मुंबई, जिसे 'सपनों का शहर' (City of Dreams) कहा जाता है, आज एक ऐसी हकीकत से जूझ रहा है जो डराने वाली है। देश की आर्थिक राजधानी और तीन तरफ से समंदर (Sea) से घिरे होने के बावजूद, मुंबई की प्यास बुझाने वाली सातों झीलें लगभग सूख चुकी हैं। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले जलाशयों में अब केवल 8.34 फीसदी पानी ही बचा है। यह स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अगर अगले कुछ दिनों में भारी बारिश नहीं हुई, तो शहर में बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मच सकता है।
बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने बिगड़ते हालात को देखते हुए पूरे मुंबई में पानी की सप्लाई में 10 फीसदी की कटौती (Water Cut) लागू कर दी है। इसके साथ ही, गैर-जरूरी कामों जैसे कि कंस्ट्रक्शन साइट्स और स्विमिंग पूल में पानी के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है। पिछले साल इसी समय तक इन झीलों में 26 फीसदी से ज्यादा पानी मौजूद था, जो इस साल की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति थी।
सिर्फ 24 दिन का स्टॉक और बढ़ती मांग
मुंबई की प्यास बुझाने का जिम्मा सात झीलों—भातसा, मिडिल वैतरणा, अपर वैतरणा, मोदक सागर, तान्सा, विहार और तुलसी पर है। इन झीलों की कुल क्षमता लगभग 1,44,736 करोड़ लीटर है, लेकिन 22 जून तक के डेटा के अनुसार, इनमें मात्र 13 हजार करोड़ लीटर पानी ही शेष है। विशेषज्ञों का कहना है कि झीलों में मौजूद पानी का हर एक प्रतिशत (Percentage) लगभग तीन दिन की सप्लाई के लिए पर्याप्त होता है। इस हिसाब से मुंबई के पास अब केवल 24 दिनों का स्टॉक बचा है।
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मॉनसून में देरी और अल-नीनो का डबल अटैक
मुंबई में इस साल पानी की किल्लत की सबसे बड़ी वजह मॉनसून (Monsoon) का समय पर न आना और अल-नीनो (El-Nino) का प्रभाव माना जा रहा है। मौसम विभाग (IMD) के आंकड़े बताते हैं कि जून के महीने में मुंबई में अब तक सामान्य से 98 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जहां अब तक शहर में 247.9 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी, वहां केवल 4.3 मिलीमीटर ही दर्ज की गई है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी राज्य की स्थिति को गंभीर बताया है। उनके अनुसार, जून महीने में पूरे महाराष्ट्र में सामान्य से 80 फीसदी कम बारिश हुई है, जिससे न केवल मुंबई बल्कि कई अन्य जिलों में भी पेयजल (Drinking Water) का संकट पैदा हो गया है। मुंबई की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ भूजल यानी ग्राउंड वॉटर (Groundwater) का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि समंदर के किनारे होने के कारण यहाँ का पानी खारा (Saline) है। शहर पूरी तरह से बारिश के पानी पर ही निर्भर है।
क्या बारिश लाएगी राहत?
मुंबई में पीने के पानी का संकट गहराने की एक वजह झीलों के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) में बारिश का न होना भी है। बीएमसी के डेटा के अनुसार, अपर वैतरणा, भातसा और विहार जैसी बड़ी झीलों में बारिश की एक बूंद तक नहीं गिरी है। केवल मोदक सागर और तान्सा में नाममात्र की बारिश हुई है। सप्लाई और डिमांड के बीच बढ़ते अंतर ने नगर निगम की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि शहर को रोजाना 446 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है।
फिलहाल, मुंबईवासियों की नजरें आसमान की ओर टिकी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि 25 और 26 जून के आसपास शहर में मॉनसून सक्रिय हो सकता है। यदि इन तारीखों पर अच्छी बारिश होती है, तो झीलों का जलस्तर बढ़ सकता है और संकट कुछ हद तक टल सकता है। हालांकि, मौजूदा डेटा यह साफ संकेत देता है कि भविष्य में जल प्रबंधन (Water Management) के लिए मुंबई को और भी ठोस और आधुनिक नीतियां बनाने की जरूरत है, ताकि शहर को केवल बारिश के भरोसे न रहना पड़े।
*Image is AI-generated and used for representational purposes only.