथी समूह हिज़्बुल्लाह के बीच लड़ाई रोकने की कोशिश कर रहे थे। इज़राइली सेना के एक अधिकारी ने दावा किया था कि हिज़्बुल्लाह ने रात भर में दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सेना पर 50 से ज़्यादा प्रोजेक्टाइल (projectiles) दागे थे, जिसके जवाब में इजरायल ने चरमपंथी समूह को निशाना बनाया। वहीं, वाशिंगटन (Washington) में इज़राइल के राजदूत येचिएल लीटर (Yechiel Leiter) ने 'X' पर स्पष्ट किया था कि अगर हिज़्बुल्लाह समझौते का पालन करता है और हमले बंद कर देता है, तो इज़राइल "तत्काल सीज़फ़ायर के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध" है।
दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह ने भी सार्वजनिक बयानों में कहा है कि अगर इजरायल सीजफायर का पालन करता है तो वह भी करेगा, लेकिन उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि असल में कोई सीजफायर लागू हो गया है या नहीं। हिज़्बुल्लाह के एक अधिकारी ने शुक्रवार को सीज़फ़ायर समझौते की ख़बरें आने के बाद कहा था कि कतर, अमेरिका और ईरान इज़राइल-हिज़्बुल्लाह सीज़फ़ायर कराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्होंने भी किसी समझौते की पुष्टि नहीं की थी।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच युद्धविराम को फिर से लागू करने पर सहमति बनने की बात सामने आई थी। अधिकारियों ने यह भी बताया था कि दक्षिणी लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जबरदस्त लड़ाई के बाद शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत रद्द कर दी गई। इस घटनाक्रम ने ईरान में युद्ध खत्म करने के शुरुआती समझौते पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। तीन क्षेत्रीय अधिकारियों और मामले की जानकारी रखने वाले एक चौथे व्यक्ति के अनुसार, ईरानी अधिकारी अपनी निर्धारित योजना के मुताबिक स्विट्जरलैंड (Switzerland) नहीं गए क्योंकि उनका कहना था कि बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में लड़ाई रुकनी चाहिए। इसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने भी अपनी यात्रा टाल दी थी।
आगे क्या संकेत: मध्य पूर्व में शांति की राह में चुनौतियां
इजरायल द्वारा युद्धविराम की खबरों के बावजूद किए गए ये हमले मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका हैं। यह दर्शाता है कि दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी अभी भी गहरी है और किसी भी समझौते को जमीन पर उतारना बेहद मुश्किल है। इन हमलों से न केवल मानवीय संकट गहराएगा बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता भी खतरे में पड़ सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच रद्द हुई वार्ता भी इस बात का संकेत है कि लेबनान में चल रहा संघर्ष बड़े कूटनीतिक प्रयासों को भी प्रभावित कर रहा है। यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो दीर्घकालिक शांति की उम्मीदें धूमिल हो सकती हैं और यह संघर्ष क्षेत्र के अन्य देशों में भी फैल सकता है।
फिलहाल, मध्यस्थों पर एक बार फिर से भारी दबाव है कि वे इज़रायल और हिज़्बुल्लाह दोनों को बातचीत की मेज पर लाएं और एक स्थायी युद्धविराम सुनिश्चित करें। इस नाजुक स्थिति में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है ताकि निर्दोष नागरिकों की जान बचाई जा सके और क्षेत्रीय शांति को बहाल किया जा सके।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.